मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में तृणमूल कांग्रेस विजेता बनकर उभरी PDF Print E-mail
User Rating: / 0
PoorBest 
Wednesday, 31 July 2013 10:21

कोलकाता। पिछले साल सितंबर में कांग्रेस से अलग होने के बाद बड़े चुनाव अकेले लड़ते हुए ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में शानदार जीत हासिल की है और राज्य के ग्रामीण इलाकों में अपनी निर्विवाद श्रेष्ठता स्थापित कर दी है।
चुनाव के नतीजों से वाम मोर्चा और कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। नतीजों से जाहिर होता है कि ढाई साल का कार्यकाल और सारदा चिट फंड घोटाला सहित अन्य विवाद तृणमूल कांग्रेस सरकार में ग्रामीण आबादी का भरोसा डिगा पाने में नाकाम रहा है।
17 जिलों में तृणमूल ने 13 जिला परिषदों में जीत दर्ज की है जबकि वाम ने एक :जलपाईगुड़ी: में और कांग्रेस ने एक :मुर्शिदाबाद: में जीत दर्ज की है। वहीं भाजपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई।
824 जिला परिषद सीटों में तृणमूल कांग्रेस ने अपने नाम 530 सीट किए, वहीं वाम मोर्चा ने 209, कांग्रेस ने 78 और अन्य को पांच सीटें मिली। दो नतीजे लंबित हैं।
पार्टी ने दक्षिण हिस्से में पारपंरिक रूप से वाम मोर्चा के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में शानदार जीत दर्ज की और दक्षिण हिस्से में कांग्रेस के गढ़ को भी ध्वस्त कर दिया, जहां तृणमूल कांग्रेस अपेक्षाकृत कमजोर थी।
तृणमूल कांग्रेस ने हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, बर्दवान, वीरभूम, नदिया, कूचविहार और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में जीत दर्ज की।
चुनाव के नतीजों से जाहिर होता है कि तृणमूल ने कांग्रेस के दबदबे वाले उत्तर बंगाल में अपनी पैठ बढ़ाई है और ऐसा प्रतीत होता है कि वोटों के बंटवारे ने वाम मोर्चे को उत्तर बंगाल में बहुत मदद पहुंचाया तथा कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया।
मालदा जिला परिषद, जहां कांग्रेस अच्छी स्थिति में थी वहां उसे 38 में 16 सीटें मिली, वाम को 16 और तृणमूल कांग्रेस को छह सीटें मिलने से त्रिशंकु नतीजा आया।
परिषद के बोर्ड का


गठन करने के लिए तृणमूल कांग्रेस को कांग्रेस की जरूरत होगी।
इसी तरह से कांग्रेस ने उत्तर दिनाजपुर जिले के जिला परिषद में खराब प्रदर्शन किया। यह केंद्रीय मंत्री एवं ममता बनर्जी की चिर प्रतिद्वंद्वी दीपा दासमुंशी का गृह जिला है।
उत्तर दिनाजपुर जिला परिषद की 26 सीटों में वाम मोर्चा को 13 सीटें मिली जबकि कांग्रेस को आठ और तृणमूल को पांच सीट मिली।
इसी जिले में पंचायत समितियों के चुनाव में कांग्रेस को नौ में सिर्फ एक में जीत मिली।
कांग्रेस ने बहुत खराब प्रदर्शन किया और पार्टी के कद्दावर नेता एवं रेल राज्य मंत्री अधीर चौधरी के नेतृत्व में पार्टी ने सिर्फ मुर्शिदाबाद जिला में जीत हासिल की।
वहीं, ग्राम पंचायत चुनाव में हुगली, बांकुड़ा और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला।
329 पंचायत समितियों में तृणमूल को 192, वाम को 64 और कांग्रेस को 20 सीटें मिली।
ग्राम पंचायतों में तृणमूल ने 54 प्रतिशत सीटों पर जीत दर्ज की।
सिंगूर के 16 ग्राम पंचायतों में तृणमूल ने 12 पर जीत दर्ज की। वाम की झोली में सिर्फ एक सीट गई।
हाल ही में एक कॉलेज छात्रा के बलात्कार और हत्या को लेकर विवादों में रहा उत्तर 24 परगना जिला के कामदुनी के ग्राम पंचायत चुनाव में तृणमूल को विपक्ष की तुलना में अधिक मत हासिल हुए ।
सत्तारूढ़ पार्टी ने माओवादियों के तीन पूर्व गढ़ बांकुड़ा, पुरूलिया और पश्चिम मिदनापुर जिलों तथा इससे लगे पूर्वी मिदनापुर जिले में शानदार जीत हासिल की। हालांकि, नंदीग्राम में पार्टी को तृणमूल कांग्रेस के पूर्व समर्थकों से संघर्ष करना पड़ा, जो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में थे। इससे पार्टी को मामली नुकसान हुआ।   
भाषा

आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?