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गोरखालैंड: बंद में 15 से चार दिन की छूट दी गोरखा नेताओं ने PDF Print E-mail
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Tuesday, 13 August 2013 09:49

कोलकाता, जनसत्ता। गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग में बेमियादी बंद को वापस लेने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दी गई 72 घंटे की समय सीमा के बीच जीजेएम ने 15 अगस्त से बंद में चार दिन की छूट देने का एलान किया और कहा कि बंद जबर्दस्ती लागू नहीं किया जाएगा। हालांकि जीजेएम ने कहा कि मंगलवार से ‘जनता कर्फ्यू’ का आयोजन किया जाएगा। इस बीच गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के बेमियादी बंद के दसवें ने पुलिस ने जीजेएम के और 16 समर्थकों को गिरफ्तार किया। जीजेएम की ओर से सोमवार को दार्जिलिंग पहाड़ियों पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तणमूल कांग्रेस, माकपा, कांग्रेस और जीएनएलएफ की तरफ से कोई शामिल नहीं हुआ। 
मालूम हो कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को इस आंदोलन को अवैध बताते हुए 72 घंटे के भीतर बंद को समाप्त करने को था, लेकिन मुख्यमंत्री की बात का जीजेएम समर्थकों पर कोई असर नहीं पड़ा। अलबत्ता तेलंगाना की तर्ज पर गोरखालैंड की मांग के लिए जारी आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई। हालांकि बैठक में तणमूल कांग्रेस, माकपा, कांग्रेस और जीएनएलएफ की ओर से कोई नहीं पहुंचा, लेकिन भाजपा, आॅल इंडिया गोरखा लीग और हिल कांग्रेस, गोरखा निर्माण परिषद व सीपीआरएम के प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए। बैठक में जीजेएम के अध्यक्ष बिमल गुरूंग, महासचिव रोशन गिरि समेत कई नेता मौजूद थे।
जीजेएम महासचिव रोशन गिरि ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट का सम्मान करते हुए बंद लागू करने के लिए कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा-‘हमें लोगों की परेशानियों को भी देखना है।’
जीजेएम के वरिष्ठ नेता हरक बहादुर चेतरी ने पहले कहा था कि बंद में केवल स्वतंत्रता दिवस वाले दिन ही छूट दी जाएगी।
इस बीच गुरुंग ने फेसबुक पर टिप्पणी में कहा-‘सोमवार को सर्वदलीय बैठक में प्रस्ताव पास किया गया कि 16 से 18 अगस्त तक बंद में तीन दिन की छूट होनी चाहिए। जीजेएम ने इस पर कोर समिति की बैठक में चर्चा की और वह इस फैसले का समर्थन करता है।’ उन्होंने कहा कि 16 अगस्त को हम गोरखालैंड के लिए अपने भविष्य के आंदोलन के बारे में घोषणा करेंगे। यह हमारी आखिरी लड़ाई है और हमें आखिर तक लड़ना चाहिए। अगले दो दिन में हमें देश को गोरखालैंड के लिए अपना जनादेश साबित करना होगा।
इधर पुलिस सूत्रों ने बताया कि रविवार


रात से कुछ प्रमुख लोगों समेत जीजेएम के 16 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। इनमें जीटीए पार्षद कल्याण देवान और जीजेएम मजदूर संघ नेता सुमीर तिरुआ शामिल हैं। इस तरह से अब तक कुल 184 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इसमें से पांच लोगों पर आगजनी में लिप्त होने का आरोप है।
जिले के पुलिस अधीक्षक कुणाल अग्रवाल ने बताया कि सीआरपीएफ की पांच और कंपनियां असम से दार्जिलिंग आ रही है, जबकि यहां पहले से ही पांच कंपनियां तैनात है।
सूत्रों ने बताया कि जीजेएम ने अपनी मांग को लेकर राज्य सरकार के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया है। उसका कहना है कि इस मुद्दे पर वह केवल केंद्र सरकार से बात करेगा।
इस बीच विरोधी दल के नेता व माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सूर्यकांत मिश्र ने दार्जिलिंग मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के ऐसे भड़काऊ बयान से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के गोरखालैंड आंदोलन को ऊर्जा मिल रही है। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग में सामान्य स्थिति व कानून-व्यवस्था बहाल रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। मिश्र ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से सर्वदलीय बैठक बुला कर समस्या का हल निकालने की मांग की।
माकपा नेता मिश्र ने पत्रकारों से कहा- मुख्यमंत्री के ऐसे अल्टीमेटम व भड़काऊ बयान से इस आंदोलन को और हवा ही मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह बयान गोरखालैंड आंदोलन को तेज करने में आग में घी का काम करेगा। इससे दार्जिलिंग के हालात और खराब हो सकते हैं। उन्होंने कहा- हम चाहते हैं कि दार्जिलिंग समस्या के हल के लिए राज्य सरकार तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाए, ताकि आपसी सहमति से इसका हल निकले। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी शुरू से कहती आ रही है कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) समझौता में कई तरह की खामियां हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन राज्य सरकार हमारी बात पर कान ही नहीं दे रही है। इस मुद्दे पर मिश्र ने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि केंद्र अपनी जिम्मेवारियों से भाग नहीं सकता, क्योंकि जीटीए समझौता राज्य, केंद्र व जीजेएम के बीच हुआ था। उन्होंने कहा कि जितनी जल्द हो दार्जिलिंग समस्या का हल निकाला जाना चाहिए।

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