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लखन भइया फर्जी मुठभेड़ कांड में 21 लोगों को उम्रकैद की सजा PDF Print E-mail
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Friday, 12 July 2013 17:44

मुंबई। माफिया सरगना छोटा राजन का सहयोगी माने जाने वाले राम नारायण गुप्ता उर्फ लखन भइया के फर्जी मुठभेड़ मामले में महानगर की एक अदालत ने 13 पुलिस अधिकारियों समेत सभी 21 आरोपियों को आज उम्रकैद की सजा सुनाई।
मुठभेड़ करने वाले पुलिस दल के मुखिया तथा पूर्व वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप सूर्यवंशी, तानाजी देसाई और दिलीप पलांदे उन 21 आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें सत्र अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
सूर्यवंशी, देसाई और पलांदे को इस मामले में हत्या के लिए दोषी ठहराया गया जबकि  ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के नाम से चर्चित पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। शर्मा के मामले में अभियोजक मामला साबित नहीं कर सका।
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के 110 से ज्यादा गवाह और बचाव पक्ष के दो गवाह पेश हुए।
अभियोजन पक्ष ने सोमवार को सूर्यवंशी समेत सभी पुलिसकर्मियों को इस आधार पर सजाए मौत सुनाने का आग्रह किया था कि उन्होंने हत्या में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उसने दो गैर-पुलिस कर्मियों - शैलेंद्र पाण्डेय और अखिल खान के लिये भी सजाए मौत का आग्रह किया था।
बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि दोषसिद्धी महज परिस्थितिगत सबूतों पर आधारित है। ऐसे में सजाए मौत से परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही आरोपियों के परिवारों पर भी ध्यान देना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि 11 नवंबर 2006 में पुलिस के एक दल ने गुप्ता उर्फ लखन भइया और उसके साथी अनिल भेड़ा को इस संदेह में वाशी से पकड़ा था कि लखन छोटा राजन गिरोह का सदस्य है। पुलिस ने उसी शाम वर्सोवा के नाना नानी पार्क के निकट ‘‘फर्जी’’ मुठभेड़ में मार दिया।
अभियोजन पक्ष के


अनुसार भेड़ा को पहले वर्सोवा के डीएन नगर पुलिस थाने में बंद रखा गया। बाद में उसे कोल्हापुर स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में उसे मुंबई लाया गया और एक महीने तक हिरासत में रखा गया।
मुठभेड़ के तुरंत बाद राम नारायण के भाई ऐडवोकेट रामप्रसाद गुप्ता ने बंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ की है।
उच्च न्यायालय ने फरवरी 2008 में मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया। जांच में यह निष्कर्ष आया कि यह सोची समझी हत्या थी।
उच्च न्यायालय ने 2009 के सितंबर में एक विशेष जांच दल :एसआईटी: का गठन किया।
एसआईटी ने फर्जी मुठभेड़ में संलिप्तता के लिए आठ जनवरी 2010 को प्रदीप शर्मा के साथ 21 अन्य को गिरफ्तार किया।
एसआईटी की जांच के अनुसार गुप्ता की हत्या नवी मुंबई आधारित एक बिल्डर जनार्दन बांगे उर्फ जान्या सेठ के इशारे पर किया गया जिसने गुप्ता की हत्या के लिए शर्मा से संपर्क किया था।
इस बीच, 12 मार्च 2011 को इस मामले के इकलौते चश्मदीद गवाह भेड़ा नवी मुंबई स्थित अपने घर से लापता हो गया। वह संभवत: 18 मार्च को अदालत के समक्ष पेश होने वाला था।
भेड़ा की पत्नी ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसके पति का अपहरण कर लिया गया है और उसकी हत्या की जा सकती है।
दो माह बाद, जून में नवी मुंबई पुलिस ने एक क्षत विक्षत शव बरामद किया। डीएनए परीक्षण में यह पुष्टि हो गई कि शव भेड़ा का था।
(भाषा)

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