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इस अंजाम से कुछ तो खौफ खाएंगे भ्रष्ट नेता PDF Print E-mail
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Friday, 04 October 2013 09:16

अनिल बंसल
नई दिल्ली। न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर ने एक बार टिप्पणी की थी कि ताकतवर लोग जेलों में नहीं रहते। भारत की जेलों में सिर्फ गरीब लोग ही रहते हैं। अय्यर की गिनती सुप्रीम कोर्ट के गरीबनवाज जजों में होती है। वे पिछले दो सालों में आए अदालती फैसलों का अंजाम देख कर अपनी राय अब बदल चुके होंगे। आखिर जेलों में अब गरीबों के साथ लालू यादव, जगन्नाथ मिश्र, रशीद मसूद, ओम प्रकाश चौटाला, बंगारू लक्ष्मण, सुखराम, कनिमोई और सुरेश कलमाड़ी जैसे ताकतवर लोगों को भी रहना पड़ रहा है। भ्रष्टाचारी नेताओं की भलाई अब सचेत होने में ही है।
दो दशक पहले तक किसने कल्पना की थी कि भ्रष्टाचार करने वाले मंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री अपने किए की सजा भी पा सकते हैं। अलबत्ता हमारे संसदीय लोकतंत्र को अराजकता और भ्रष्टाचार का पोषण करने वाले लोकतंत्र के तौर पर कोसा ही जाता रहा। लेकिन अदालती फैसलों ने लोकतंत्र के सुनहरे भविष्य की आस को पुख्ता कर दिया है। लालू यादव और जगन्नाथ मिश्र अपने-अपने दौर में बिहार के भाग्यविधाता बन बैठे थे। अब वे मनमानी और निरंकुश आचरण का दंड भुगत रहे हैं।
भ्रष्टाचार के मामले तो देश में और भी कई नेताओं पर चलते रहे हैं। पर कभी सियासी ताकत के बल पर तो कभी जांच एजंसियों को पंगु बनाकर वे सजा पाने से बचते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ फैसलों ने ईमानदार लोगों के हताश चेहरों पर रौनक ला दी है। लालू यादव को पांच साल और जगन्नाथ मिश्र को चार साल के कारावास का दंड मिलना अजूबा लगता है। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद को भी भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गुनाह के लिए चार साल कैद की सजा हो चुकी है।
सजायाफ्ता नेताओं की फेहरिस्त अब लंबी हो रही है। भाजपा के अध्यक्ष रहे बंगारू लक्ष्मण ने एक लाख रुपए की घूस लेकर अपना सत्यानाश ही कर लिया। बंगारू देश की सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वे केंद्र सरकार में मंत्री भी थे। इस गुनाह के लिए अदालत उन्हें भी चार साल कैद की सजा सुना चुकी है। हालांकि सजा पाने के सिलसिले की शुरुआत केंद्र सरकार में मंत्री रहे और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे सुखराम से हुई थी। वे तो भ्रष्टाचार के तीन मामलों में सजा पा चुके हैं। एक मामले में पांच साल की सजा हुई थी तो दूसरे में तीन साल कैद की, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बहाल रखा।
सुखराम की हस्ती भी मामूली नहीं थी। वे पांच बार विधानसभा के सदस्य रहे और तीन बार देश की संसद के। नरसिंह राव सरकार में उनकी तूती बोलती थी। भ्रष्टाचार के आरोपी बन


जाने के बाद भी उनकी सियासी हैसियत इस कदर थी कि भाजपा ने हिमाचल में उन्हें उपमुख्यमंत्री बना दिया था। उसी भाजपा ने जिसने संचार घोटाले को लेकर सुखराम के खिलाफ संसद के एक पूरे सत्र को बाधित किया था। इससे भी पहले भ्रष्टाचार के लिए सजा पाने वाली पहली मुख्यमंत्री जयललिता बनी थीं। तान्सी जमीन घोटाले में उन्हें अदालत ने 2000 में दोषी पाया था और तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। यह मामला उन्हें इतना भारी पड़ा था कि चुनाव लड़े बिना उनकी पार्टी ने तमिलनाडु के चुनाव में जीत के बाद उन्हीं को मुख्यमंत्री बनवा दिया था तो सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर इस कवायद को असंवैधानिक बता पहली बार किसी निर्वाचित सरकार की बर्खास्तगी का कड़ा फैसला सुनाया था।
भ्रष्टाचार के लिए हरियाणा की भूमि भी कम उर्वरा नहीं रही। लेकिन सजा अभी तक केवल ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को ही मिली है। प्राइमरी शिक्षक भर्ती घोटाले में बाप-बेटा दोनों दस बरस के लिए सलाखों के पीछे हैं। भ्रष्टाचार की तलवार अभी जिन और नेताओं पर लटकी है उनमें मायावती, मुलायम सिंह यादव, सुरेश कलमाड़ी, ए राजा, मधु कोड़ा व कनिमोई जैसे कद्दावर लोग भी हैं। पर कानून के विशेषज्ञ इन नेताओं को होने वाली जेल की सजा से ही संतुष्ट नहीं हैं। चौधरी चरण सिंह के करीबी रहे मेरठ के बुजुर्ग वकील नरेंद्र पाल सिंह की राय है कि ऐसे भ्रष्ट नेताओं की सारी संपत्ति को भी जब्त करना चाहिए , ताकि उनकी संतान उनकी लूट पर ऐश न कर पाए।
यों असरदार लोगों को अदालतों ने दूसरे अपराधों के लिए पहले भी जेल भेजा है। मसलन, झारखंड के आदिवासियों के सबसे प्रतिष्ठित नेता शिबू सोरेन को हत्या के मामले में न केवल जेल की हवा खानी पड़ी बल्कि कई बार केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पद भी गंवाने पड़े। फिल्म अभिनेता संजय दत्त अपने गुनाह के लिए जेल की हवा खा ही रहे हैं तो अपनी पत्नी की हत्या के आरोपी दिल्ली के कांग्रेसी नेता सुशील शर्मा को भी अदालत फांसी की सजा सुना चुकी है। शर्मा को तो गिरफ्तारी के बाद अदालत ने जमानत भी नहीं दी। डीपी यादव और विनोद शर्मा जैसे धनी नेताओं के बेटे भी अपने किए की सजा भुगत रहे हैं। नरसिंह राव जीवित होते तो सुखराम के साथ वे भी जेल काट रहे होते। चर्चित कोयला घोटाले, स्पेक्ट्रम घोटाले, राष्ट्रमंडल खेल घोटाले और एनआरएचएम घोटाले आदि के आरोपियों का अंजाम अभी बाकी है।

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