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कोलकाता के रेडलाइट इलाके में पहली बार दुर्गापूजा PDF Print E-mail
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Friday, 11 October 2013 13:44

कोलकाता। दुर्गापूजा पंडालों से बहिष्कृत सोनागाछी के यौनकर्मियों ने समाज के पूर्वाग्रहों के बंधनों को तोड़ते हुए पहली बार अपनी अलग पूजा का आयोजन किया है।
यौनकर्मियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली दरबार महिला समन्वय समिति की भारती डे ने बताया, ‘‘यह बंगालियों का सबसे बड़ा त्यौहार है और जब बाकी पूरा शहर इसका जश्न मना रहा है तो फिर हम क्यों पीछे रहें ? इसलिए हमने इस बार अपना अलग पूजा पंडाल बनाने की सोची।’’
लेकिन इन यौनकर्मियों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा जब कोलकाता पुलिस ने फुटपाथ के एक हिस्से का अतिक्रमण करने वाले उनके पंडाल को अनुमति नहीं दी।
यौनकर्मियों ने इसे कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी और पूजा का आयोजन करने की अनुमति ले ली।
डे ने कहा, ‘‘हमारा बजट 2 लाख रूपए का था।’’
इस पूजा के लिए सोनागाछी के 7 हजार यौनकर्मियों ने प्रति व्यक्ति 20 रूपए का योगदान दिया जबकि कुछ स्वयंसेवियों ने भी इसमें योगदान दिया। सोनागाछी उत्तर कोलकाता में एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट इलाका है।
कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘हम सभी धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं। हमारे कर्मचारियों में से एक ब्राह्मण पूजा करने के लिए तैयार हो गया है। हमने दो ढाकियों (ड्रम वादकों) को भी नियुक्त किया है।’’
आज से शुरू होने वाले चार दिवसीय समारोह के लिए दुर्गा की छह फीट ऊंची मूर्ति भी रखी गई है।सोनागाछी में त्यौहार का माहौल बनने पर कालीघाट, टीटागढ़ और दोमजर के अन्य रेडलाइट इलाकों के यौनकर्मी भी देवी के दर्शनों के लिए


पंडाल में एकत्रित हो रहे हैं।
डीएमएसएस के समाराजीत जाना ने कहा, ‘‘यह उन सभी के लिए एक बड़ा नैतिक प्रोत्साहन है, जिन्हें कभी भी पूजा पंडालों में आने नहीं दिया जाता था। पूजा में भाग लेने के लिए वे दूसरे जिलों से भी यहां आ रहे हैं।’’
पूजा के दूसरे दिन अष्टमी पर सोनागाछी के निवासी दुर्गा को ‘अंजलि’ देंगे। ऐसा करने का अधिकार पहले कभी भी यौनकर्मियों को नहीं था।
इलाके में सभी यौनकर्मियों के बीच ‘प्रसाद’ भी बांटा जाएगा।
डीएमएसएस की सांस्कृतिक इकाई ‘कोमलगंधा’ यौनकर्मियों के बच्चों में मौजूद नृत्य, नाटक और संगीत के हुनर को दर्शाने के लिए उनकी सांस्कृति प्रस्तुतियों का आयोजन करा रही है।
यौनकर्मियों का कहना है कि पूजा ने उनके ग्राहकों को भी हैरान कर दिया है।
26 वर्षीय एक यौनकर्मी ने कहा, ‘‘पूजा के मौसम में छुट्टियां होने की वजह से वेश्यालय में भीड़ इन दिनों बढ़ गई है। हमारे नियमित ग्राहकों में से एक ग्राहक ने पंडाल भी देखा और वह यहां चल रहे कार्यक्रम को देखकर बहुत हैरान था।’’
जाना ने कहा कि हालांकि यौनकर्मियों को इस तरह के आयोजन करने के लिए अभी भी सोनागाछी के आसपास के स्थानीय लोगों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।
अगले साल से कोलकाता और राज्य में अन्य जगहों पर बने रेड लाइट इलाकों के यौनकर्मी भी अपने समुदाय के अलग पूजा-पंडालों की योजना बना रहे हैं।
(भाषा)

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