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1984 दंगा: उच्च न्यायालय से सज्जन सिंह को राहत नहीं PDF Print E-mail
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Tuesday, 16 July 2013 12:54

नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1984 सिख विरोधी दंगों से संबंधित मामले में कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार तथा दो अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोग निर्धारण को चुनौती देने वाली याचिका आज खारिज कर दी।

इन सभी के खिलाफ निचली अदालत ने सिख विरोधी दंगों के दौरान सुलतानपुरी इलाके में छह व्यक्तियों की हत्या करने और दंगा फैलाने करने के आरोप में अभियोग निर्धारित किये थे।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने इन आरोपों को निरस्त करने से इंकार कर दिया। साथ ही न्यायालय ने शिकायतकर्ता और एक दंगा पीड़ित शीला कौर का वह अनुरोध भी ठुकरा दिया जिसमें सज्जन कुमार तथा चार अन्य के खिलाफ इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र का एक अतिरिक्त आरोप लगाने की मांग की गयी थी।
न्यायमूर्ति कैत ने कहा ‘सभी :याचिकायें: खारिज की जाती हैं।’इस फैसले के साथ ही सुलतानपुरी मामले में सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों पर अब निचली अदलात में मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो जायेगी।
सज्जन कुमार के अलावा, सह आरोपी वेद प्रकाश पियाल उर्फ वेदु प्रधान और ब्रह्मानंद गुप्ता ने भी अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
जुलाई 2010 में निचली अदालत ने सज्जन कुमार, ब्रह्मानंद गुप्ता, पेरू, कुशल सिंह और वेद प्रकाश के खिलाफ दंगों


के दौरान 6 व्यक्तियों को मार डालने के मामले में अभियोग निर्धारित किये थे। ये दंगे 31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे।
हत्या और दंगा फैलाने के अलावा निचली अदालत ने इन लोगों पर दो समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के आरोप भी तय किए थे।
वर्ष 2005 में यह मामला न्यायमूर्ति जी टी नानावती आयोग की सिफारिश पर दर्ज किया गया था। सज्जन कुमार तथा अन्य के खिलाफ सीबीआई ने जनवरी 2010 में दो आरोपपत्र दाखिल किए थे।
न्यायमूर्ति जी टी नानावती आयोग उन घटनाक्रम की जांच कर रहा था जिनके चलते हिंसा हुई थी।
निचली अदालत ने हाल ही में सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी एक अन्य दंगा मामले में बरी कर दिया था।
बहरहाल, पांच अन्य आरोपियों को हत्या तथा दिल्ली छावनी में पांच सिखों को मार डालने वाली भीड़ का हिस्सा होने सहित अन्य अपराध का दोषी ठहराया गया था। (भाषा)

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