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तेलंगाना के गठन से उप्र में राजनीति गरमाई PDF Print E-mail
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Thursday, 01 August 2013 11:40

प्रदीप वत्स, मेरठ। तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने की घोषणा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर प्रदेश के विभाजन की बात कर, एक तीर से कई निशाने साधे हैं। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां केंद्रीय मंत्री अजित सिंह को घेरने की कोशिश की है, वहीं छोटे प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था की बात कहकर प्रदेश की समाजवादी सरकार पर भी निशाना साधा है। इसी के साथ बुधवार को इस मुद्दे को उठाकर अपने कार्यकाल में भेजे गए प्रदेश विभाजन के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार पर भी दबाव बनाने की कोशिश की है।
उधर, राजनीतिक जानकारों की बात पर गौर करें तो उनका मानना है कि लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार एक बार फिर राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की घोषणा कर सकती है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच बनाने का पासा भी फेंक सकती है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को उत्तर प्रदेश को पश्चिमी प्रदेश के साथ तीन और हिस्सों (बुंदेलखंड, अवध प्रदेश व पूर्वांचल) की मांग को एक बार फिर उठाकर जहां चौधरी अजित सिंह की घेराबंदी की कोशिश की है वहीं इस मुद्दे पर अपने आप को गंभीर बताते हुए पश्चिम में अपनी स्थिति मजबूत बनाने की कवायद भी की है। अजित सिंह केंद्र में मंत्री बनने के बाद हरित प्रदेश के मामले पर बेशक चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन हाईकोर्ट की बेंच को लेकर वे वकीलों के साथ प्रधानमंत्री और कानून मंत्री तक से मिल चुके हैं। हरित प्रदेश की मांग हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी


चरण सिंह ने भी प्रदेश के पूर्व मंत्री गोविंद बल्लभ पंत के समय में रखी थी, लेकिन उन्होंने इसको पूरी तरह खारिज कर दिया था। अजित सिंह भी हरित प्रदेश को मुद्दा बनाते रहे हैं। लेकिन उनका यह मुद्दा आम जनता पर कोई असर नहीं डाल सका। इस मुद्दे पर पिछले पांच साल में कोई भी बड़ा आंदोलन नहीं हुआ है। जबकि पिछले चार दशकों से चले आ रहे हाईकोर्ट बेंच के मुद्दे पर वकील लगातार आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में  अजित केंद्र सरकार से हाईकोर्ट बेंच के मामले पर कोई पहल कराकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने जनाधार को बचाने की कोशिश करेंगे।
मायावती ने राज्य के बंटवारे की बात कर अजित ही नहीं केंद्र सरकार व समाजवादी पार्टी पर भी निशाने साधने की कोशिश की है। हालांकि समाजवादी पार्टी राज्य के बंटवारे के पूरी तरह खिलाफ है। लेकिन बुंदेलखंड व पूर्वांचल को अलग राज्य बनाए जाने की बात कर मायावती ने इन क्षेत्रों में सपा को झटका देने की कोशिश की है।
उधर, अपनी मांग को लेकर केंद्र सरकार पर भी दबाव बनाने की कोशिश की है। हालांकि प्रदेश के बंटवारे को लेकर भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल का मानना है कि राज्यों का विभाजन करना है, तो राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना की जानी चाहिए। उनका कहना है कि हरित प्रदेश को बनाए जाने से बेहतर होगा कि पश्चिम के जिलों को दिल्ली में मिलाकर इंद्रप्रस्थ प्रदेश का गठन किया जाए।

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