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भुर्जी से लेकर कुर्मी सम्मेलन करने वालों के निशाने पर मायावती PDF Print E-mail
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Friday, 12 July 2013 09:31

अंबरीश कुमार, लखनऊ। जातीय सम्मेलनों और रैलियों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद एक तरफ जहां विपक्ष सत्तारूढ़ दल से टकरा रहा है वहीं विपक्ष दूसरे दलों से भी टकरा रहा है। सबके निशाने पर मायावती हैं जिन्होंने बुधवार को ही पार्टी के नेताओं को ब्राह्मण बिरादरी के बीच जाने को कहा था और रविवार को ब्राह्मण भाईचारा सम्मेलन किया था।
मायावती की यही कवायद अब विपक्ष के लिए नया हथियार बन गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह ने तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि एक बार के बाद वे किसी ऐसे सम्मलेन में नहीं गए और वे जातीय राजनीति के पक्ष में नहीं हंै। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि बसपा और सपा जातीय राजनीति से लोगों को बांटना चाहती हैं। इस बीच बसपा के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी तो जातियों को जोड़ रही है तोड़ नहीं रही। दलित तो सदियों से शोषण का शिकार रहे हैं और वे अब बड़ी जातियों को साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं तो इसका विरोध क्यों।
उत्तर प्रदेश में सभी दलों ने अलग-अलग जातियों के सम्मलेन कराए और उनके समाज को साथ लाने के लिए हर हथकंडे भी अपनाए। लेकिन अब सभी के निशाने पर सिर्फ मायावती हैं। प्रदेश की राजधानी में भुर्जी सम्मलेन से लेकर कुर्मी सम्मलेन तक होते रहे हैं। भाजपा कुशवाहा समाज के लिए ही बाबू सिंह कुशवाहा को साथ लेती है तो मुलायम सिंह यादव पिछड़ों का बड़ा वोट बैंक बनाने के लिए कल्याण सिंह का साथ ले चुके हैं। कांग्रेस तो कुर्मी वोट बैंक के नाम पर ही बेनी बाबू को ढो रही है। इसलिए इसे लेकर सिर्फ मायावती को कोसना समझ से बाहर है। हालांकि आज सभी दल जाति निरपेक्ष बन गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डाक्टर लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने हाई कोर्ट के आदेश पर कहा कि यह फैसला जाति के आधार पर राजनीति करने वाले दलों के मुंह पर तमाचा है। उन्होंने कहा कि विकास व भ्रष्टाचार और खराब कानून व्यवस्था से जनता का ध्यान हटाने के


लिए कांग्रेस की सहयोगी सपा-बसपा जैसे दल समाज को जाति के आधार पर बांटना चाहते हैं। मुद्दों के अभाव में जातिगत सम्मेलनों के आधार पर चुनाव में जाना चाहते हैं। इस फैसले ने जातिवादी दलों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने बसपा पर निशाना साधते हुए पूछा कि तिलक, तराजू और तलवार का नारा देने वाली बसपा किस मुंह से ब्राह्मण सम्मेलन करवा रही है।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि बसपा अध्यक्ष का यह नया सर्वजन प्रेम अवसरवादिता की हद है। जिस तरह का जातीय उन्माद राज्य में फैलाया जा रहा है, वह संविधान की मूलभावना के प्रतिकूल आचरण है। समाजवादी पार्टी जाति विहीन समाज व्यवस्था की पक्षधर है। डाक्टर लोहिया, चौधरी चरण सिंह और मुलायम सिंह यादव कभी जाति की राजनीति के पक्ष में नहीं रहे। बसपा जातीयता का नंगा नाच करा रही है, निर्वाचन आयोग को इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। कल तक मनुवाद को कोसने वाली बसपा अध्यक्ष को अचानक ब्राह्मणों के प्रति प्रेम उमड़ पड़ा है। सत्ता के लिए बसपा नेता ने अपने दल के सिद्धांत, विचार और कार्यक्रम सभी को तिलांजलि दे दी है। कांशीराम ने दलितों के हाथ में सत्ता की चाबी सौंपने के लिए संघर्ष किया था जबकि मायावती ने सत्ता की चाबी दलितों से छीनकर ब्राह्मणों को सौंप दी थी। 
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से संविधान व लोकतंत्र की मूल भावना मजबूत होगी व समाज में एकजुटता और समरसता आएगी। संविधान में प्रदत्त सभी जाति व वर्ग के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सकेगी। सामाजिक व आर्थिक आधार पर वंचितों व पिछड़ों को समान रूप से विकास व उत्थान के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। प्रवक्ता ने कहा कि वोट की खातिर कुछ राजनीतिक दल जातिगत राजनीति करके समाज को बांटने का कार्य कर रहे थे, ऐसे जातिगत आधार पर राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों को फैसले से करारा झटका लगेगा।

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