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फिर संगठित हो रहे हैं माओवादी PDF Print E-mail
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Friday, 29 November 2013 09:26

जनसत्ता संवाददाता

कोलकाता। पश्चिम मेदिनीपुर के झाड़ग्राम इलाके में माओवादी एक बार फिर संगठित हो रहे हैं। हाल में नगरपालिका चुनावों में झाड़ग्राम नगरपालिकापर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा हो गया। मगर इससे हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

माओवादी फिलहाल सामने तो नहीं आ रहे हैं लेकिन हाल में इलाके में चिपकाए गए पोस्टरों में संगठन ने अपने नेता किशनजी के खिलाफ मुखबिरी के लिए जागोरी बास्के और सुचित्रा महतो को सजा देने का एलान किया है। उसके बाद से ही स्थानीय लोगों में आतंक है।

 

जागोरी और सुचित्रा आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सुचित्रा तो सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान किशनजी के साथ ही थी। सूत्रों ने बताया कि झाड़ग्राम इलाके में हाथ से लिख कर चिपकाए गए पोस्टरों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी भैरव वाहिनी यानी गुंडों पर आम लोगों के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया है। किशनजी के दौर में भाकपा (माओवादी) की राज्य समिति के एकमात्र जीवित सदस्य विकास अपने सहयोगियों के साथ मिल कर संगठन को दोबारा खड़ा करने का प्रयास कर रहा है। वह पश्चिम मेदिनीपुर व पुरुलिया के झारखंड से सटे इलाकों के अलावा बांकुड़ा में भी अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। हाल में जारी एक बयान में विकास ने 30 नवंबर को जंगलमहल इलाके में बंद की अपील की है। किशनजी की मौत के बाद माओवादियों की ओर से पहली बार बंद की अपील की गई है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि बुड़ीसोल जंगल, बेलपहाड़ी व सांखाभाग इलाके में छोटे-छोटे दस्तों में घूम कर माओवादी लोगों से संपर्क कर रहे हैं। बिना किसी वर्दी के घूमने वाले इन युवकों को देख कर यह बताना मुश्किल है कि वे माओवादी हैं या गांव वाले। माओवादी पहले हरे रंग की वर्दी में घूमते थे।

पुलिस को संदेह है कि पड़ोसी झारखंड से भी माओवादी सांखाभागा के जंगलों में आ रहे हैं। यह इलाका पहले लंबे समय तक माओवादियों की सुरक्षित शरणस्थली रहा है। हाल में सुरक्षा बलों ने लालगढ़ व आसपास के इलाकों से कई माओवादी पोस्टर व विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है। रामगढ़ के बांकीसोल जंगल से कुछ हथियार व गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं।

सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने कहा कि इन वस्तुओं की बरामदगी से साफ है कि माओवादी इलाके में दोबारा सक्रिय हो रहे हैं। इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों की पांच कंपनियां तैनात हैं। लेकिन सुरक्षा बलों के मौजूदगी के बावजूद माओवादी इलाके में कैसे घुस रहे हैं? इस सवाल पर एक अधिकारी का कहना था कि माओवादी अब सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ से बच रहे हैं।  वे छोटे-छोटे समूहों में आकर गांवों में बैठकें करने के बाद जंगल में जाकर छिप जाते हैं।

 

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