मुखपृष्ठ अर्काइव
Bookmark and Share
'इशरत के आंतकी रिश्तों की जानकारी नहीं दे सकते' PDF Print E-mail
User Rating: / 0
PoorBest 
Wednesday, 17 July 2013 09:42

जनसत्ता ब्यूरो, नई दिल्ली/अमदाबाद। 16 जुलाई। इशरत जहां के आतंकवादियों से रिश्ते होने के विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि वे इसका खुलासा नहीं कर सकते हैं।

इसकी वजह अमेरिका के साथ वह करार है जिसके तहत सरकार मुंबई के आतंकवादी हमले के मुख्य अभियुक्त डेविड हेडली से मिली कोई भी सूचना सार्वजनिक नहीं कर सकती है। वहीं पूर्व गृह सचिव जीके पिल्ले ने कहा है कि इशरत का एनआइए की रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं था। इस बीच इशरत जहां मुठभेड़ कांड की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने विशेष अदालत में आरोप पत्र के साथ एक पेन ड्राइव जमा की है। इसमें भाजपा नेता और गुजरात के पूर्व गृह राज्यमंत्री अमित शाह और एक आरोपी पुलिस अधिकारी के बीच फोन पर हुई कथित बातचीत के अंश हैं। सीबीआइ के इस कदम से शाह की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से जब पूछा गया कि क्या राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआइए) ने गृह मंत्रालय को ऐसी कोई रिपोर्ट दी है जिसमें कहा गया है कि हेडली ने अपने इकबालिया बयान में इशरत का नाम नहीं लिया है, तो उन्होंने कहा कि एनआइए रिपोर्ट अभी आनी है।
अमदाबाद के बाहरी इलाके में 15 जून 2004 को हुई मुठभेड़ में इशरत के मित्र जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लै, अमजद अली राणा और जीशान जौहर भी मारे गए थे। गुजरात पुलिस ने तब दावा किया था कि चारों मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के लिए आए थे।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि हेडली ने जो कुछ भी कहा, यह अमेरिकी एजंसी एफबीआइ के समक्ष है। एफबीआई और एनआईए के बीच एक समझौता है। इसलिए, हम उसे प्रकट नहीं कर सकते। वे इन सवालों का जवाब दे रहे थे कि क्या हेडली ने अमेरिकी हिरासत में 2011 में पूछताछ के दौरान एनआइए को दिए गए बयान में पाकिस्तान आधारित एक आतंकवादी समूह के साथ इशरत के कथित रिश्तों की जानकारी दी थी।
मालूम हो कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के आग्रह पर गृह मंत्रालय ने पिछले पखवाड़े को एनआइए को यह पता लगाने को कहा था कि क्या इशरत आतंकवादी थी। वहीं दूसरी ओर पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा है कि डेविड हेडली से पूछताछ के बाद तैयार की गई एनआइए की रिपोर्ट में इशरत जहां का उल्लेख नहीं है।   अमेरिका में हेडली से पूछताछ के बाद एनआइए ने गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उस समय पिल्लै ही गृह सचिव थे। इशरत के लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों के सवाल पर पिल्लै


ने कहा कि उसके आतंकवादियों के संपर्क में होने के बारे में खुफिया रिपोर्ट थी। लेकिन यह साफ नहीं है कि वह निर्दोष थी या नहीं और तीनों आतंकवादी क्या उसे कवच के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लश्कर की वेबसाइट पर इशरत के नाम का उल्लेख शहीद के तौर पर था। लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि कोई भी फैसला सुनाने से पहले किसी को भी इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए। यह बेहद जटिल है।
वहीं इशरत मुठभेड़ कांड की जांच कर रही सीबीआइ ने विशेष अदालत को आरोप पत्र के साथ नौ पुलिस अधिकारियों की रिकार्ड की गई बातचीत और एक पेन ड्राइव जमा की है। पेन ड्राइव में भाजपा नेता और गुजरात के पूर्व गृह राज्यमंत्री अमित शाह और एक आरोपी पुलिस अधिकारी के बीच फोन पर हुई कथित बातचीत के अंश हैं। इससे शाह की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इन पुलिस अधिकारियों ने नवंबर 2011 में इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में जांच को बाधित करने की रणनीति बनाने के लिए कथित तौर पर एक बैठक की थी। इसमें आरोपी और निलंबित आइपीएस अधिकारी जीएल सिंघल ने दो पेन ड्राइव दिए थे। एक में उनके और राज्य के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह के बीच रिकार्ड की गई बातचीत थी। दूसरे में नौ अधिकारियों के बीच रिकार्ड की गई बातचीत थी।
सीबीआइ के मुताबिक यह बैठक महाधिवक्ता के निजी चैंबर में नवंबर 2011 को हुई थी। इसमें महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी, जीएल सिंघल, रोहित वर्मा, सिंघल के अधिवक्ता मित्र, मुख्यमंत्री के सचिव गिरीश मुर्मू, तत्कालीन आइजी (गांधीनगर क्षेत्र) एके शर्मा, तत्कालीन गृह राज्य मंत्री प्रफुल पटेल, तत्कालीन विधि राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ासामा और एक अन्य आरोपी तरुण बारोट शामिल थे।
आरोप पत्र में कहा गया है,‘उसमें इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में जांच को बाधित करने की रणनीति पर चर्चा हुई थी।’ उस वक्त गुजरात हाई कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल मुठभेड़ मामले की प्राथमिक जांच कर रहा था। एसआइटी ने जब कहा कि प्रथम दृष्टया मुठभेड़ फर्जी लगती है, तो उसके बाद हाई कोर्ट ने इसकी जांच सीबीआइ को सौंपी।
सिंघल और बारोट समेत सात पुलिस अधिकारियों के खिलाफ इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआइ ने आरोप पत्र दायर किया है। सीबीआइ ने कहा है कि मुठभेड़ फर्जी थी। इसे गुजरात पुलिस और खुफिया ब्यूरो ने मिलकर अंजाम दिया।

 

आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?