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खराब मौसम के कारण केदारनाथ में मलबा हटाने का काम रुका PDF Print E-mail
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Monday, 15 July 2013 09:03

देहरादून/नई दिल्ली। खराब मौसम की वजह से रविवार को केदारनाथ में मलबा हटाने का काम और रामबाड़ा से हिमालयी तीर्थ तक एक रास्ता बनाने का काम बाधित हो गया, लेकिन रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। केदारनाथ से मलबा हटाने और रामबाड़ा से वहां तक रास्ता बनाने का काम 61 सदस्यीय दल कर रहा है।
इसी बीच, केदारनाथ में हैलीपैड और तीर्थ स्थल तक एक नहर के ऊपर अस्थायी पुल बनाने के लिए एक दल वहां भेजा गया है। रुद्रप्रयाग के पुलिस अधीक्षक वीजे सिंह ने बताया, खराब मौसम के कारण केदारनाथ से मलबा हटाने का काम बाधित हो गया है। रामबाड़ा से केदारनाथ तक पैदल रास्ता बनाने का काम भी रोक दिया गया है।
उन्होंने कहा, केदार घाटी में बारिश रुक रुक कर हो रही है। लेकिन मौसम ठीक होते ही प्रभावित गांवों में राहत सामग्री भेज दी गई है। एक अन्य आधिकारिक बयान में बताया गया है कि 983 क्विंटल खाद्यान्न और एलपीजी के 288 सिलिंडर रुद्रप्रयाग जिले के प्रभावित गांवों के लोगों को मुहैया कराए गए हैं।
बहरहाल, क्षतिग्रस्त सड़क नेटवर्क यथावत है और मलबा नहीं हटाया गया है। उस पर बारिश के कारण राहत अभियानों में बाधा आ रही है। अधिकारियों ने बताया कि कम दृश्यता के कारण राहत अभियानों पर असर पड़ा है जबकि क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
रुद्रप्रयाग में गोपेश्वर-चोपटा मार्ग कई जगहों पर अवरुद्ध है। ऋषिकेष-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग केवल अगस्त्यमुनि तक ही खुला है। चमोली जिले में ऋषिकेष-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग मलबे के कारण कामेदा, पातालगंगा और पागलनाला में बंद पड़ा है। अधिकारियों ने बताया कि कुदरती बाधाओं के बावजूद जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों में 35 क्विंटल खाद्यान्न और 230 लीटर केरोसिन और डीजल भेजा गया है। उत्तरकाशी जिले के 146 गांवों में 6120 क्विंटल खाद्यान्न भेजा गया है।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि प्रभावित इलाकों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। उन्होंने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि इस सिलसिले में 21 जुलाई को देहरादून में भूगर्भ विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों की एक बैठक होगी जहां बाढ़ प्रभावित इलाकों के पुनर्विकास के लिए पर्यावरण के अनुकूल तरीके से रूपरेखा बनाई जाएगी।
इस बीच, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट ने राज्य सरकार से एक एक निगरानी समिति गठित करने की मांग की है जिसमें विपक्ष के नेताओं और स्थानीय लोगों को शामिल किया जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रभावित लोगों को राहत पहुंच रही है। भट्ट ने नेपाल की सीमा के पास पिथौरागढ़ से लगे बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
उन्होंने पिथौरागढ़ में संवाददाताओं से कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों, विपक्षी नेताओं और प्रमुख स्थानीय लोगों की एक समिति बनाए जाए


ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राहत प्रभावित लोगों तक पहुंच रही है। भट्ट ने यह भी मांग की कि बीआरओ को पर्याप्त राशि और आवश्यक उपकरण दिए जाएं ताकि वह राज्य में सड़कों के क्षतिग्रस्त हुए व्यापक नेटवर्क की मरम्मत कर सके। इस बीच केदारनाथ में पूजा शुरू  होने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे क्योंकि खराब मौसम के कारण मंदिर समिति के वे कर्मचारी अभी तक गुप्तकाशी में ही डेरा डाले हुए हैं जिन्हें मंदिर में सफाई करनी है। जून के आखिरी सप्ताह में केदारनाथ मंदिर समिति के दस सदस्यीय दल को सफाई के लिए रवाना होना था। सफाई के बाद ही पुजारियों से मंदिर का शुद्धिकरण होगा जिसके बाद विधिवत पूजा आरंभ हो सकेगी।
कार्यकारी अधिकारी अनिल शर्मा की अगुवाई में मंदिर समिति के 15 लोग तभी से गुप्तकाशी में डेरा डाले हुए हैं। शर्मा ने गुप्तकाशी से बताया, मौसम खराब होने के कारण हम केदारनाथ नहीं पहुंच पाए हैं। कोहरे के कारण हेलिकॉप्टर भी नहीं जा पा रहे।
उन्होंने कहा, सेना ने सोनप्रयाग होकर नया रास्ता तलाशा है लेकिन वहां से आवागमन शुरू  नहीं हुआ है। फिलहाल केदारनाथ में पीडब्ल्यूडी, एनडीआरएफ के अलावा सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं। मंदिर समिति का कोई कर्मचारी वहां नहीं है। शर्मा ने कहा, एक बार केदारनाथ पहुंचने पर सफाई का काम एक सप्ताह में पूरा हो जाएगा। वहां से शव हटाए जा चुके हैं लेकिन मलबा पूरी तरह नहीं हटा है। अगर कोई पैदल रास्ता बनता है तो हम वहां तक पैदल जाने को भी तैयार हैं। इस बीच ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारी गंगाधर आचार्य ने बताया कि सफाई और शुद्धिकरण के बाद पूजा केदारनाथ में ही होगी, नेपाल या कहीं और नहीं जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है।
पिछले दिनों मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि केदारनाथ की विधिवत पूजा नेपाल के भक्तापुर स्थित डोलेश्वर महादेव मंदिर में होगी। गंगाधर ने रुद्रप्रयाग स्थित ऊखीमठ से बातचीत में कहा, ये सब खबरें बेबुनियाद हैं। सफाई और शुद्धिकरण के बाद केदारनाथ में ही पूजा होगी। नेपाल में जो पूजा हुई, वह केदारनाथ में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए थी।

फिलहाल केदारनाथ मंदिर से ऊखीमठ लाई गई भगवान शंकर, गणेश, पार्वती, भैरव, शालिग्राम की मूर्तियों की पूजा हो रही है। केदारनाथ में शिवलिंग और नंदी स्थिर हैं और मंदिर परिसर की सफाई के बाद वहां उनकी पूजा होगी। मंदिर में बेशकीमती मूर्तियों और भगवान के जवाहरात की सुरक्षा के बारे में पूछने पर शर्मा ने बताया कि मंदिर समिति ने सरकार से सुरक्षा का अनुरोध किया था और सुरक्षाबलों को यह जिम्मेदारी दी गई है।(भाषा)

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