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राहुल गांधी के ‘सुर, स्वर और सामग्री’ पर चुनाव आयोग नाखुश PDF Print E-mail
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Wednesday, 13 November 2013 19:41

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान राहुल गांधी के कुछ बयानों के ‘‘सुर, स्वर और सामग्री’’ पर आज नाखुशी जाहिर करते हुए उन्हें भविष्य में अधिक सतर्क रहने को कहा।

राहुल गांधी ने चार दिन पहले आयोग को सौंपे अपने आठ पृष्ठ के जवाब में चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन से इंकार किया था। चुनाव आयोग उनके स्पष्टीकरण से सहमत नहीं है और उसका कहना है कि वह उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं है।

आयोग ने कहा, ‘‘आयोग सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए आपके भाषणों में व्यक्त की गई भावना और अंतर्निहित इरादों को समझता है, लेकिन आपके भाषणों के विवादित अंशों के सुर, स्वर और सामग्री पर आयोग को आपत्ति है।’’

आयोग ने पांच पृष्ठ के अपने आदेश में कहा कि आयोग मानता है कि आपके भाषण का वह हिस्सा चुनावी आचार संहिता के पूरी तरह अनुरूप नहीं है। आचार संहिता के अनुसार ऐसे बयान या भाषण देने पर रोक है, जिससे विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच मतभेद पैदा होते हों। आचार संहिता के तहत असत्यापित आरोपों के आधार पर दूसरे राजनीतिक दलों की आलोचना पर भी रोक है।

आयोग ने कहा कि आयोग के नोटिस पर गांधी के जवाब में दिए गए स्पष्टीकरण से वह ‘‘संतुष्ट नहीं’’ है। आयोग ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों तथा आपके द्वारा अपने जवाब में दी गयी दलीलों को समग्रता में देखते हुए आयोग अपनी नाखुशी जताता है और आपको सलाह देता है कि चुनाव अभियान में अपनी सार्वजनिक टिप्पणियों के दौरान आप अधिक सजग रहें।

गांधी द्वारा चुरू और इंदौर में दिए गए भाषणों को लेकर आयोग ने उन्हें 31 अक्तूबर को नोटिस जारी किया था। राहुल गांधी ने अपने भाषणों में कहा था


कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ित युवकों के संपर्क में है। उन्होंने भाजपा पर नफरत की राजनीति में शामिल रहने का आरोप भी लगाया था।

राहुल गांधी ने अपने विवादित भाषणों का बचाव करते हुए ऐसे आरोपों से इंकार किया था।

भाजपा ने राहुल की टिप्पणियों के खिलाफ चुनाव आयोग से कई शिकायतें करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

आयोग ने कहा कि राहुल गांधी ने चुरू और इंदौर में दिए गए अपने भाषणों को उचित ठहराने का प्रयास करते हुए दलील दी कि उन्होंने सिर्फ भाजपा के कार्यक्रमों और नीतियों की आलोचना की थी जो विभिन्न न्यायिक जांच आयोगों द्वारा स्थापित तथ्यों और उस पार्टी की वेबसाइट पर प्रदर्शित पार्टी के दर्शन पर आधारित था।

गांधी ने दलील दी थी कि उनके भाषणों पर पूरा जोर एकता और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने पर था तथा इसका उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच नफरत या तनाव फैलाना नहीं था।

भाजपा ने उनके भाषणों के सुर और स्वर पर आपत्ति जताई थी और आरोप लगाया था कि इसका उद्देश्य विभिन्न संप्रदाय के लोगों के बीच तनाव भड़काना था।

गांधी ने अपने इंदौर भाषण में दावा किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां मुजफ्फरनगर के कुछ दंगा पीड़ितों को आतंकवाद की ओर ललचा रही हैं।

राहुल ने आरोप लगाया था, ‘‘भाजपा महसूस करती है कि जब तक उत्तर प्रदेश में हिन्दुओं और मुस्लिमों के आमने सामने होने की स्थिति नहीं होती, वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते। इसलिए वे आग लगाते हैं। ’’ उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस है जो आग बुझाती है।

(भाषा)

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