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मिड डे मिल खाने से 22 बच्चों की मौत, लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूटा PDF Print E-mail
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Wednesday, 17 July 2013 17:52

छपरा। मध्याह्न भोजन खाने के बाद 22 छात्र-छात्राओं की मौत के विरोध में आज विपक्षी दलों द्वारा बुलाए गए बंदी के दौरान सारण जिले में बंद समर्थकों ने कई वाहन को क्षतिग्रस्त किया और सडक एवं रेल यातायात को बाधित किया।


पुलिस अधीक्षक सुजित कुमार ने बताया कि बंद समर्थकों ने मशरख प्रखंड में तीन पुलिस वाहनों और एक अंचल अधिकारी के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया।
बंद समर्थकों ने जिला मुख्यालय छपरा स्थित स्थानीय अदालत में पेशी के लिए विचारधीन कैदियों के वाहन को निशाना बनाया और उसके शीशे तोड दिए तथा पुलिस चौकी में तोडफोड की, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया।
राजद, लोजपा और भाजपा द्वारा घोषित इस एक दिवसीय बंदी के दौरान स्कूल, कॉलेजों, बैंकों और सरकारी कार्यालय खुले रहे, लेकिन छात्रों और कर्मियों की उपस्थिति बेहद कम दिखी।
राजद बंद समर्थकों ने जगह-जगह टायर जलाकर सडक यातायात को अवरूद्ध करने के साथ छपरा कचहरी रेलवे स्टेशन पर टाटा-छपरा एक्सप्रेस ट्रेन और दिल्ली जाने वाली वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन को रोके रखा।
राजद की ओर से बंद सर्मथकों का नेतृत्व महाराजगंज के सांसद प्रभुनाथ सिंह कर रहे हैं, जबकि बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता नंद किशोर यादव, विधान परिषद में उनके समकक्ष सुशील कुमार मोदी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय पीड़ित परिवारों से मिलने और सारण बंद में शामिल होने के लिए मशरख गए हुए हैं।
सारण जिला के मशरख प्रखंड के धर्मसाती गंडामन गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में विषाक्त मध्याह्न भोजन खाने से 22 छात्र-छात्राओं की मौत और 25 अन्य के बीमार होने के विरोध में एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने आज पटना में आक्रोश मार्च निकाला और डाक बंगला चौराहे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया।
एनएसआईयू के इस आक्रोश मार्च का नेतृत्व करते हुए प्रदेश युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ललन कुमार और एनएसआईयू के प्रदेश उपाध्यक्ष रोहित कुमार ने इस घटना के लिए मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि नीतीश कुमार मृतक के आश्रितों को दो-दो लाख रूपये के मुआवजा की घोषणा कर दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के बजाए मामले की लीपापोती में लगी हुई है।
ललन ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाए जाने और मामले की सुनवाई त्वरित न्यायालय में कराए जाने की मांग की है। (भाषा)

मिड डे मिल खाने से मरने वाले बच्चों की संख्या 24 हुई, 23 बीमार PDF

पटना। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 24 छात्रों की जान जा चुकी है बिहार के सारण जिले में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में मध्याह्न भोजन खाने के बाद भोजन विषाक्तता के कारण मरने वाले छात्रों की संख्या आज बढ़कर 24 हो गई।
स्कूल की महिला रसोइया के अलावा 23 बच्चे अभी भी बीमार हैं। बीमार बच्चों में 11 की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल :पीएमसीएच: के आईसीयू वार्ड में रखा गया है।
शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव अमरजीत सिन्हा ने प्रेस ट्रस्ट को बताया कि पहली से पांचवी कक्षा में पढ़ने वाले 10 साल तक की उम्र के 16 बच्चों की मौत छपरा में हुई और चार अन्य की कल देर रात पीएमसीएच लाए जाने के क्रम में रास्ते में ही मौत हो गई थी। वहीं एक अन्य छात्र की आज सुबह अस्पताल में मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी और केंद्रीय मानव


संसाधन विभाग के अतिरिक्त सचिव अमरजीत सिन्हा ने पीएमसीएच पहुंच कर डाक्टरों से बातचीत की और बच्चों के इलाज के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कुछ बीमार बच्चों से भी बात कर उनका हालचाल पूछा।
इस बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, पटना के कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अरच्च्ण सिन्हा और बिहार के पूर्व पर्यटन मंत्री एवं भाजपा विधायक सुनील कुमार पिंटू बीमार बच्चों से मिलने अस्पताल पहुंचे ।
स्कूल छात्रों के साथ विषाक्त भोजन खाने के बाद बीमार पड़ी स्कूल की रसोइया मंजू देवी, जो कि पीएमसीएच में भर्ती है, ने बताया कि भोजन बनाने की सामग्री उसे स्कूल की शिक्षिका मीणा देवी के पति अर्जुन प्रसाद यादव ने उपलब्ध कराई थी।
विषाक्त भोजन खाने से बीमार हुए बच्चों में मंजू देवी के दो बेटे अभिषेक एवं आदित्य और एक बेटी खुशी भी शामिल है, जिनका उपचार पटना के पीएमसीएच में चल रहा है।
बीमार पड़े बच्चों में शामिल उस स्कूल की चौथी कक्षा की छात्रा कांति कुमारी ने बताया, ‘‘भोजन का स्वाद अच्छा नहीं होने की वजह से जब उन लोगों ने थोड़ा ही खाना खाकर छोड़ दिया, तो शिक्षिका मीणा देवी ने उनको डांटते हुए पूरा खाना खत्म करने को कहा। उनके डर से हम लोगों ने खाना खत्म किया, जिसके बाद हमारे पेट में दर्द होने लगा। इसके बाद शिक्षिका ने हमें घर जाने को कहा और घर जाने के रास्तें में ही हम बेहोश होकर गिर पड़े।

यह घटना कल राज्य की राजधानी से 60 किमी दूर और छपरा से 25 किमी दूर मशरख ब्लॉक के दहरमासती गंदावन गांव के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में हुई।
इस बीच, विपक्षी भाजपा ने घटना के बाद नीतीश कुमार सरकार के विरोध में आज सारण बंद का आह्वान किया है।
घटना के विरोध में राजद ने भी आज सारण में बंद का ऐलान किया है।   
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता नंद किशोर यादव, विधान परिषद में उनके समकक्ष सुशील कुमार मोदी और भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष मंगल पांडे पीड़ित परिवारों से मिलने और सारण बंद में शामिल होने के लिए मशरख रवाना हो चुके हैं।
पुलिस ने बताया कि मध्याह्न भोजन में दाल, चावल और सोयाबीन दिया गया था जिसे खाने के तुरंत बाद बच्चे बीमार हो गए।
इन लोगों को तुरंत छपरा सदर अस्पताल ले जाया गया। बाद में रात को रसोइये सहित इनमें से 27 लोगों को पटना स्थित पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच सारण के संभागीय आयुक्त और डीआईजी द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी और इसमें फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी का दल मदद करेगा।
कुमार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को दो दो लाख रच्च्पए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसमें से 1.5 लाख रच्च्पए आपदा प्रबंधन कोष से और 50,000 रच्च्पए मुख्यमंत्री राहत कोष से होंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि इस घटना से दुखी नीतीश कुमार ने आज होने वाला भामाशाह सम्मान समारोह रद्द कर दिया है।
(भाषा)

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