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मुजफ्फरनगर ने बदल दिया चुनाव का सियासी एजंडा PDF Print E-mail
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Friday, 13 September 2013 09:08

(अंबरीश कुमार) जफ्फरनगर में हुए दंगे ने प्रदेश ही नहीं देश के भी सियासी एजंडे को बदल दिया है। भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर और आक्रामक हो रही है क्योंकि उसे जाट बिरादरी से अब उम्मीद नजर आ रही है। दूसरी तरफ लोकदल नेता अजित सिंह के लिए यही चिंता की वजह बन गया है। पर कांग्रेस इस बहाने मुसलिम समुदाय का समर्थन हासिल करने के फिराक में है। भाजपा ने जैसे ही नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया, कांग्रेस अपनी रणनीति बदल देगी। पार्टी इस मुजफ्फरनगर को भुनाएगी और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुसलिम जनाधार में सेंध लगाने का प्रयास करेगी।
हालांकि दंगों की राजनीति में कांग्रेस का खाता सबसे मजबूत माना जाता है, पर फिलहाल जो मौका कांग्रेस के हाथ लगा है, उसे वह ठीक से इस्तेमाल भी करेगी। राहुल गांधी और सोनिया गांधी मुजफ्फरनगर जाने की तैयारी में है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी की सरकार और संगठन दोनों पर इसका असर पड़ा है। आजम खां के बहाने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर मुजफ्फरनगर हावी रहा। आजम लगातार नाराज रहते हंै और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कुछ ज्यादा ही खफा हंै। पर इस बार उनकी नाराजगी मुजफ्फरनगर में हुई प्रशासनिक लापरवाही को लेकर है जो आपराधिक लापरवाही मानी जा रही है। हालांकि समाजवादी पार्टी के मुसलिम नेता और क्षत्रप आजम खां के खिलाफ हैं। पर मुलायम सिंह यादव किसी भी कीमत पर उन्हें दूर नहीं जाने देंगे, क्योंकि आजम खां ही मुजफ्फरनगर के कारण हो रहे राजनैतिक नुकसान की भरपाई भी कर सकते हंै। यह माद्दा किसी और मुसलिम नेता में नहीं है।
मुजफ्फरनगर के फसाद के बाद कई दलों की सियासीगतिविधियां तेज हो गई हैं। इसमें सबसे आगे भाजपा है। भाजपा के कुछ नेताओं ने भी यहां माहौल बिगाड़ने का काम किया था, जिससे दंगा भड़का और अब भाजपा दंगों


के बाद राजनीति की फसल काटने में जुट गई है। भाजपा के नेता लगातार मुजफ्फरनगर जाने का प्रयास कर रहे हैं और गिरफ्तारी भी दे रहे हैं।
दरअसल उनकी कोशिश पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजहबी गोलबंदी की है। भाजपा जाट बिरादरी को साथ लेने की कवायद में जुटी है जो कई लोकसभा सीटों पर पार्टी को ताकत दे सकते हैं। दूसरा बड़ा प्रयास कांग्रेस से होने वाला है जो मुसलिम वोटों का ध्रुवीकरण कराने के लिए इस समुदाय के नेताओं को आगे कर , समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल सकती है। कांग्रेस के कई नेता प्रदेश के मुसलिम नेताओं के संपर्क में हैं।
यही वजह है कि मुलायम सिंह यादव फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहते हैं। आगरा बैठक में सपा महासचिव रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल के आक्रामक तेवर के बावजूद मुलायम ने कहा कि ‘आजम खां मुझसे नाराज हो ही नहीं सकते है।’ वैसे भी आजम खां और मुलायम सिंह के रिश्ते कुछ अलग किस्म के हैं। नाराजगी के बाद वे साथ भी आ जाते हैं।
फिलहाल मुजफ्फरनगर को सियासी एजंडा बनता देख मुलायम ने भी कमान संभाल ली है। जल्द ही प्रदेश के मुसलिम संगठनों और नेताओं से मुलायम सिंह की मुलाकात होने वाली है जिसमें मुजफ्फरनगर दंगे से हुए राजनैतिक नुकसान की भरपाई की कोशिश की जाएगी। इस समय समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस भी चुनौती बन गई है, जो मोदी के नाम पर व्यापक स्तर पर मुसलिम बिरादरी का समर्थन लेने के प्रयास में है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, पर अगर मुसलिम वोटों में पार्टी ने सेंध लगा दी तो समाजवादी पार्टी को कुछ सीटों पर नुकसान भी पहुंच सकता है। फिलहाल मुलायम सिंह की चिंता भी यही है।

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