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अभिषेक वर्मा को जालसाजी मामले में नहीं मिली माफी PDF Print E-mail
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Friday, 29 November 2013 09:09

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हथियारों के विवादास्पद सौदागर अभिषेक वर्मा को जालसाजी के मामले में माफी देने की मांग करने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) की याचिका खारिज कर दी है। यह मामला एक कारोबारी को फंसाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने से संबंधित है और इसमें अभिषेक वर्मा व प्रवर्तन निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी आरोपी हैं।

न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अभिषेक वर्मा को माफी देने का निचली अदालत का आदेश निरस्त करने का दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए सीबीआइ की याचिका खारिज कर दी।

 

अदालत ने कहा कि माफी की अर्जी का निबटारा करते समय अदालत के सामने विचार के लिए सारे तथ्य पेश ही नहीं किए गए थे। अदालत ने कहा कि इस अर्जी का निबटारा ऐसे किया गया कि मानो अभिषेक वर्मा और सीबीआइ अदालत से लुका छिपी का खेल खेल रहे थे और वर्मा के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के बारे में अदालत द्वारा पूछे जाने के बावजूद जांच एजंसी ने कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई थी। शीर्ष अदालत ने अलग से अपने फैसले में भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी अग्रवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई


वापस लेने का आदेश दिया है। इस अधिकारी को 13 साल पहले निलंबित किया गया था। इस मामले में अभिषेक वर्मा को नवंबर 1999 में गिरफ्तार किया गया था और उसने कथित रूप से सीबीआइ को बताया था कि उसने कारोबारी एससी बड़जात्या को फंसाने के लिए एके अग्रवाल के इशारे पर ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उसने यही बयान निचली अदालत में भी दिया था और सरकारी गवाह बनने के लिए भी तैयार हो गया था।

वर्मा ने माफी के लिए अर्जी दायर की थी और 2000 में सरकारी गवाह बन गया था। जांच ब्यूरो ने भी इसका विरोध नहीं किया था। निचली अदालत ने सितंबर 2001 में उसका अनुरोध स्वीकार कर लिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे निरस्त करते हुए सारा मसला नए सिरे से विचार के लिए निचली अदालत के पास भेज दिया था। जांच एजंसी ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

 

 

 

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