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मायावती के खिलाफ भी सीबीआइ जांच बंद PDF Print E-mail
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Tuesday, 08 October 2013 17:15

जनसत्ता ब्यूरो,नई दिल्ली। सीबीआइ ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर कानूनी राय लेने के बाद बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ जांच बंद करने का फैसला किया है।


सीबीआइ सूत्रों मुताबिक शीर्ष अदालत ने बसपा नेता के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति के संबंध में एजंसी की प्राथमिकी पिछले साल निरस्त कर दी थी। लेकिन एक व्यक्ति के हस्तक्षेप अर्जी दायर किए जाने के बाद इस मामले में अनिश्चय की स्थिति पैदा हो गई थी। सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल आठ अगस्त को हस्तक्षेप की अनुमति के लिए दायर अर्जी खारिज कर दी थी जिससे मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले के बंद होने का रास्ता साफ हो गया था।
सूत्रों ने बताया कि हाल के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद एजंसी ने मुद्दे पर शीर्ष अदालत के आदेशों पर कानूनी राय मांगी थी। उन्होंने कहा कि कानून विशेषज्ञों का मत था कि एजंसी को मामले की जांच बंद कर देनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना था कि अगर कोई जांच चाहता है तो वह उचित आदेश हासिल करने के लिए उचित अदालत जा सकता है जिसका सीबीआइ अनुपालन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आठ अगस्त को उत्तर प्रदेश के निवासी कमलेश वर्मा की याचिका खारिज कर दी थी जो आय से अधिक संपत्ति का मामला खत्म करने के


लिए मायावती की ओर से दायर किए गए मामले में हस्तक्षेप करने वाले व्यक्ति थे। पिछली एक मई को अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए पीठ ने कहा था कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्राथमिकी निरस्त कर दी गई क्योंकि सीबीआइ उसके आदेशों को ठीक तरह से समझे बिना मायावती के खिलाफ आगे बढ़ी जो ताज कॉरिडोर मामले तक सीमित था।
हालांकि, पीठ ने कहा था कि फैसले से आय से अधिक संपत्ति के दूसरे मामले में मायावती के खिलाफ कार्यवाही करने की सीबीआइ की शक्ति नहीं छिनी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल छह जुलाई को बसपा नेता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के नौ साल पुराने मामले को खारिज कर दिया था और न्यायालय के निर्देश के बिना मायावती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के लिए सीबीआइ की खिंचाई की थी। न्यायालय ने कहा था कि मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला निराधार था और एजंसी उसके उन आदेशों को उचित रूप से समझे बिना बसपा नेता के खिलाफ आगे बढ़ी जो कथित तौर पर स्वीकृति के बिना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 17 करोड़ रुपए जारी किए जाने से संबंधित ताज कॉरिडोर मामले तक सीमित था।

 

 

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