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यूपीपीएससी का विवादास्पद आरक्षण फार्मूला: अदालत ने याचिका का निस्तारण किया PDF Print E-mail
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Friday, 02 August 2013 10:31

इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आज एक रिट याचिका का निस्तारण कर दिया जिसमें उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग :यूपीपीएससी: द्वारा लागू किए गए विवादास्पद आरक्षण फार्मूले को चुनौती दी गई थी।
उस प्रस्ताव को छात्रों के हिंसक विरोध और राज्य सरकार द्वारा नामंजूर किये जाने के बाद पिछले सप्ताह वापस ले लिया गया था।
न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत महापात्र और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव ने सुधीर कुमार सिंह और अन्य द्वारा दायर याचिका का निस्तारण कर दिया।
पीठ ने कहा कि यूपीपीएससी के परीक्षा के नतीजों को रद्द करने के बाद कोई मुद्दा नहीं रहता। विवादास्पद आरक्षण फार्मूले के आधार पर घोषित परीक्षा के नतीजे को पहले ही रद्द कर दिया गया है।
विवादास्पद आरक्षण फार्मूला के तहत जाति आधारित आरक्षण को लिखित परीक्षा के स्तर से ही लागू किया जाना था। उसे सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का नतीजा चार जुलाई को घोषित करने के दौरान लागू किया गया था।
इस कदम का पिछले महीने छात्रों ने जोरदार विरोध किया था और इलाहाबाद में हिंसक आंदोलन देखने को मिला था। इलाहाबाद में ही यूपीपीएससी का मुख्यालय है।
22 जुलाई को उच्च न्यायालय ने मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जबकि यूपीपीएससी के उसके आधार पर साक्षात्कार लेने


पर रोक लगा दी थी।
अदालत ने नया फार्मूला लागू करने में जल्दबाजी दिखाने के लिए भी आयोग को फटकार लगाई थी, जब अदालत को सूचित किया गया कि नयी व्यवस्था को यूपीपीएससी के सदस्य द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव पेश किए जाने के दिन ही ध्वनि मत से पारित कर दिया था।
इस कदम का लक्ष्य सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के करीबी समझे जाने वाले एक खास जाति समूह को फायदा पहुंचाना होने के आरोपों से परेशान राज्य सरकार ने दावा किया कि आरक्षण फार्मूला उसे विश्वास में लिए बिना लागू किया गया।
इसके बाद पिछले सप्ताह यूपीपीएससी के सचिव को हटा दिया गया जबकि आयोग के अध्यक्ष और इस प्रस्ताव को पेश करने वाले सदस्य से स्पष्टीकरण मांगा गया।
गत 27 जुलाई को आयोग ने एक अधिसूचना जारी की जिसमें घोषणा की गई कि परीक्षा के जिस नतीजे को चुनौती दी गई है उसे रद्द किया जाता है और यथाशीघ्र संशोधित परिणाम घोषित किया जाएगा।
इस संबंध में एक हलफनामा इस सप्ताह की शुरूआत में अदालत को सौंपा गया था।
(भाषा)

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