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बिहार में इंसेफ्लाईटिस सिंड्रोम से इस वर्ष 111 बच्चों की मौत PDF Print E-mail
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Thursday, 21 November 2013 17:01

पटना। बिहार में ‘एक्यूट इंसेफ्लाईटिस सिंड्रोम (एईएस)’ से इस वर्ष अक्तूबर महीने तक 111 बच्चों की मौत हो गई है।

 

बच्चों से जुडे रोगों की चर्चा के लिए बिहार स्वास्थ्य समिति और ग्लोबल हेल्थ स्टेंटेजीस नामक संस्था द्वारा आज यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा0 पी नागाभूषणा राव ने बताया कि राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम निदेशालय के आंकडे के मुताबिक बिहार में एईएस से इस वर्ष अक्तूबर महीने तक 111 बच्चों की मौत हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि बिहार में इस वर्ष एईएस के 279 और जापानी इंसेफ्लाईटिस (जेई) के दो मामले सामने आए जिसमें से एईएस से पीडित 111 बच्चों की मौत हो गई।

राव ने बताया कि देश में देश में अक्तूबर महीने तक एईएस और जेई से मरने वालों की कुल संख्या 1136 रही जिनमें से एईएस से 954 और जेई से 182 लोगों की मौत हुई।

इस अवसर पर बिहार स्वास्थ्य समिति के सचिव और कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने बताया कि एईएस रोग के कारणों का विशेषज्ञ अभी तक पता नहीं लगा सके हैं जिसके कारण इसपर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

उन्होंने बताया कि बिहार स्वास्थ्य समिति द्वारा इस वर्ष 25 नवंबर से एक अभियान चलाकर।-15 वर्ष के एक करोड 49 लाख 8 हजार 866 बच्चों को जेई का टीका लगाया जाएगा।

संजय ने बताया कि इसके अंतर्गत अरवल, भोजपुर, बक्सर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, नालंदा, नवादा, अररिया, बांका, भागलपुर और सीवान जिले


में बच्चों को जेई का टीका लगाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रदेश के गया, औरंगाबाद, पटना और जहानाबाद में 43 लाख 73 हजार 158 बच्चों को टीका लगाया गया।

संजय ने बताया कि जेई के खिलाफ चलाए गए इन टीकाकरण अभियान के फलस्वरूप बिहार में वर्ष 2011 में इसके 199 मामले प्रकाश में आए जो कि वर्ष 2012 में घटकर 40 रहे तथा इस वर्ष सात नवंबर तक ऐसे कुल 25 मामले ही प्रकाश में आए हैं।

बिहार स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने कहा कि जेई रोग के कारण 30 प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती है जबकि 30 प्रतिशत मरीजों में विकार उत्पन्न हो जाता है।

उन्होंने निमोनिया और डायरिया रोग को नियंत्रित करने के लिए काम किए जाने की आवश्यक्ता जताते बताया कि इससे भी बच्चों की भारी संख्या में मौत होती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस वर्ष जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक आसानी से रोके जाने वाले निमोनिया और डायरिया जैसे रोगों की वजह से भारत में हर साल चार लाख बच्चों की मौत हो जाती है।

कार्यक्रम को चाईल्ड हेल्थ फाउंडेशन के उपाध्यक्ष व बाल रोग विशेषज्ञ डा0 पन्ना चौधरी, शिशु रोग विशेषज्ञ डा0 अवध अग्रवाल, हिंदुस्तान अखबार (दिल्ली) के संपादक प्रताप सोमवंशी ने भी संबोधित किया।

(भाषा)

 

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