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राइटर्स बिल्डिंग से सचिवालय हटाने का विरोध PDF Print E-mail
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Sunday, 11 August 2013 09:34

कोलकाता। राज्य सचिवालय (राइटर्स) स्थानांतरण के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फैसले पर वाममोर्चा समर्थित कर्मचारी यूनियनों  विरोध जताया है। यूनियन के नेताओं कहना है कि इससे सरकारी खर्च बढ़ेगा और कर्मचारियों को यातायात में परेशानी होगी। खासकर उन कर्मचारियों को अधिक परेशानी होगी, जो निजी या सरकारी वाहन से यातायात नहीं करते हैं। इस वक्त  राज्य सचिवालय राइटर्स मध्य कोलकाता में ऐसे केंद्र बिंदु पर है, जहां से राज्य भर के साधन उपलब्ध हैं, जबकि स्थानांतरण के लिए प्रस्तावित हावड़ा में एचआरबीसी की बिल्डिंग के पास से गिन-चुने वाहन गुजरते हैं।
यूनिटी फोरम ने इस स्थानांतरण का कड़े शब्दों में विरोध किया है। यूनियन के नेता देव प्रसाद हलदर ने बताया कि यह विदेशियों की साजिश है। सरकार राइटर्स को विदेशियों के हाथों सौंपना चाहती है। यूनियन के एक अन्य नेता ने कहा कि राइटर्स की मरम्मत में जितना खर्च होगा, उससे अधिक खर्च स्थानांतरण करने में होगा और वह भी फिर छह महीने में राइटर्स लौटने की योजना है। इसे सरकारी पैसे की बर्बादी नहीं तो क्या कहेंगे। उन्होंने सवाल उछाला कि जब राइटर्स लाक्षा गृह बन गया है, तो सत्ता संभालने के बाद ममता बनर्जी ने क्यों बाहर के लोगों को कैंटीन किराए पर दिया। तृणमूल के शासनकाल में कैंटीन हाल को दो भाग में बांट दिया गया, जिससे गली और संकरी हो गई है। यूनियन के नेताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार कर्मचारियों का बकाया 28 फीसद मंहगाई भत्ता नहीं दे रही है और दूसरी तरफ तुगलकी फरमान जारी करके धन खर्च कर रही है।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सहयोगी कांग्रेस ने ममता के फैसले का समर्थन किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भट््टाचार्य ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से कहा कि यह सही फैसला है। राइटर्स बिल्डिंग बारूद के ढेर पर बैठी है। इस इमारत की मरम्मत के लिए सत्ता के केंद्र को अन्यत्र ले जाने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को फाइलों को शिफ्ट करने में सावधानी बरतनी चाहिए और इस बात का समुचित इंतजाम करना चाहिए कि तमाम कर्मचारी बिना किसी परेशानी के नई जगह पर पहुंच सकें।
माकपा ने इस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि विभिन्न मुद्दों से आम लोगों का ध्यान बंटाने के लिए ही यह फैसला किया गया है। इससे


अव्यवस्था फैलेगी।
पहले तृणमूल ने किया था विरोध: हावड़ा में जहां अस्थायी राईटर्स बिल्डिंग स्थानांतरित हो रहा है, जब इस भवन का निर्माण हो रहा था, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इसका जोरदार विरोध किया गया था। हुगली रिवर ब्रीज कमिशन (एचआरबीसी) की ओर से नवनिर्मित बहुमंजिला इमारत के विरोध के कारण पांच साल पहले हावड़ा में तृणमूल की ओर से व्यापक आंदोलन किया गया था। हालांकि तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दल विपक्ष में था।
मालूम हो कि 2008 में राज्य में वाममोर्चा की सरकार थी। तब सिंगुर-नंदीग्राम आंदोलन को लेकर हंगामा हो रहा था। इस बीच दूसरे हुगली सेतु के बीच शिवपुर थाना इलाके के मंदिरतला में हुगली रिवर ब्रीज कमिशन (एचआरबीसी) के इस बहुमंजिला भवन को बनाने को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई थी। तृणमूल कांग्रेस की ओर से निर्माण का विरोध करतेहुए कहा जा रहा था कि हावड़ा नगर निगम ने ऐसे भवन को बनाने की मंजूरी कैसे दे दी। बताया जाता है कि इसके निर्माण के दौरान किसी ने यहां आग भी लगा दी थी। इसे लेकर भी व्यापक हंगामा हुआ था।
इस बारे में कृषि मार्केटिंग विभाग के मंत्री अरुप राय का कहना है कि वाममोर्चा के शासन काल में हम लोग विभिन्न जिलों में अलग-अलग मुद्दों पर आंदोलन कर रहे थे। इसके अलावा नगर निगम ने तय किया था कि जी प्लस 4 से ज्यादा ऊंचाई के निर्माण के लिए मंजूरी नहीं दी जाएगी। ऐसे में 15 मंजिला इमारत के निर्माण को मंजूरी दिए जाने  की वैधता और सुरक्षा को लेकर इलाके के लोगों की ओर से आंदोलन किया गया था। हालांकि उनका कहना है कि ऐसे मौके पर पुरानी बातें पूछने का कोई तुक नहीं है।
दूसरी ओर बहुमंजिली इमारत में मुख्यमंत्री व दूसरे महत्वपूर्ण मंत्रियों के दफ्तर स्थानांतरित होने के बाद यातायात की व्यवस्था क्या होगी। वाहनों की पार्किंग कहां की जाएगी। इसके साथ ही सुरक्षा घेराबंदी कहां की जाएगी। यह सारा कुछ तय करने के लिए हावड़ा शहर के पुलिस आयुक्त अजय रानाडे ने इलाके का दौरा किया। हावड़ा शहरी पुलिस के लिए स्थानीय लोगों के जनजीवन को अस्त-व्यस्त किए बगैर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना ही प्रमुख सिरदर्द का कारण है।

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