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सरधना में विधायक समर्थकों व पुलिस में हिंसक टकराव PDF Print E-mail
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Monday, 30 September 2013 09:15

प्रदीप वत्स व एजंसी
मेरठ/लखनऊ। जिले के खेड़ा खुर्द गांव में महापंचायत के दौरान लोगों और पुलिस के बीच हुए टकराव ने हिंसक रूप ले लिया। महापंचायत इलाके के चौबीस राजपूत बहुल गांवों के लोगों ने सरधना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संगीत सोम पर रासुका लगाने के विरोध में आयोजित की थी। प्रशासन ने महापंचायत पर दो दिन पहले ही पाबंदी लगाकर इलाके में धारा-144 लागू कर दी थी। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने शनिवार को उनके गांव जाकर पंचायत न करने की अपील की थी। लेकिन लोगों ने उनकी अपील अनसुनी कर दी। हिंसक झड़पों में 20 लोग जख्मी हुए हैं और नौ सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा है। लऊनऊ में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इसके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरधना विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ दिन से महापंचायत को लेकर भारी सरगर्मी थी। यहां राजपूतों के चौबीस गांव हैं। संगीत सोम भी राजपूत हैं और इसी इलाके के विधायक हैं। मुजफ्फनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में उन पर रासुका लगाए जाने से लोगों में नाराजगी है। खेड़ा खुर्द गांव को महापंचायत का केंद्र बनाकर लोगों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाने का निर्णय लिया था। इसके बाद मेरठ के जिलाधिकारी नवदीप रिणवा और एसएसपी दीपक कुमार ने शनिवार को गांवों में जाकर लोगों से महापंचायत टालने की अपील की। दोनों अधिकारियों ने लोगों की उरई जेल में बंद संगीत सोम से टेलीफोन पर लोगों की बात भी कराई थी। इसके लिए उन्हें खासी मशक्कत करनी पड़ी। नियमानुसार जेल में बंद किसी कैदी को मोबाइल फोन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है। लेकिन अपनी गरज में शासन ने नियम तोड़ा।
प्रशासन को आशंका थी कि महापंचायत से इलाके में सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा। समझाने-बुझाने के प्रयास नाकाम रहने पर पंचायत को प्रतिबंधित कर पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई। पंचायत का इंतजाम देख रहे लोगों ने शनिवार को डीएम को आश्वासन दिया था कि वे पंचायत को एक हफ्ते के लिए टाल रहे हैं। इससे अधिकारियों ने राहत की सांस ली और एहतियात के तौर पर इलाके में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात कर दिए। लेकिन रविवार सुबह हालात उस समय बिगड़ गए जब महापंचायत को एक हफ्ते के लिए टालने के बाद भी खेड़ा गांव में पगडंडियों के रास्ते भारी संख्या में औरतें, बच्चे और बुजुर्ग महापंचायत स्थल पर पहुंच गए। दस बजे तक वहां करीब बीस हजार लोग जमा हो चुके थे। लोगों ने इस दौरान भाजपा विधायक संगीत सोम पर लगी रासुका हटाने और उन्हें उरई जेल से मेरठ जेल स्थानांतरित करने


की मांग की।
महापंचायत स्थल से वापस लौट रहे लोगों का सामना पुलिस से हो गया। भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर फेंके। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे भी बात नहींं बनी तो पुलिस ने लाठियां भांजी और हवाई फायरिंग की। भीड़ ने पुलिस पर पत्थर फेंके और सरकारी वाहनों में तोड़-फोड़ की। कुछ वाहनों में आग लगा दी गई। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। हिंसा की इन घटनाओं से आसपास के गांवों में तनाव फैल गया। हालात पर काबू रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। सेना को भी सतर्क कर दिया गया है।
हिंसक घटनाओं में एक आदमी को गोली लगने की भी खबर है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। भीड़ ने मेरठ के मंडलायुक्त मंजीत सिंह और एसएसपी दीपक कुमार की कारों पर भी अपना गुस्सा निकाला। एक निजी टीवी चैनल की ओबी वैन को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने अभी तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया है।
लखनऊ में पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) राजकुमार विश्वकर्मा ने बताया, ‘पुलिस द्वारा हिंसक भीड़ को रोकने की कोशिश के वक्त हुई झड़प में 19 पुलिसकर्मियोंसहित 20 लोग जख्मी हो गए। इनमें आरएएफ के छह जवान शामिल हैं।’ विश्वकर्मा ने कहा कि गुस्सायी भीड़ को जब रोका गया तो उन्होंने पत्थरबाजी शुरू  कर दी और पुलिस-प्रशासन के नौ वाहनों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि झड़प के सिलसिले में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।’ विश्वकर्मा ने कहा,‘पंचायत के आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। पंचायत पर पाबंदी लगाने के बाद कल प्रशासन ने लोगों को चार सौ नोटिस जारी किए थे। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।’
वहीं गृह सचिव कमल सक्सेना ने कहा कि पुलिस ने उस वक्त बल प्रयोग किया जब जिलाधिकारी और डीआइजी को भीड़ ने घेर लिया था। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, रबर की गोलियां चलाईं और हवाई फायरिंग की। एक सवाल के जवाब में गृह सचिव ने कहा कि पंचायत को लेकर केंद्र की तरफ से कोई अलर्ट नहीं मिला था।
प्रमुख सचिव (गृह) आरएम श्रीवास्तव ने कहा कि महापंचायत के आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस फायरिंग में किसी की मौत की सूचना नहीं है।

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