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मुक्केबाजी नहीं क्रिकेट है जितेंद्र का पहला प्यार PDF Print E-mail
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Monday, 15 July 2013 10:55

नई दिल्ली। वह मुक्केबाजी में भारत को ओलंपिक में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं लेकिन जितेंद्र कुमार जब यहां एक क्रिकेट टूर्नामेंट में मुख्य अतिथि के रू प में पहुंचे तो अपने ‘पहले प्यार’ के लिए उनका दिल हिलोरें मारने लगा और फिर उन्होंने बल्ला थामने में देर नहीं लगाई।
बेजिंग ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले जितेंद्र यहां मातृस्वर टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में मुख्य अतिथि के रू प में पहुंचे थे। उन्होंने आयोजकों से क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई और फिर पैड पहनकर बल्ला थाम दिया। पहले स्क्वायर लेग पर एक रन लिया फिर मिड विकेट पर चौका जमाया और कवर पर खूबसूरत शाट खेल कर जता दिया कि अगर वे मुक्केबाज नहीं होते तो क्रिकेटर होते।
जितेंद्र ने कहा कि मैं बचपन से ही क्रिकेट खेला करता था और अपनी टीम का सलामी बल्लेबाज था। क्रिकेट मेरा पहला प्यार था। मैं सुबह लेकर क्रिकेट खेलने चला जाता था। मुक्केबाजी तो मैंने काफी बाद में अखिल भाई (अखिल कुमार) के कहने पर अपनायी। आज भी क्रिकेट मैचों का पूरा लुत्फ उठाता हूं।
मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक विजेता जितेंद्र की निगाहें हालांकि 2016 में रियो डि जनेरियो में होने वाले ओलंपिक पर टिकी हैं और वे एआइबीए की पेशेवर मुक्केबाजी के जरिये फिर से अंतरराष्ट्रीय


स्तर पर अपना जलवा बिखेरने के लिये तैयार हैं।     हरियाणा पुलिस में डीएसपी पद पर कार्यरत फ्लाईवेट मुक्केबाज जितेंद्र ने कहा कि मैं पुलिस की अनिवार्य ट्रेनिंग के कारण पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेल पाया हूं लेकिन अगले साल के लिये मेरी योजना अधिक से अधिक टूर्नामेंट में भाग लेने की है। उसी के बाद मैं रियो ओलंपिक के बारे में सोचूंगा।
उन्होंने कहा कि अभी विश्व चैंपियनशिप के बाद पेशेवर मुक्केबाजी होगी जिसके लिए मुझे आमंत्रण मिला है। मैं इसके जरिए फिर से रिंग में उतरने की कोशिश करू ंगा। यह चैंपियनशिप होगी या नहीं इसको लेकर अभी असमंजस बनी हुई है लेकिन अगर इसका आयोजन नहीं होता है तो मैं विश्व मुक्केबाजी सिरीज में भी हिस्सा लेने की भी योजना बना रहा हूं।
अर्जुन पुरस्कार विजेता जितेंद्र ने कहा कि मैं अभी नियमित तौर पर अभ्यास कर रहा हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि इस साल के आखिर या फिर अगले साल के शुरू  तक मैं अपनी लय में लौट आऊंगा। अगर सब कुछ सही रहा तो मैं एशियाड और राष्ट्रमंडल खेलों की टीमों में भी जगह बनाने की कोशिश करूंगा।

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