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आरामदेह सफर की चाहत में पाला दुश्वारियों से PDF Print E-mail
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Friday, 05 July 2013 10:02

प्रतिभा शुक्ल, नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क बढ़ने के साथ यात्रियों की मुसीबतें भी बढ़ती जा रही हैं। कहीं स्केलेटर (बिजली से चलने वाली सीढ़ी) है ही नहीं तो कहीं है तो पर चलती नहीं। सामान से लदे-फदे यात्रियों को दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचने के लिए बिना स्केलेटर वाला लंबा रास्ता पार करने में पसीना ही नहीं छूट जाता चक्कर तक आ जाता है। दो तीन तल नीचे से सामान लेकर जाने में हालत खराब हो जाती है। तमाम नियम कानूनों व अनुशासन की धज्जियां उड़ाते हुए लोग इसके स्टेशनों के बाहर अवैध कब्जा किए अपना धंधा चला रहे हैं।
केंद्रीय सचिवालय, कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, नई दिल्ली सहित कई ऐसे स्टेशन हैं जहां रोज ही मारपीट तक की नौबत आ जाती है। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर व्यस्ततम समय में जाने से ही घबराहट होती है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) का नेटवर्क बढ़ने के साथ ही यात्रियों की स्ांख्या भी बढ़ गई है लेकिन यात्रियों की सहूलियत को लेकर डीएमआरसी प्रशासन का रवैया लचर बना हुआ है। जहां केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन क ा प्लेटफार्म छोटा होने से आए दिन यहां मार पीट की नौबत आ जाती है वहीं कई लोग धक्कामुक्की में नीचे तक गिर जाते हैं। केंद्रीय सचिवालय स्टेशन, जहांगीरपुरी हुडा सिटी सेंटर लाइन और केंद्रीय सचिवालय बदरपुर लाइन क ा जंक्शन है। इसके यात्री यहां से अपनी ट्रेन बदलते हैं। व्यस्ततम घंटों में यहां ऐसे यात्रियों की तादात काफी ज्यादा होती है।       
यहां के एक ही प्लेटफार्म पर दोनों लाइन की ट्रेन आती है। इस लिहाज से प्लेटफार्म काफी छोटा पड़ता है। लिहाजा यहां सुबह-सुबह ही इतनी भीड़ व धक्का मुक्की हो जाती है कि लोग नीचे तक गिर या घिसट पड़ते हैं। मेट्रो यात्री रवीना ने कहा कि वह यहां लगभग रोज ही किसी न किसी को झगड़ते देखती हैं। वजह बस एक ही कि धक्का क्यों दिया? कई बार एक ट्रेन से उतर कर यात्री दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए सामने तेजी से भागते हैं और उस ट्रेन से निकल रहे यात्री इनसे टकरा कर गिर पड़ते हैं। इस तरह के हालात रोकने के लिए सुरक्षा गार्ड तो तैनात रहते हैं लेकिन वे या तो  बस सीटी बजाते रहते हैं या निरीह से मूक दर्शक बने रह जाते हैं।
इसी स्टेशन पर एक हिस्से में पानी टपकता रहता है। इस हिस्से की मरम्मत का


काम कब होगा मालूम नहीं, कार्रवाई के नाम पर करीब 10 फीट के क्षेत्र क ो बस घेर दिया गया है। बिना बारिश के पानी का टपकना नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर लगातार देखा जा सकता है। एक दो जगह नहीं प्लेटफार्म के ठीक सामने लाइन पर कई जगह। इससे इस लाइन क ी सुरंग की दीवारों पर भारी सीलन भी आ गई है। यह ही नहीं नई दिल्ली पर यात्री सामान लेकर कई चक्कर लगाने के बाद टेÑन तक पहुंच पाते हैं। यहां स्केलेटर तो है पर भारी सामान लेकर उस पर चढ़ना संभव या सुरक्षित नहीं है। यात्री राकेश शर्मा के मुताबिक यहां बड़े लिफ्ट या स्लोब वाला स्केलेटर होना चाहिए। 
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले तमाम यात्रियों को चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पर तो और अधिक मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। यहां एक ही स्केलेटर है वह भी अमूमन बंद ही पड़ा रहता है। यहां पार्किंग के पास वाला गेट बंद कर दिया गया है। रास्ता वन वे कर दिया गया है। यहां के दुकानदार दीपक सूरी का कहना है कि इस स्टेशन पर या तो भारतीय रेल का यात्री आता-जाता है या फि र थोक सामान खरीदने वाले। इन दोनों तरह के यात्रियों के पास भारी वजन वाला समान होता है। जो उन्हें लंबे गलियारे में घसीट कर ले जाना पड़ता है। ऊपर की सीढ़ी के पास आए दिन ऐसे लोग देखने को मिल जाते हैं जिन्हे सामान के साथ यहां तक पहुंचने में चक्कर तक आ जाता है। 
भीड़ के समय एक्झास्ट मानों जवाब दे जाता है। ऊमस व गर्मी का आलम वातानुकूलित सुरंग में भी रहता है। नोएडा सेक्टर 15 सहित तमाम स्टेशन ऐसे हैं जहां आठ नौ बजे रात के बाद स्केलेटर बंद कर दिए जाते हैं। इससे बुजुर्ग और बच्चों को गोद में लेकर जाने वाले यात्रियों को बहुत दिक्कत होती है। यात्री प्रिया क ा सवाल है कि जब मेट्रो सेवा चल रही हो उस वक्त स्केलेटर बंद करने का क्या तुक है? बिजली बचाने के लिए सेंसर का उपयोग किया जा सकता है। कम टिकट काउंटर, फुटकर की दिक्कत, कम एएफसी और इस तरह की कई मुसीबतें हैं जिनसे यात्री रोज ही दो चार होते हैं। पर इसकी सुनने वाला कोई नहीं।

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