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कांग्रेस छिप जाती है धर्मनिरपेक्षता के ‘बुर्के’ में: नरेन्द्र मोदी PDF Print E-mail
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Monday, 15 July 2013 09:30

पुणे। भाजपा में अपनी प्रोन्नति के बाद चुनावी मूड में आते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था में गिरावट, रुपए के अवमूल्यन को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर रविवार को करारा हमला किया। कांग्रेस पर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए धर्मनिरपेक्षता के बुर्के के पीछे छिपने का आरोप लगाया। गुजरात के मुख्यमंत्री ने गरीबी हटाने के अपने वादे पर नाकाम रहने पर व गरीबों को खाद्य सुरक्षा कानून वाला महज एक कागज का टुकड़ा सौंपने को लेकर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। यहां एक जनसभा में मोदी ने यह कहते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा कि सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्रियों में शुमार होने के बाद भी वे विनाश के मार्ग पर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा-रुपए का अवमूल्यन हो रहा है क्योंकि जो लोग दिल्ली में बैठे हैं वे रुपए लूटने और खाने में व्यस्त हैं। कांग्रेस एक ऐसी धारा है जहां श्रेष्ठ अर्थशास्त्री भी विनाश के पथ पर चलने लगता है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस इस बात पर जोर देकर अपना यह नाटक कर रही है कि इस समय लोग गरीबी या भ्रष्टाचार या महंगाई की बात नहीं करें क्योंकि धर्मनिरपेक्षता खतरे में है। कांग्रेस ने ऐसा दशकों तक किया है। सरकार ने सौ दिनों के अंदर महंगाई नीचे लाने का वादा किया था लेकिन दाम बढ़ते ही गए।
उन्होंने कहा-लेकिन एक बार भी किसी कांग्रेस नेता या कांग्रेस अध्यक्ष या प्रधानंत्री ने यह नहीं कहा कि हम महंगाई नीचे लाने का प्रयास कर रहे हैं, कि हम सफल नहीं हुए लेकिन इस दिशा में काम कर रहे हैं? वर्तमान शासन नीतिगत पंगुता का शिकार है जिससे सभी मोर्चों पर उसकी विफलता परिलक्षित होती है। देश में बिजली संयंत्र बंद कर दिए गए क्योंकि कोयले की आपूर्ति नहीं है। प्रधानमंत्री फाइल लेकर बैठे हैं और कोई फैसला नहीं किया जा रहा। देश अंधेरे में है। मोदी ने कहा कि विदेशों में छिपाकर रखे गए काले धन को वापस लाने में सरकार की निष्क्रियता से यह संदेह पैदा होता है कि वह कुछ लोग और उनके धन को बचाने की कोशिश में है।
मोदी ने 80 साल के सिंह का जिक्र करते हुए कहा-जब देश आजाद हुआ था तब रुपए डालर के बराबर था। अब रुपए का अवमूल्यन हो रहा है और ऐसा लगता है कि मानो यह प्रधानमंत्री की उम्र तक पहुंच जाएगा। हाल के दिनों में रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और एक डालर 61 रुपए के बराबर हो गया। उन्होंने कहा कि जब तक हम कांग्रेस मुक्त भारत का निर्माण नहीं करते, देश समस्याओं से मुक्त नहीं होगा। वैश्विक मंदी के बाद भी पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की मुद्राओं का अवमूल्यन नहीं हुआ।
खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लाने की हड़बड़ी पर सरकार पर हमला करते हुए मोदी ने कहा-लोगों को दो जून की रोटी भी नहीं मिलती है। ऐसे में उसने एक कानून लाया और लोगों के हाथों में एक कागज का टुकड़ा थमा दिया कि उन्हें भोजन अधिकार के रूप में मिलेगा जबकि उन्होंने इस बात पर तनिक भी विचार नहीं किया कि गरीबों को भोजन देना संभव है या नहीं। कांग्रेस खाद्य विधेयक पर ऐसे दावा कर रही मानो भोजन लोगों की थालियों में पहले ही पहुंच गया हो। बेशर्म कांग्रेस पार्टी पिछले 35 साल में किए गरीबी हटाओ वादे से मुकर गई। उन्होंने नारा दिया और गरीबों ने इस आस में उसके पक्ष में मतदान किया कि उनके दिन भी बहुरेंगे। कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता के नाम पर लोगों की


आकांक्षाओं को कुचल नहीं सकती।
मोदी ने रुपए के अवमूल्यन, महंगाई और बुनियादी ढांचा विकास जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई वाली राजग सरकार की उपलब्धियों और यूपीए की उपलब्धियों पर बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा-यह सरकार इतनी अहंकारी है कि यह लोगों के समक्ष सिर झुकाकर नहीं कह सकती कि वह मुद्रास्फीति पर काबू नहीं पा सकती। निर्वाचित सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह क्यों नहीं है?
मोदी ने केंद्र पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को घेरने के लिए सीबीआइ के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। मोदी ने कहा-यह पुणे ही था जहां से लोकमान्य तिलक ने ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी। उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का मंत्र दिया था। अब आजादी के 60 साल बाद भी सुराज (सुशासन) मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, का नारा पुणे से दिया जाना चाहिए। उन्होंने यहां फर्गुसन कॉलेज में छात्रों व शिक्षकों से कहा-दो देशों ने दो खेलों की मेजबानी की। दक्षिण कोरिया ने ओलंपिक की मेजबानी की जबकि भारत ने राष्ट्रमंडल खेल की मेजबानी की। कोरिया ने ओलंपिक के माध्यम से अपने लिए सम्मान लाया जबकि 120 करोड़ जनता वाले हमारे देश ने दुनिया की नजर में अपना सम्मान खो दिया। एक देश वैश्विक बिरादरी में अपने लिए प्रतिष्ठा पाने के लिए खेल का इस्तेमाल करता है जबकि दूसरा अपने लिए बदनामी लाता है।
गुजरात के मुख्यमंत्री ने 2002 के गुजरात दंगे से निबटने के तौर-तरीकों का बचाव करने व अपने ‘कुत्ते के बच्चे’ व ‘मैं हिंदू राष्ट्रवादी हूं’ संबंधी बयानों को लेकर विरोधियों की आलोचना का जवाब नहीं दिया। बढ़ते साइबर अपराधों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने गुजरात में दुनिया के पहले अपराध विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की।
उन्होंने कहा-अब कांग्रेस कहेगी कि इसमें नया क्या है? आप जरा विचार कीजिए, मैं महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में अपराध विज्ञान में चल रहे पाठ्यक्रम की बात नहीं कर रहा। मैं अपराध विज्ञान विश्वविद्यालय की बात कर रहा हूं जो दुनिया में अपनी तरह का पहला विश्वविद्यालय है। राजीव गांधी का नाम लिए बगैर मोदी ने 21वीं सदी में नए भारत का निर्माण करने संबंधी दिवंगत कांग्रेस प्रधानमंत्री का हवाला दिया। उन्होंने कहा-हमारे कान 21वीं सदी के बारे में सुन-सुनकर पक गए हैं। क्या किसी के पास इस बात का विजन है कि कैसे भारत को 21वीं सदी में ले जाया जाए। उन्होंने यूपीए सरकार में चल रही कूटनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा-मैं चकित हूं कि पड़ोस में भी हमारा कोई दोस्त नहीं बचा। रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा-देश पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर जितना खर्च करता है, उससे कहीं ज्यादा वह रक्षा उपकरणों व हथियारों के आयात पर खर्च करता है। क्या हमारे पास ऐसे इंजीनियर नहीं है जो ऐसे उपकरण तैयार करें। मैं आपको बताता हूं हमारे इंजीनियंरिंग कॉलेजों में रक्षा इंजीनियरिंग नामक विषय ही नहीं है। मोदी ने पश्चिमीकरण किए बगैर भारत को आधुनिक बनाने का आह्वान किया।
अपने भाषण में शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में गुजरात सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए मोदी ने कहा-राष्ट्र निर्माण के लिए मेधा को सींचने की जरूरत है। शिक्षा राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका निभाती है। अगर हम एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं तो हमें अच्छे शिक्षक बनाने होंगे लेकिन अच्छे शिक्षकों का निर्माण अभी प्राथमिकता नहीं है।

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