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टिकट बंटवारे में राहुल गांधी के निर्देशों की अनदेखी PDF Print E-mail
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Tuesday, 15 October 2013 10:03

प्रदीप श्रीवास्तव
नई दिल्ली। राजस्थान कांग्रेस में विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों  का आरोप है कि इस बारे में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जो मापदंड बनाए थे उनका अनुपालन टिकट बंटवारे की प्रक्रिया में पूरी तरह नहीं हो रहा है।

टिकट बंटवारे की प्रक्रिया के अंतिम दौर में जिन दावेदारों के नाम पहुंचे हैं उनमें कुछ के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमें चल रहे हैं और कुछ हिस्ट्रीशीटर हैं। कुछ कांग्रेस के बाहर के हैं तो कुछ पिछले चुनावों में दो बार या उससे ज्यादा दफा चुनाव हार गए हैं।
राजस्थान में पार्टी टिकटों पर फैसला करने के लिए राज्य से भेजे गए पैनल पर विचार करने और उम्मीदवार के नाम का चयन करने के लिए स्क्रीनिंग समिति की बैठक हरियाणा भवन में चल रही है। सोमवार और मंगलवार की इस बैठक में उम्मीदवारों के नाम पर फैसला ले कर इन्हें अंतिम फैसले के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया जाएगा।
पार्टी में उपाध्यक्ष का पद संभालने के बाद राहुल गांधी ने टिकटों के बंटवारे की प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने की कोशिश में कई कदम उठाए। ब्लाक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कई चैनल बनाए गए जिनसे होते हुए योग्य दावेदारों का पैनल केंद्र तक पहुंचना तय हुआ। इस पूरी प्रक्रिया में कोई खामी न रह जाए इसके लिए अलग से राहुल गांधी ने सर्वे कराए। सर्वें निजी एजंसिंयों से कराए गए।
पार्टी के पर्यवेक्षकों को भी अलग से भेजा गया और उनसे जिला स्तर पर पूछताछ कर टिकट के दावेदारों की रपट तैयार की गई। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने विधानसभा चुनावों में मोटे तौर पर पार्टी का उम्मीदवार तय करने के लिए जो चार मापदंड बनाए थे उनके मुताबिक उम्मीदवार की आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं होनी चाहिए और उस पर आपराधिक मुकदमा नहीं चल रहा हो। दूसरे, चुनाव के वक्त कांग्रेस टिकट का दावेदार किसी दूसरी पार्टी से आकर न बना हो। तीसरे, पिछला चुनाव 20,000 से ज्यादा वोट से न हारा हो। चौथा दो चुनाव लगातार न हारा हो।
पिछले दिनों उदयपुर की रैली में राहुल गांधी ने इस बारे में सार्वजनिक मंच से तो बोला ही था, इसके दूसरे दिन जयपुर में पार्टी की एक बैठक में भी इस बारे में निर्देश दिए थे। कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड़ और हरियाणा भवन पर इकट्ठे टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों में कइयों ने यह आशंका जताई कि राज्य से प्रदेश चुनाव समिति ने जो पैनल केंद्रीय पार्टी को भेजा है उसमें इन मापदंडों का पालन नहीं किया गया है। मसलन झुंझनू जिले से आए पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिले की दो विधानसभा सीटों उदयपुरवाटी और नवलगढ़ के लिए जो पैनल भेजा गया है उनमें उन टिकटार्थियों के नाम हैं जो हिस्ट्रीशीटर हैं और पार्टी में बाहर से आए हैं। यह दोनों मामले निश्चित तौर पर ऐसे हैं जिनमें कांग्रेस की कथनी और करनी में फर्क है या नहीं यह देखने को मिलेगा।
झुंझनू जिले की सात सीटों में से पांच सीटों पर 2008 के चुनाव में कांग्रेस जीती थी। इसलिए यहां टिकट बंटवारे के मामले में उतनी दुविधा नहीं है।


पर जिले की बाकी उदयपुरवाटी और नवलगढ़ दोनों ही सीटें ऐसी हैं जहां से कांग्रेस उम्मीदवार छह से सात हजार वोटों से बसपा उम्मीदवारों से हारे थे। उदयपुरवाटी से जीते बसपा के राजेंद्र सिंह गुढ़ा और नवलगढ़ से जीते बसपा के डॉ राजकुमार राज्य के उन बसपा विधायकों में हैं जिन्होंने गहलोत सरकार को अपना समर्थन दे कर बचाया था और जिसकी एवज में अन्य बसपा विधायकों के साथ उनको मुख्यमंत्री गहलोत ने राज्य में मंत्री बनाया। इन दोनों पर गंभीर आरोप लगे हैं। हिस्ट्रीशीट खोलने संबंधी गहलोत सरकार के आदेश पर जिन नेताओं के नाम सामने आए उनमें राजेंद्र सिंह गुढ़ा का नाम भी है। न केवल उनको बल्कि उनके कई भाइयों को भी हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया जिनमें एक भाई पूर्व विधायक भी है। पुलिस वेबसाइट में इसका ब्योरा है। गुढ़ा और उनके भाइयों पर जानलेवा हमले का मुकदमा भी चला जिसमें गुढ़ा और उनके एक पूर्व विधायक भाई को निचली अदालत ने दो साल पहले संदेह का लाभ दे कर बरी किया, पर इनके अलावा दो अन्य भाइयों को सजा सुनाई गई है। प्रदेश में राज्यमंत्री बनने के बाद उन पर वन विभाग की जमीन का अतिक्रमण करने का आरोप भी लगा।
प्रदेश की तरफ से केंद्रीय पार्टी को भेजे गए पैनल में किसका नाम है इसे पार्टी ने अभी सार्वजनिक नहीं किया है। पर टिकटार्थी और उनके समर्थक अपने-अपने स्रोतों के हवाले से इन नामों को ले कर दावा कर रहे हैं। बहरहाल, उदयपुरवाटी और नवलगढ़ से आए कांग्रेसियों का कहना है कि प्रदेश की तरफ से भेजे गए पैनल में बसपा से पिछले साल जीते दोनों विधायकों के नाम दावेदारों में हैं। वे उन पर लगे आरोपों को लेकर राजस्थान के अखबारों में छपी खबरों की प्रतियां भी बांट रहे हैं। इन दोनों के मामले में उन्होंने राहुल गांधी के फैसले को ही प्रतिष्ठा का विषय बना दिया है। गुढ़ा और डॉ राजकुमार पिछली बार दूसरी पार्टी से चुनाव लड़े थे। राहुल के दूसरे मापदंड यानि आपराधिक छवि का सवाल भी उनके खिलाफ खड़ा है।
कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने तो यहां तक कहा कि यदि टिकटों के चयन में पार्टी ने साफ सुथरी छवि के मापदंड को ध्यान में नहीं रखा तो विरोधी पार्टियों को राहुल गांधी का लोकसभा चुनाव के पहले मजाक उड़ाने का हथियार मिल जाएगा। पिछले दिनों राहुल गांधी ने इसी मुद्दे पर सरकार के लाए जा रहे अध्यादेश को जिस तरह बकवास कह दरकिनार किया उसने राजनीतिक गलियारे में तूफान खड़ा कर दिया था। कांग्रेस को इससे राजनीतिक लाभ मिला। सभाओं में राहुल गांधी खुद इस मुद्दे का जिक्र कर रहे हैं और कह रहे हैं कि सच हमेशा सच होता है। ऐसे में अगर आपराधिक मामलों से घिरे लोगों को टिकट दिया गया तो पार्टी की काफी भद पिटेगी। इस मामले में एक कांग्रेसी कार्यकर्ता का यह भी कहना है कि जिस तरह राजस्थान में एक-एक कर पांच मंत्रियों पर बलात्कार और अन्य मामलों में आरोप लगे हैं उसमें यदि सावधानी नहीं बरती गई तो चुनाव में सफाई देनी मुश्किल हो जाएगी।

 

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