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किराया कानून लागू करने की मांग PDF Print E-mail
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Thursday, 04 July 2013 11:41

जनसत्ता संवाददाता, नई दिल्ली। प्रोग्रेसिव पार्टी के अध्यक्ष जगदीश ममगांई ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से 1995 में पारित दिल्ली किराया नियंत्रण कानून को 18 साल तक लटकाने के बाद अब वापस लेने के प्रस्ताव की सख्त शब्दों में आलोचना की है और इसे वर्षों से अपनी संपत्ति वापस पाने के इंतजार कर रहे दिल्ली के संपत्ति मालिकों के लिए नाउम्मीदी व जानलेवा फैसला बताया है। पिछले 29 जून को ही वर्षों से दिल्ली किराया कानून सहित विभिन्न मुद्दों पर संघर्ष कर रही 360 गांवों की दिल्ली ग्राम सुधार महासभा ने जंतर मंतर पर धरना दिया था और सप्ताह भी नहीं बीता की केंद्र सरकार ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। केंद्र सरकार अब और अधिक विलंब किए बिना दिल्ली किराया कानून को लागू करे और यदि इसमें कुछ त्रुटियां रह जाएं तो उसके लिए संशोधन लाया जा सकता है वर्ना अब दिल्ली के संपत्तिधारक शांत नहीं बैठेंगे, इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
ममगांई ने कहा कि 23 अगस्त 1995 को संसद के दोनों सदनों से पारित राष्ट्रपति के हस्ताक्षरयुक्त दिल्ली किराया कानून 1995 को सरकारी गजट में अधिसूचित कर दिया गया था, लेकिन देश के संवैधानिक ढांचे में ऐसा पहली बार हुआ कि कानून बनने के बाद भी इसे राजनैतिक कारणों से लागू


नहीं किया गया। इसमें न केवल संपत्ति मालिक को राहत दी गई थी बल्कि किराएदारों के अधिकारों में भी वृद्धि की गई थी। किराएदार की मौत के बाद भी उसके वारिस को व्यवसायिक संपत्ति पर कब्जा कम से कम तीन साल तक जारी रखने का अधिकार दिया गया था। फिर भी यदि कुछ कमी रह गई हो तो संशोधन के माध्यम से ऐसा प्रावधान किया जा सकता है कि किराया मकान मालिक व किराएदार मिल कर तय करें व तय अवधि पूरी होने के बाद किराएदार के लिए मकान खाली करना अनिवार्य हो। दिल्ली में आवास की कमी को देखते हुए मकान मालिकों को टैक्स में छूट दी जाए, खासकर दिल्ली के गांवों को जिनका कृषि का रोजगार सरकारी अधिग्रहण के कारण समाप्त हो गया है।
उन्होंने कहा कि स्पष्ट किराया नीति के अभाव में कहीं किराएदारों ने दुकानों पर कब्जा कर रखा है, कहीं मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें आती रहती हैं। महीने के एग्रीमेंट का दुरुपयोग किराएदार कर सकते हैं इसीलिए संपत्ति कब्जा होने के डर से कई लोग किराए पर देने में हिचकते हैं और उसे खाली रखना ही पसंद करते हैं।

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