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राघवजी से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई में जुटी भाजपा PDF Print E-mail
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Monday, 15 July 2013 09:14

भोपाल। मध्य प्रदेश में वित्त मंत्री रहते हुए नौकर का कथित यौन शोषण करने के आरोपी राघवजी के कारनामे से भाजपा को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बाद विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के उपनेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को भाजपा में शामिल कराने और बसपा के परसराम मुद्गल को पार्टी में शामिल करने को उसके भरपाई के प्रयासों के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक वीडी मिश्र कहा कि राघवजी ने प्रदेश में भाजपा को इस हद तक शर्मसार कर दिया था कि उससे हुए नुकसान की भरपाई तत्काल जरूरी थी, क्योंकि चार माह बाद ही विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस ने 13वीं विधानसभा के इस आखिरी मानसून सत्र में भाजपा सरकार को घेरने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की थी। राज्य के जिस वित्त मंत्री को विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार के लिए पहला पूरक बजट पेश करना था, वह यौन शोषण के आरोप में नौ जुलाई को गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में चला गया। इससे पहले पांच जुलाई को नौकर राजकुमार दांगी ने राघवजी पर यौन शोषण का आरोप पुलिस थाने में जाकर लगाया। उसी दिन मुख्यमंत्री ने उनसे इस्तीफा मांग लिया। इसके बाद सात जुलाई को पुलिस में एफआइआर दर्ज होने पर भाजपा ने उन्हें पार्टी से भी बर्खास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए यह राजनीतिक नुकसान इतना गहरा था कि उससे उबरना बड़ा मुश्किल नजर आ रहा था। इसके अलावा राघवजी के दुष्कृत्य की वीडियो क्लिप भी विभिन्न इलेक्ट्रानिक माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंच रही थी। लोग उनके इस कृत्य को लेकर भाजपा को कोस रहे थे।
विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन 11 जुलाई को जब कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू  होने वाली थी और अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने विपक्ष के नेता अजय सिंह राहुल का नाम पुकार लिया था, तब विपक्ष के उपनेता चतुर्वेदी ने अविश्वास प्रस्ताव का विरोध कर सबको चौंका दिया। इतना ही नहीं, हंगामे की वजह से जब मानसून सत्र की कार्यवाही निर्धारित तिथि से आठ दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई तो चतुर्वेदी आनन-फानन में मुख्यमंत्री चौहान के साथ प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचे और पार्टी में शामिल हो गए। हालांकि बाद में तकनीकी कारणों से उन्होंने घोषणा कर दी कि उन्होंने अभी भाजपा की सदस्यता नहीं ली है। मिश्र ने कहा कि चतुर्वेदी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि इससे दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी विधानसभा की सदस्यता खतरे में पड़ सकती


थी। 
राघवजी की वजह से हुए नुकसान की भरपाई की इस कवायद के तहत भाजपा ने चतुर्वेदी प्रकरण के अगले ही दिन बसपा के मुरैना से विधायक परसराम मुद्गल को पार्टी में शामिल कराया। इससे भाजपा ने यह जताने की कोशिश की कि राघवजी प्रकरण के बावजूद उसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है। 
एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक आरएस विश्वास का कहना है कि चतुर्वेदी को कांग्रेस से तोड़ने का श्रेय भले ही भाजपा ले रही है। लेकिन एकता का दम भरने वाली कांग्रेस में ठाकुर बनाम ब्राह्मण नेताओं की आपसी भिड़ंत के चलते ही चतुर्वेदी का कांग्रेस से मोहभंग हुआ। चतुर्वेदी ने विधानसभा में कांग्रेस पर उंगली उठाते हुए कांग्रेस महासचिव और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर निशाना साध कर इसका पर्दाफाश भी किया।
राघवजी प्रकरण पर दिग्विजय के ट्विट को चतुर्वेदी ने हिंदुओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि सुरेश पचौरी के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद प्रदेश की कमान भले ही आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया के हाथ में है। लेकिन प्रदेश में पार्टी के सारे सूत्र दिग्विजय सिंह के हाथ में ही हैं। विश्वास का कहना है कि राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी अजय सिंह को सौंपी गई, जो कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह के बेटे हैं। हालांकि विधानसभा के भीतर अपने प्रदर्शन के आधार पर चतुर्वेदी खुद को इस पद का प्रबल दावेदार मानते थे। अजय को विपक्ष का नेता बनाए जाने को ठाकुर लाबी से जोड़कर देखा जा रहा था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण नेतृत्व के नाम पर चतुर्वेदी खुद को अलग-थलग पा रहे थे। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में अध्यक्ष के आसन के प्रति उनके असम्मानजनक व्यवहार की वजह से उनकी सदस्यता समाप्त होने और बहाली के मौके पर भी कांग्रेस की ठाकुर लॉबी से उन्हें उपेक्षा ही हाथ लगी थी। विश्वास का कहना है कि चतुर्वेदी जिन संसदीय मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्र के सहारे भाजपा में गए वह भी उनकी ही जाति के हैं। उन्होंने कहा कि ठाकुर बनाम ब्राह्मण की लड़ाई में भिंड के जातिगत समीकरण भी काम आए। भिंड और मुरैना में भाजपा के पास ठाकुर नेता तो हैं। लेकिन दमदार ब्राह्मण नेता की कमी उसे खटक रही थी। कहा जा रहा है कि कांग्रेस से चतुर्वेदी और बसपा से मुद्गल के रूप में भाजपा इस कमी को दूर कर रही है।

 

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