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टेलिग्राम अलविदा: अब नहीं आएगा खुशी या गम का तार PDF Print E-mail
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Monday, 15 July 2013 09:24

जनसत्ता ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में कई पीढ़ियों तक दूरदराज से अच्छे बुरे संदेश को जल्दी से जल्दी भेजने का मुख्य माध्यम रही 163 साल पुरानी तार सेवा ने रविवार को इतिहास के पन्नों में सिमट गई।

फोटो गैलरी- अंतिम दिन यादगार लम्हे के रूप में भेजे तार

तस्वीरें: इतिहास के पन्नों में समाया तार

राजधानी में ‘तार सेवा’ आखिरी क्षणों को यादगार बनाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने रविवार को कतारों में खड़े होकर अपने प्रियजनों को तार भेजे।
एक समय लाखों लोगों के लिए संदेश पहुंचाने का सबसे तीव्र जरिया तार को रविवार को अंतिम विदाई देने के साथ अंतिम टेलिग्राम को संग्रहालय में रखे जाने का भी वादा किया गया। हाल के वर्षों में इस सेवा को लगभग भुला दिया गया था पर इसके आखिरी दिन राजधानी में टेलीग्राफ सेंटर पर बड़ी संख्या में लोग अपने प्रियजनों को तार के जरिए संदेश देने के इरादे से जमा हुए। इनमें खासकर युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि भी थे।
पेशे से वकील आनंद साथियासीलन ने कहा, ‘यह पहला मौका है जब मैं टेलिग्राम भेज रहा हूं यह संदेश मैंने अपने 96 साल के दादाजी को भेजा है जो त्रिची के समीप एक गांव में रहते हैं।’ रीयल एस्टेट कंपनी में प्रबंधक विकास अरविंद ने कहा कि वे बेरली में रह रहे अपने माता-पिता को बाधाई संदेश भेज रहे हैं। अरविंद ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि वे इसे एक खूबसूरत याद के रू प में संजो कर रखेंगे।’
भारत में तार सेवा सबसे पहले प्रायोगिक तौर पर 1850 में कोलकाता और डायमंड हार्बर के बीच शुरू  की गई थी। शुरू  में इसका उपयोग ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने किया। 1854 में सेवा लोगों के लिए उपलब्ध हुई। उन दिनों यह सूचनाएं भेजने का सबसे अहम जरिया था। देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश हुकूमत की संचार सेवा को बाधित करने के लिए तार लाइन को काटने का तरीका अपना था।
फोन, मोबाइल, एसएमएस और इंटरनेट क्रांति के साथ इस तार सेवा का महत्व खत्म हो गया। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने आय में भारी गिरावट और नुकसान के कारण तार सेवा को बंद करने का निर्णय किया है। बीएसएनएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आरके उपाध्याय ने कहा, ‘तार सेवा के लिए रविवार अंतिम दिन है। सेवा सुबह 8 बजे शुरू  होगी और रात 9 बजे बंद होगी।’
‘तार सेवा’ के आपरेटरों के लिए रविवार का दिन पुरानी यादों के अचनक हरा होने का दिन था। चार दशकों तक सरकारी सेवा में रहने वाले वरिष्ठ तार परिचालक और 1997 में सेवानिवृत्त हो चुके गुलशन राय विज तार के सुनहरे युग के दौरान अपने अनुभव को याद करते हैं। विज ने कहा, ‘तार लड़ाई और दुर्घटना में मौतों की बुरी खबर लाने के लिए कुख्यात था। रविवार को इस खुद इस सेवा की समाप्ति खबर बन रही है। हमने उस दौरान काम


किया जब इसकी काफी मांग थी। नई प्रौद्योगिकी ने पुरानी प्रौद्योगिकी का स्थान लिया लेकिन तार ने हमें दो वक्त की रोटी दी, हमें पहचान दी। इसीलिए अब इस सेवा के खत्म होने की खबर से हम उदास हैं।’
वर्ष 1959 में सरकारी सेवा में आए 73 वर्षीय विज कहते हैं, ‘1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1975-77 में आपातकाल के दौरान संदेश भेजने के लिए उनका काम हमेशा जारी रहता था। उन्होंने अपने काम में कभी भी भावनाओं को हावी नहीं होने दिया। विज ने कहा, ‘1971 में जब भारत-पाकिस्तान का युद्ध  शुरू  हुआ, वह रोहतक में तैनात थे। बिना खाना-पानी के चिंता के वह 24 घंटे काम करते रहे। रक्षा मुख्यालय से युद्ध में मरने वालों के बारे में संदेश आते     बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी ८
थे और हम जितनी जल्दी हो सके उस खबर को गंतव्य तक भेजने में लगे रहते थे।’         
गुलशन राय विज ने कहा, ‘तार परिचालक के रू प में कोई भी बुरी खबर सुन कर भावना में बह नहीं सकता था क्योंकि हमारे पास हजारों संदेश होते थे, जिन्हें हमें समय पर देना होता था। हम जितनी अपनी क्षमता से काम कर सकते थे, हमने किया। हम उस वक्त राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत होकर काम करते थे और इसी से हमें कठिन समय में काम करने की शक्ति मिली।’
केंद्रीय टेलिग्राफ कार्यालय के एक कर्मचारी गजेंद्र नेगी ने कहा, ‘पद के लिए योग्यता केवल प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा पास करनी होती थी। लेकिन परीक्षा और हस्तलिखित परीक्षण में जो तेज दिमाग के होते थे, उन्हें ही इस सेवा के लिए लिया जाता है। सभी तार परिचालकों को ‘डाट और डैस’ के बारे में अच्छी जानकारी होती थी जिसे वर्ष में अनुवाद किया जाता था।’
बीएसएमएल के सीएमडी आरके उपाध्याय ने बताया कि यह सेवा रविवार से बंद हो गई। सोमवार से यह सेवा उपल्बध नहीं होगी। सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने लगातार बढ़ते राजस्व घाटे के कारण टेलीग्राम सेवा को बंद करने का फैसला किया। इस सेवा से सालाना करीब 75 लाख रुपए की आय हो रही थी जबकि इसके संचालन और प्रबंधन का खर्च 100 करोड़ रुपए से अधिक हो रहा था।
देश भर में 75 टेलिग्राम केंद्र हैं, जिनमें कर्मचारियों की संख्या 1,000 से भी कम है। इन कर्मचारियों को बीएसएनएल अपनी सेवा में ले लेगा और उन्हें मोबाइल सेवाओं, लैंड लाइन टेलिफोनी और ब्रॉडबैंड सेवाओं में तैनात किया जाएगा। राजस्व में आ रही कमी की वजह से सरकार ने साठ साल के बाद मई 2011 में टेलिग्राम की दरों की समीक्षा की थी और इनलैंड टेलिग्राम सेवा शुल्क बढ़ा कर 27 रुपए प्रति 50 शब्द कर दिया। टेलिग्राम सेवा की जिम्मेदारी बीएसएनएल के पास 1990 के दशक में आई लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के इस उपक्रम और डाक विभाग के बीच दरार आ गई थी।

 

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