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आसान आगमन PDF Print E-mail
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Wednesday, 09 October 2013 10:11

जनसत्ता 9 अक्तूबर, 2013 : पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से भारत ने चालीस देशों के आगंतुकों के लिए वीजा की शर्तें आसान कर दी हैं।

अब अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ्रांस, रूस, चीन, ब्राजील आदि देशों के वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनयाफ्ता और गोष्ठियों आदि में हिस्सा लेने के लिए आने वाले लोगों को पहले से वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी। वे यहां पहुंच कर भी वीजा हासिल कर सकते हैं। इसी तरह घर बैठे आॅनलाइन वीजा-आवेदन भेजने की भी सहूलियत होगी। गृह मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय इस योजना को सुचारु रूप से लागू करने के लिए तकनीकी और दूसरी तैयारियों में जुटे हैं। इस उदार वीजा-नीति से जहां विदेशों से आने वालों को सहूलियत होगी, वहीं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार सृजित करने में भी मदद मिलेगी है। नई नीति की घोषणा ऐसे समय हुई है जब पिछले कुछ महीनों से डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत लगातार गिरती गई है। ज्यादा तादाद में विदेशी पर्यटक आएंगे तो डॉलर की आवक भी बढ़ेगी। व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के मकसद से वीजा-शर्तों को लचीला बनाने की वकालत लंबे समय से की जाती रही है। लिहाजा, देर से ही सही, सरकार ने एक अपेक्षित कदम उठाया है।
वीजा के लिए संबंधित देशों के दूतावासों की खिड़कियों पर कतार में खड़े रहना, कई दिन चक्कर काटना बहुत-से लोगों के लिए संभव नहीं हो पाता। खासकर साठ साल से ऊपर की उम्र के या फिर ऐसे लोगों के लिए जिन्हें आकस्मिक बैठक आदि में हिस्सा लेने के लिए जाना हो। ऐसे लोगों के लिए अब भारत आना आसान हो जाएगा। मगर इतने भर से पर्यटन को बढ़ावा देने का मकसद पूरा नहीं हो जाता। पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के रास्तों, रहने-ठहरने की समुचित


व्यवस्था, सैलानियों की सुरक्षा आदि से जुड़े अनेक पहलुओं पर बेहतरी की जरूरत है। अनेक ऐतिहासिक स्थलों की देखरेख न हो पाने की वजह से विदेशी सैलानियों को निराशा ही हाथ लगती है। कई ऐसे स्थल हैं जहां सैलानियों को आकर्षित करने की भरपूर संभावनाएं हैं, पर वे पर्यटन के नक्शे से गायब हैं। कुछ स्थलों को ही खासतौर से रेखांकित किया जाता है। अधिक से अधिक विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने और पर्यटन का दायरा विस्तृत करने के लिए जरूरी है कि एक मुकम्मल पर्यटक मानचित्र तैयार किया जाए। इसके अलावा, सुरक्षा एक बड़ा मसला है। विदेशी सैलानियों के साथ बदसलूकी की खबरें आती रहती हैं। इससे पर्यटकों के मन पर बुरा असर पड़ता है। पर्यटन विभाग के विज्ञापन अतिथि देवो भव की सूक्ति का जाप करते रहते हैं। पर इस संदेश को सार्थक बनाने के गंभीर प्रयास नहीं किए जाते। तीर्थ स्थानों से लेकर ऐतिहासिक स्मारकों तक गंदगी और अतिक्रमण का बोलबाला तो रहता ही है, सैलानी अपनी सुरक्षा को लेकर भी आशंकित रहते हैं। प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक बहुलता वाले देश के नाते भारत के पास पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बहुत कुछ है। पर सैलानियों के साथ बदसलूकी के वाकए इस आकर्षण को कम कर देते हैं। ऐसे में वीजा शर्तों को आसान करने के साथ-साथ पर्यटकों की सुरक्षा और दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

 

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