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भारत को राजनीति में मूलभूत बदलाव की जरूरत : अमर्त्य PDF Print E-mail
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Tuesday, 16 July 2013 15:35

कोलकाता। सुधारों का आह्वान करते हुए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि भारत को राजनीति में मूलभूत बदलाव की जरूरत है जिससे वह समावेशी और यथार्थ विकास की राह पर अग्रसर हो सके।
सेन ने बीती रात यहां कहा ‘हम सुधारों सहित कई, कई बदलाव चाहते हैं जिससे हमारे देश को योगदान मिले, राजनीतिक बदलाव ही नहीं आए बल्कि जरूरत पूरी हो सके... देश की राजनीति में और राजनीतिक अर्थव्यवस्था में मूलभूत बदलाव की भी जरूरत है।’
नयी किताब ‘एन अनसर्टेन ग्लोरी : इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन्स’ के विमोचन के अवसर पर सेन ने कहा ‘हम मानते हैं कि भारत अभी एक अत्यंत कठिन स्थिति में है और उपलब्धि की चमक शायद इस स्थिति को पीछे छोड़ दे।’
पेंगुइन द्वारा प्रकाशित इस किताब में तर्क दिया गया है कि सरकार को स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी भूमिका


निभानी होगी।
सेन ने कहा ,‘शिक्षित और स्वस्थ कार्यबल आर्थिक विकास लाता है और इसके लिए हमें मूलभूत बदलाव की जरूरत है।’
उन्होंने यह भी बताया कि भारत का सब्सिडी ढांचा किस तरह पक्षपातपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर देखें तो, भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद का दो फीसदी अपेक्षाकृत विशेषाधिकार प्राप्त लोगों पर खर्च किया जाता है जबकि एक तिहाई भारतीय घरों में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं।
सेन ने कहा ‘मूल रूप से हमारी अर्थव्यवस्था सब्सिडी के इर्दगिर्द घूमती है और इसे बदलना होगा।’
उन्होंने कहा कि उनकी किताब सरकार की नीतियों की आलोचक नहीं है बल्कि यह सफलता की कहानियां और देश की असफलता के बारे में बताती है।
(भाषा)

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