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प्रधानमंत्री के चोगम में शामिल होने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया:एमईए PDF Print E-mail
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Saturday, 09 November 2013 16:37

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के श्रीलंका में राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक (चोगम) में भाग नहीं लेने के संकेत के बीच विदेश मंत्रालय ने आज कहा कि इस दौरे को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कहा कि सरकार को श्रीलंका से अभी इस बारे में बात करनी है कि 15-16 नवंबर को चोगम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन करेगा। यह पूछे जाने पर कि सिंह के सम्मेलन में भाग नहीं लेने पर क्या उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी वहां जाएंगे, प्रवक्ता ने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने का निर्णय लेने की प्रक्रिया उसी समय शुरू हो जाती है जब हमें निमंत्रण मिलता है और इसके बाद प्रक्रियाओं की श्रृंखलाएं होती हैं। एक खुले और बहुलतावादी लोकतंत्र के तौर पर हम उस प्रक्रिया में रहे हैं।’’

अकबरूद्दीन ने कहा कि इस संबंध में निर्णय के बारे में श्रीलंका को अभी बताया नहीं गया है।

अकबरूद्दीन ने कहा, ‘‘राजनयिक के तौर पर हमारे लिए प्रक्रिया तब समाप्त होती है जब हम किसी अंतरराष्ट्रीय समारोह की मेजबान सरकार को हमारे प्रतिनिधिमंडल की संरचना के बारे में पुष्टि कर देते हैं। हमने अभी तक ऐसा नहीं किया है.... हमने मेजबान को अभी तक निर्णय लेने की हमारी आंतरिक प्रक्रिया के परिणाम के बारे में नहीं बताया है।’’

पार्टी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री के आवास पर कल कांग्रेस कोर समूह की बैठक में यह राय सामने आई थी कि इस समय सिंह का श्रीलंका जाना ‘कठिन’ होगा।

सूत्रों ने बताया कि बैठक में इस बात का संज्ञान लिया गया था कि तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दल प्रधानमंत्री की प्रस्तावित श्रीलंका यात्रा के खिलाफ हैं और वहां की विधानसभा में राष्ट्रमंडल सम्मेलन में भारत के भाग लेने के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है।

यह पूछने पर कि यदि सिंह चोगम में भाग नहीं लेने का निर्णय लेते हैं तो क्या उपराष्ट्रपति के वहां भारत का प्रतिनिधित्व करने की संभावना है, अकबरूद्दीन ने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

उन्होंने हालांकि कहा कि 1993 से शिखर सम्मेलन स्तर की 10 बैठकों में से पांच में प्रधानमंत्री ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है जबकि चार मौकों पर मंत्रियों ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया है। उपराष्ट्रपति के भारत का प्रतिनिधित्व करने का कोई उदाहरण नहीं मिलता।

अकबरूद्दीन ने कहा, ‘‘आप इस बात से यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि चोगम में भागीदारी के संबंध में हमने जिस दृष्टिकोण का पालन किया है वह विभिन्न लोगों


के विभिन्न कार्य करने के योग्य होने की सोच के सदृश है। हमने इस बात पर ध्यान दिया है कि हमारे राष्ट्रीय हित के लिए क्या जरूरी है, हमारी विदेश नीति की प्राथमिकताएं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं क्या हैं। इन बातों को ध्यान में रखकर ही हमारे प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व अलग अलग लोगों द्वारा किया जाता है।’’

एमईए के प्रवक्ता ने कहा कि श्रीलंका को पहले ही यह बता दिया गया है कि मंत्रिस्तरीय बैठक का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद करेंगे। विदेश सचिव सुजाता सिंह और वरिष्ठ अधिकारी पवन कपूर एवं नवतेज सरना उनके साथ होंगे।

यह पूछने पर कि यदि सिंह सम्मेलन में भाग लेने का निर्णय लेते हैं तो क्या वह जाफना जाएंगे, उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाए कहा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन करता है।

हालांकि उन्होंने कहा कि भारतीय नेताओं के कोलंबो जाते समय जाफना जाने के कई उदाहरण है।

अकबरूद्दीन ने जनवरी 2012 में श्रीलंका का दौरा करने वाले तत्कालीन विदेश मंत्री एस एम कृष्णा के जाफना जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खुर्शीद जब हाल में कोलंबो गए थे तो वह भी जाफना गए थे।

तमिलनाडु के राजनीतिक दलों एवं अन्य संगठनों ने चोगम बैठक में किसी भी स्तर पर भारत की भागीदारी का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि श्रीलंका सरकार ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किया है और उसकी जातीय तमिलों को अधिकार सौंपने की कोई योजना नहीं है ।

हालांकि सलमान खुर्शीद की अगुवाई वाला विदेश मंत्रालय 15 नवंबर को होने वाले चोगम सम्मेलन में सिंह की उपस्थिति का पक्ष ले रहा है। मंत्रालय का कहना है कि यह अहम है क्योंकि इससे भारत के हित परिलक्षित होंगे। मंत्रालय महसूस करता है कि यह देश के रणनीतिक एवं सुरक्षा हितों के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

विदेश मंत्रालय के अधिकारी यह भी चाहते हैं कि प्रधानमंत्री इस अवसर का उपयोग उत्तरी प्रांत जाने के लिए भी करें जहां भारत ने ढेर सारी सहायता पहुंचाई है।

उत्तरी प्रांत के मुख्यमंत्री सी वी विगनेश्वरन पहले ही सिंह को पत्र लिखकर उन्हें जाफना आने का न्यौता दे चुके हैं और भारतीय सहायता के प्रति आभार प्रकट कर चुके हैं।

 

(भाषा)

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