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आंध्र में राष्ट्रपति राज के आसार नहीं: गृह मंत्री PDF Print E-mail
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Wednesday, 09 October 2013 08:50

जनसत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली / हैदराबाद । गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने अलग तेलंगाना राज्य के गठन के निर्णय के खिलाफ सीमांध्र में हो रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शन पर चिंता जताते हुए आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की संभावना को मंगलवार को खारिज कर दिया।

इस बीच अशांत सीमांध्र में अब भी बिजली संकट है और राज्य सरकार हड़तालियों से बातचीत में लगी है। प्रशासन ने सुधरे हालात देख विजयनगरम में सुबह कर्फ्यू में ढील दी। 
शिंदे ने संवाददाताओं से कहा कि आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की किसी योजना पर विचार नहीं किया जा रहा है। कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। गृह मंत्री से पूछा गया था कि क्या केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार कर रही है जहां राज्य के बंटवारे के निर्णय के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहा है।  शिंदे ने कहा कि सीमांध्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार पूरी तरह से इस संवेदनशील मुद्दे पर क्षेत्र के लोगों की भावनाओं का सम्मान करती है।
शिंदे ने कहा कि मैं सीमांध्र के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत सरकार पूरी तरह से उनकी सभी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है, खास तौर पर तेलंगाना क्षेत्र में रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा से जुड़ी चिंताओं को। गृह मंत्री ने कहा कि सीमांध्र के लोगों की चिंताओं विशेष तौर पर हैदराबाद के युवाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसरों, नदी जल के बंटवारे और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के समूह इन सभी विषयों और दूसरे मुद्दों पर व्यापक रूप से ध्यान देंगे और सभी पक्षों से व्यापक विचार विमर्श करेंगे।
सीमांध्र क्षेत्र में वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकार सामान्य स्थिति बहाल करने       
का प्रयास कर रही है, खास तौर पर बिजली की स्थिति। शिंदे ने संकेत दिया कि सीमांध्र क्षेत्र में बिजली बहाल करने के लिए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी पक्षों से बात कर रही है ताकि सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस्मा के बारे में सभी पक्षों से बातचीत कर रही है। हालांकि उन्होंने हड़ताल के कारण ग्रिड विफल होने की आशंका को खारिज किया। शिंदे ने वाइएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी और तेदेपा अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू की अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए आलोचना की। उन्होंने कहा, मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि वे अब


अनशन पर क्यों हैं। दोनों ही नेताओं ने तेलंगाना के गठन के लिए लिखित सहमति दी थी। मुझे समझ नहीं आता कि अब वे उपवास पर क्यों हैं ?
इस बीच हैदराबाद में एक अधिकारी ने बताया कि अधिकांशतया सीमांध्र क्षेत्र के बिजली संयंत्रों में बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ। इनमें ताप और पन दोनों ही बिजली संयंत्र हैं। कर्मचारियों से हड़ताल खत्म करने की अपील करते हुए राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बी सत्यनारायण ने कहा कि वे केंद्र को पत्र लिखकर कहेंगे कि इस मुद्दे का समाधान खोजने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
संयुक्त कार्यसमिति के अध्यक्ष साईबाबू ने मुख्यमंत्री के शिविर कार्यालय से बाहर निकलकर हैदराबाद में संवाददाताओं से कहा कि विभिन्न मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। हम बातचीत के लिए फिर आएंगे। आंध्र प्रदेश बिजली उत्पादन निगम, आंध्र प्रदेश बिजली पारेषण निगम, आंध्र प्रदेश दक्षिणी बिजली वितरण कंपनी और आंध्र प्रदेश पूर्वी बिजली वितरण कंपनी के 30 हजार से अधिक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश को विभाजित करने का फैसला तत्काल वापस ले।
हड़ताल के कारण तटीय आंध्र और रायलसीमा जिलों में बिजली गुल हो गई और हैदराबाद शहर की बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा।  हड़ताल से दक्षिणी बिजली ग्रिड पर असर पडने की आशंका है और इससे सभी दक्षिणी राज्यों में अंधेरा छा सकता है । आंध्र प्रदेश सरकार ने बिजली कर्मचारी संयुक्त कार्रवाई समिति के नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। कर्मचारियों के मुद्दे पर कैबिनेट की उपसमिति ने संयुक्त कार्यसमिति से बातचीत की है। उपसमिति में आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री अनम रामनारायण शामिल हैं। मुख्य सचिव पीके मोहंती और आंध्र प्रदेश ऊर्जा विभाग के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। संयुक्त कार्यसमिति ठोस आश्वासन चाहती है कि आंध्र प्रदेश को एकजुट रखा जाएगा। लेकिन राज्य सरकार ने बेबसी जताई है।
इस बीच विजयनगरम में कर्फ्यू में मंगलवार को सुबह चार घंटे के लिए ढील दी गई। हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल होते देख ऐसा किया गया। कर्फ्यू में ढील की अवधि के दौरान कड़ी निगरानी रखी गई।
विजयनगरम के पुलिस उप महानिरीक्षक पी उमापति ने बताया कि सुबह 7-8 बजे से कर्फ्यू में ढील दी गई ताकि लोग दूध और पेट्रोल जैसी जरूरी वस्तुएं खरीद सकें। उन्होंने कहा कि स्थिति शांतिपूर्ण है और अब नियंत्रण में है क्योंकि हिंसा की की नई घटना नहीं हुई है।
(भाषा)

 

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