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शक्ति प्रदर्शन: नौकरशाह और नेता आए आमने सामने PDF Print E-mail
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Friday, 02 August 2013 09:59

निलंबन सही: अखिलेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नोएडा की उपजिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन की कार्रवाई को सही करार देते हुए गुरुवार को कहा कि जो भी अधिकारी गैरजिम्मेदाराना तरीके से काम करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने यहां राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद दुर्गाशक्ति से जुड़े सवाल पर कहा-आपको नोएडा के कादलपुर गांव के लोगों से जानकारी लेनी चाहिए। वहां के मुसलमान लोग चंदा इकट्ठा करके मस्जिद बनाना चाहते थे। उपजिलाधिकारी ने किसी से राय-मशविरा किए बगैर कार्रवाई की। इससे वहां का माहौल खराब हुआ।
उन्होंने कहा-कुछ ताकतें प्रदेश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही हैं। इस घटना से सूबे का माहौल खराब हो सकता था। अधिकारियों को जिम्मेदारी से काम करना पड़ेगा। निलंबन के पीछे खनन माफिया का कोई हाथ नहीं था। अवैध खनन के खिलाफ सरकार सख्त है। आप पिछले दो-तीन महीनों का रिकार्ड देख लें। खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई हुई है। माहौल ठीक रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। एक तरफ तो मीडिया वाले कहते हैं कि कार्रवाई नहीं हो रही है, जब होती है तो सवाल खड़े करते हैं। निलंबन पर उत्तर प्रदेश आइएएस एसोसिएशन के तल्ख रुख के बारे में  पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा-क्या वह समय आपको याद नहीं है जब आइएएस एसोसिएशन के लोग सरकार के दरबार में घुस नहीं पाते थे। हम तो लोकतंत्र का सम्मान करते हैं। एसोसिएशन को तो हमने ही बढ़ावा दिया। हम खुद नहीं चाहते कि किसी अधिकारी के साथ गलत बर्ताव हो। जहां तक अधिकारी के अपना पक्ष रखने की बात है तो वे अपनी बात कहें।
गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी के इस मामले में भेजी गई रपट के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा-जिलाधिकारी की क्या रपट है, एलआइयू की क्या है, उसकी भी आप जानकारी हासिल कर लें। जो कार्रवाई हुई है, ठीक हुई है।
दुर्गाशक्ति को गौतमबुद्धनगर सदर तहसील के रबुपुरा क्षेत्र स्थित कादलपुर गांव में एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार को अदूरदर्शितापूर्ण तरीके से हटवाने के कारण सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने के आरोप में 27 जुलाई की रात को निलंबित करके उन्हें राजस्व परिषद लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया था। दुर्गाशक्ति ने नोएडा में यमुना और हिंडन नदी के तटवर्ती इलाकों में चल रहे अवैध खनन के खिलाफ अभियान चला रखा था। निलंबन को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के रजिस्ट्री विभाग में दायर की गई है।

देना था एक मौका: केंद्र

नई दिल्ली,1 अगस्त (भाषा)। केंद्र ने उत्तर प्रदेश


के गौतमबुद्धनगर में खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने वाली निलंबित आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को बहाल करने की बढ़ती मांग के बीच उन्हें न्याय का भरोसा दिया। अखिल भारतीय आइएएस अधिकारी संघ ने गुरुवार को कार्मिक राज्य मंत्री वी नारायणसामी से मुलाकात करके 28 साल की नागपाल का निलंबन रद्द करने और ऐसी ड्यूटी करने वाले अधिकारियों का बचाव तय करने की मांग की। नारायणसामी ने स्वीकार किया कि नागपाल को एक मौका दिए बिना निलंबित किया गया है। 
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश सरकार से अधिकारी के निलंबन के बारे में सूचना देने वाली रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। नारायणसामी ने पत्रकारों से कहा-अधिकारी को बिना मौका दिए निलंबित किया गया है। हम दुर्गा नागपाल के निलंबन के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार से एक रिपोर्ट चाहते हैं। जब तक हमें रिपोर्ट नहीं मिल जाती, हम किसी भी भावना या किसी तरह की मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया नहीं करेंगे। हम राज्य सरकार से जवाब का इंतजार करेंगे।
नारायणसामी अखिल भारतीय आइएएस अधिकारी संघ के एक प्रतिनिधिमंडल से इस मुद्दे पर मिले। उन्होंने कहा-आइएएस संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुझसे मुलाकात की है।    हमारी ओर से तय किया जाएगा कि नियमों का पालन किया गया है, प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। भारत सरकार इस मुद्दे को हमेशा ही निष्पक्ष ढंग से देखेगी। इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि राज्य सरकार से जवाब मिलते ही केंद्र सरकार इस मामले पर गौर करेगी। उन्होंने कहा-आइएएस अधिकारियों का काडर नियंत्रण प्राधिकारी होने के नाते कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग निश्चित तौर पर कार्य करेगा। आइएएस संघ के सचिव एसबी रेड्डी ने बैठक के बाद कहा-मंत्री ने हमें भरोसा दिलाया कि हम तथ्यों पर गौर करेंगे। भरोसा मिला है कि न्याय होगा। संघ ने नागपाल का निलंबन तत्काल निरस्त करने की मांग की है। संघ में वर्तमान समय में 4737 सदस्य हैं।
नागपाल के निलंबन को लेकर भाजपा और बसपा सहित विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि नागपाल को राज्य के गौतमबुद्धनगर क्षेत्र में सक्रिय खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई को लेकर हटाया गया है। विरोधों और अनुरोधों के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार निलंबित अधिकारी के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल करने पर विचार कर रही है। किसी भी अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की यह प्रारंभिक प्रक्रिया होती है।

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