मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
टीवी कार्यक्रम को भाजपाई प्रचार बताते हुए पहुंच गए चुनाव आयोग PDF Print E-mail
User Rating: / 1
PoorBest 
Sunday, 10 November 2013 09:08

विवेक सक्सेना

नई दिल्ली। चुनावी मौसम है। आखिरी फैसला तो जनता करेगी पर भाजपा व कांग्रेस की कड़वी जंग में सिरदर्द चुनाव आयोग का बढ़ता जा रहा है। दोनों पार्टियों और उनके समर्थकों ने विचित्र बातों को आधार बनाते हुए चुनाव आयोग के पास शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी हैं।  इन दिनों एक समाचार चैनल एबीपी पर दिखाए जा रहे एक कार्यक्रम की भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने तारीफ क्या कर दी कि उस पर तुरंत पाबंदी लगाए जाने की मांग करते हुए चुनाव आयोग के पास शिकायत दर्ज करा दी गई है। आयोग फिलहाल इस शिकायत पर विचार कर रहा है।

कुछ समय पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा ने चुनाव आयोग में शिकायत की थी कि चुरू व इंदौर में अपने भाषणों से उन्होंने लोगों की भावनाएं भड़काने की कोशिश की थी। इस पर चुनाव आयोग ने उन्हे नोटिस जारी किया जिसका उन्होंने जवाब भेज दिया है।

अब लगभग इसी आधार पर आयोग में एक और शिकायत की गई है जो कि अपने आप में अनोखी ही कही जाएगी। शिकायतकर्ता की मांग है कि एबीपी चैनल पर दिखाए जाने वाले ‘प्रधानमंत्री’ सीरियल पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि उसके जरिए एक राजनीतिक दल के हितों पर प्रहार किया जा रहा है। शिकायत के मुताबिक यह आदर्श चुनावी आचार संहिता के खिलाफ है।

अखिल भारतीय धोबी समाज की ओर से दायर इस शिकायत में कहा गया है कि एबीपी चैनल पर दिखाए जाने वाले प्रधानमंत्री चैनल में कुछ संवेदनशील मुद्दों और तथ्यों को दिखाया जा रहा है। इससे समाज में विभिन्न वर्गों के बीच नफरत व तनाव पैदा हो सकता है। इस धारावाहिक में कुछ ऐसी बातें कही गई हैं जिनका कोई प्रमाणिक आधार ही नहीं है।

शिकायतकर्ता सुरेश कनौजिया की दलील है कि निराधार चीजों के आधार पर यह कार्यक्रम पुरानी घटनाओं को याद दिलाता है जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है। यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। अपनी दलील की पुष्टि में शिकायतकर्ता ने कहा कि भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लाग में इस धारावाहिक का जिक्र करते हुए इसकी काफी तारीफ की। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने खासतौर पर इसमें दिखाए गए शाहबानो व अयोध्या में राम मंदिर का ताला खोले जाने संबंधी चीजों


के जिक्र की तारीफ की थी। इस कार्यक्रम में बताया गया था कि किस तरह से सरकार ने पहले मुसलिम वोटरोंको और बाद में हिंदू मतदाताओं कोे रिझाने की कोशिश की थी।

शिकायत में चैनल के ब्लॉग की भी शिकायत की गई है जिसमें कहा गया है कि आपरेशन ब्लूस्टार का बदला लेने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 1984 में उनके दो सिख अंगरक्षकों ने उनकी हत्या कर दी थी। इसके बाद राजधानी दिल्ली में भड़के सिख विरोधी दंगों में करीब 3000 सिख मारे गए। ऐसा आरोप है कि कांग्रेस के नेताओं ने यह दंगे भड़काए। इसमें एक सिख रिपोर्टर जरनैल सिंह को यह कहते हुए दिखाया गया है कि कि दंगे पूर्वनियोजित थे।

आदर्श आचार संहिता का हवाला देते हुए सुरेश कनौजिया ने कहा है कि इसमें स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसी कोई बात नहीं करेगा जिससे विभिन्न समुदायों व जातियों के बीच आपसी घृणा या तनाव पैदा हो। राजनीतिक दलों की आलोचना भी उनकी नीतियों व कार्यक्रमों तक ही सीमित रहनी चाहिए। उनके विगत के कारनामों, निजी जिंदगी की चर्चा या आधारहीन आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह धारावाहिक एक खास राजनीतिक दल के हितों के खिलाफ है। शिकायतकर्ता ने इस पर तुरंत रोक लगाए जाने की मांग की है। चुनाव आयोग ने इस शिकायत के मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि इसकी जांच करने के बाद ही वे कोई कदम उठाएंगे।

वैसे यह बताने की जरूरत नहीं है कि इस शिकायत से किसको फायदा होगा। इससे पहले इसी शिकायतकर्ता सुरेश कनौजिया ने 10 फरवरी, 2004 को अनइंप्लायड यूथ यूनिटी मूवमेंट के महासचिव की हैसियत से राजग सरकार के इंडिया शाइनिंग कार्यक्रम पर होने वाले खर्च व उस पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका के आधार पर ही हाई कोर्ट ने तब सरकारी खर्च पर की जाने वाली राजग के प्रचार वाली विज्ञापनबाजी पर रोक लगा दी थी जिससे सरकार की खासी फजीहत हुई थी।

आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?