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तकनीक पसंद मुख्यमंत्री को मुंह चिढ़ाता उत्तर प्रदेश का सूचना विभाग PDF Print E-mail
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Monday, 29 July 2013 09:33

जानकी शरण द्विवेदी, गोण्डा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सीधे नियंत्रण में काम करने वाला सूचना विभाग राज्य मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक लकवे का शिकार है। जनता के बीच मुख्यमंत्री की छवि चमकाने का जिम्मा उठाने वाला यह विभाग खुद अंधेरे में है। स्कूली बच्चों को लैपटाप और टेबलेट बांटकर उन्हें सूचना क्रांति की दुनिया में अगुआ बनाने का सपना दिखाने वाले युवा मुख्यमंत्री को सूचना विभाग की कार्यप्रणाली पर जरूर हैरानी होगी।
शासकीय कार्यक्रमों, योजनाओं और नीतियों के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य में सूचना विभाग काम कर रहा है। प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर सूचना विभाग का कार्यालय है। इस विभाग में जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक तैनात अधिकारियों का काम आम जनता में मुख्यमंत्री की लोकप्रिय योजनाओं व कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करना होता है। आज के दौर में ई-गवर्नेंस की बात हो रही है और पूरे प्रदेश में दो दर्जन से अधिक तरह की लोकोपयोगी सेवाएं आॅनलाइन संचालित की जा रही हैं। आगामी 15 अगस्त को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इंटरनेट के माध्यम से गैस बुकिंग और उसकी समय पर आपूर्ति तय करने वाली सेवा ‘ईजी गैस’ की शुरुआत करने वाले हैं। इसके बावजूद सूचना विभाग अपनी राह बदलने को तैयार नहीं है।
विभाग की वेबसाइट पर सूचनाओं का अभाव है। नवीनतम सूचनाओं को तो छोड़िए, पुरानी और अहम सूचनाएं भी खोजे नहीं मिलेंगी। सामान्यतया हर सरकारी विभाग की वेबसाइट के होम पेज पर उस विभाग के बारे में संक्षिप्त परिचय के साथ ही संगठनात्मक ढांचा और ‘हमसे संपर्क करें’ कालम अनिवार्य रूप से होते हैं, जिसमें विभागीय मंत्री से लेकर शासन में बैठे प्रमुख सचिव/सचिव, विशेष सचिव के साथ ही निदेशालय में तैनात निदेशकों, प्रबंध निदेशकों का ब्योरा, उनके पते व फोन नंबर के साथ दर्ज होता है।
मुख्यमंत्री की छवि चमकाने की जिम्मेदारी सूचना व जनसंपर्क विभाग की होती है। इसलिए सामान्यतया सभी मुख्यमंत्री इस विभाग का प्रभार अपने पास ही रखते हैं। अखिलेश यादव ने भी यह विभाग अपने पास ही रखा है। इसके बावजूद यह विभाग उनसे संबंधित सूचनाएं ही दे पाने में नाकाम साबित हो रहा है। वेबसाइट पर उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों व उनके विभागों का विवरण दर्ज है। इसके मुताबिक, अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल में कुल सदस्यों की संख्या 56 है, जिसमें से मुख्यमंत्री समेत 18 कैबिनेट, पांच स्वतंत्र प्रभार और 33 राज्य मंत्री हैं, जबकि 18 जुलाई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सदस्यों की संख्या बढ़कर 58 हो गई है। अब 21 कैबिनेट, छह स्वतंत्र प्रभार और 31 राज्यमंत्री हो गए हैं। हालिया विस्तार में नारद राय और कैलाश यादव को नया कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। राम मूर्ति वर्मा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। गायत्री प्रजापति को भी राज्यमंत्री से पदोन्नति देकर स्वतंत्र प्रभार का दायित्व सौंपा गया


है। करीब दस दिन बाद भी इतना अहम बदलाव विभाग के वेबसाइट पर संशोधित नहीं है।
इसी तरह संगठनात्मक ढांचे के बारे में भी वेबसाइट पर कोई सूचना नहीं है। वेबसाइट की पूरी तरह पड़ताल के बावजूद किसी को यह पता नहीं चल सकेगा कि इस विभाग का मंत्री कौन है? विभागीय प्रमुख सचिव, सचिव, विशेष सचिव/निदेशक आदि के नामों और उनके संपर्क नंबरों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। विभाग से संबंधित किसी शिकायत या सुझाव के लिए किसी जिम्मेदार अधिकारी का कोई ईमेल पता या फोन नंबर भी उपलब्ध नहीं है। ‘हमसे संपर्क करें’ कालम में विभाग के वेब डिजाइनर का नाम और फोन नंबर अंकित है जबकि यहां पर विभागीय अधिकारियों के नाम व नंबर होने चाहिए। नागरिक चार्टर के बारे में भी वेबसाइट मौन है, जबकि सरकार ने नागरिक सेवाओं के लिए चार्टर बना रखा है, जिससे किसी को यह जानकारी मिल सकती है कि विभाग में किस प्रकृति का कार्य कितने दिन में निस्तारित किया जा सकता है।
जब राज्य मुख्यालय पर यह दुर्दशा हो तो जिलों में संचालित सूचना कार्यालयों की दुर्दशा का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। जिलों में शासन के प्रतिनिधि के रूप में काम करने वाले जिलाधिकारियों के जनसंपर्क कार्यालय के रूप में काम करने वाले इन दफ्तरों में अधिकारियों का घोर अकाल है। कई जिलों में उधार के अधिकारियों से काम चलाया जा रहा है।
देवीपाटन मंडल के चारों जिलों गोण्डा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में इन दिनों कोई आहरण वितरण अधिकारी नहीं है, जबकि नियम के तहत राजपत्रित अधिकारियों में गोण्डा में मंडल स्तर का एक उपनिदेशक सूचना और एक जिला सूचना अधिकारी होना चाहिए। इसी तरह दूसरे जिलों में भी एक-एक सूचना अधिकारी और अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी का पद सृजित है। इसके विपरीत गोण्डा में इन दिनों उपनिदेशक, जिला सूचना अधिकारी और अतिरिक्त जिला सूचनाधिकारी की कुर्सियां खाली हैं। इसी तरह बलरामपुर जिलों में भी दोनों बड़े पद रिक्त हैं। नतीजतन मंडलायुक्त ने इन दोनों जिलों में आहरण-वितरण समेत सभी प्रशासनिक कार्य उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी डीबी गुप्ता को सौंप रखा है। जिलाधिकारी डाक्टर रोशन जैकब ने नगर मजिस्ट्रेट आनंद स्वरूप को यहां का प्रभार दे रखा है। पर्यवेक्षण के लिए दो अधिकारी तैनात किए गए हैं। लेकिन विभागीय उद्देश्य की पूर्ति करने वाले अधिकारियों का अकाल है। बहराइच में अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी गुलाम वारिस सिद्दीकी और श्रावस्ती के जिला सूचना कार्यालय में अधिकारी कर्मचारी के नाम पर अतिरिक्त जिला सूचनाधिकारी के पद पर एकमात्र उमेश चंद्र सक्सेना तैनात हैं। इन दोनों जिलों में आहरण वितरण का प्रभार बहराइच के सहायक निदेशक सेवायोजन आरएस भारती के पास है।

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