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विस्फोट मामले में आरोपियों को पेश नहीं किए जाने से अदालत नाखुश PDF Print E-mail
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Friday, 05 July 2013 10:06

नई दिल्ली, जनसत्ता। 2008 के दिल्ली शृंखलाबद्ध विस्फोटों के कथित आतंकवादी आरोपियों को अमदाबाद जेल से लाकर यहां पेश नहीं किए जाने से नाखुश एक अदालत ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि गुजरात सरकार के उस आदेश को वापस लेने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए जिसके चलते आरोपियों को राज्य के बाहर नहीं ले जाया जा सकता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र कुमार ने कहा कि अभियोजन जब इस तथ्य से अवगत है कि गुजरात सरकार ने राज्य के बाहर विचाराधीन कैदियों को पेश नहीं करने के बारे में पहले से ही आदेश जारी कर दिया है, तो उसे आदेश को वापस करवाने के लिए कदम उठाने चाहिए थे। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस संबंध में उसने कोई कदम नहीं उठाए हैं।
अदालत का यह आदेश आने से पहले उसे अमदाबाद जेल से एक फैक्स संदेश मिला था। इसमें कहा गया था कि छह आरोपियों को पेश नहीं किया गया क्योंकि राज्य के गृह विभाग के 27 अक्तूबर 2009 के आदेश को वापस नहीं लिया गया है। इसमें कहा गया कि आरोपियों को राज्य के बाहर नहीं ले जाया जा सकता है।
इसके अलावा नवी मुंबई के तालुजा जेल में बंद पांच आरोपियों को भी अदालत में पेश नहीं किया जा सका जबकि इसके लिए कई बार पेशी वारंट जारी किए जा चुके हैं। सातों आरोपियों के वकील एमएस खान ने कहा कि उसके मुवक्किलों को पेश नहीं किए जाने के कारण वह सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे। खान ने कहा कि पहले एक रिट याचिका में गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि जब भी आवश्यक होगा व किसी विशेष अदालत की ओर से समुचित वारंट जारी किए जाएंगे तो अदालतों में पेश करने के लिए आरोपी व्यक्तियों को अमदाबाद से बाहर भेजा जाएगा। खान आरोपियों जियाउर रहमान, कयामुद्दीन कपाड़िया (दोनों साबरमती जेल में बंद) और मोहम्मद सादिक,


मोहम्मद मंसूर असगर पीरभय, मुबिन कादर शेख, आसिफ बशीरूद्दीन और मोहम्मद अकबर इस्माइल चौधरी (सभी तालुजा जेल में बंद) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
आरोपी आसिफ शेख ने तालुजा जेल से एक अनुरोध भेजा है जिसमें बेलापुर मुख्यालय के पुलिस उपायुक्त द्वारा उसे दिल्ली की अदालत में पेश नहीं किए जाने पर सवाल उठाया है। अदालत ने पुलिस उपायुक्त से कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख तक अपना जवाब दे अन्यथा कानून अपना काम करेगा। इन आरोपियों के अलावा मोहम्मद शकील, जीशान अहमद, मोहम्मद सैफ और साकिब निसार भी तालुजा जेल में बंद हैं। दो अन्य आरोपी मोहम्मद हाकिम व शहजाद तिहाड़ जेल में बंद हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोनों जेलों के अधीक्षकों से आरोपियों को पेश नहीं करने के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा जिसके चलते इन मामलों में असुविधा हो रही है और अनावश्यक रूप से सुनवाई स्थगित करनी पड़ रही है।
अदालत ने उन आरोपी व्यक्तियों के लिए 31 जुलाई का पेशी वारंट जारी किया जिन्हें अभी तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया है। पिछले साल अक्तूबर में एक आॅटो रिक्शा चालक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आतंकवादी की पहचान करने में विफल रहा था और कहा था कि वह उसे व्यक्तिगत रूप से देखना चाहेगा। इस आॅटो रिक्शा चालक की सेवाएं साबरमती जेल में बंद आरोपियों में से एक ने ली थी। इसके बाद अदालत ने आरोपियों के लिए पेशी वारंट जारी किया ताकि उनकी व्यक्तिगत रूप से पहचान की जा सके। राजधानी के करोलबाग, कनाट प्लेस, ग्रेटर कैलाश और इंडिया गेट पर 13 सितंबर 2008 को हुए सिलसिलेवार धमाकों में सभी 13 आरोपी कथित रूप से शामिल थे। इन धमाकों में 26 लोग मारे गए और 133 घायल हो गए थे।

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