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अखिलेश के मंत्री ने सपा को बताया अपराधियों की पार्टी PDF Print E-mail
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Monday, 01 July 2013 09:15

अनिल बंसल
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार के एक मंत्री को ही लगता है कि सपा गुंडों और अपराधियों की पार्टी है।

शाहिद मंजूर उत्तर प्रदेश सरकार में श्रम राज्यमंत्री हैं। मुलायम सिंह यादव ने उन्हें अगले लोकसभा चुनाव के लिए मेरठ से पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर रखा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी वही पार्टी के उम्मीदवार थे पर भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल से हार गए थे। मेरठ में पिछले हफ्ते समाजवादी पार्टी के दफ्तर में एक बैठक में उन्होंने बेबाकी से कहा कि अगर पार्टी से गुंडों और अपराधियों को बाहर कर दिया जाए तो वे लोकसभा चुनाव जीत जाएंगे।
यह बैठक लोकसभा चुनाव की तैयारी के सिलसिले में दूसरे राज्यमंत्री राम सकल गुर्जर ने बुलाई थी, जिन्हें मुलायम ने मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट का पार्टी पर्यवेक्षक बना रखा है। मंत्री की इस टिप्पणी पर बैठक में हंगामा हो गया। पार्टी की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी और मौजूदा एमएलसी सरोजिनी अग्रवाल और विधायक गुलाम मोहम्मद ने मंत्री की टिप्पणी पर एतराज जताया। उन्होंने मंत्री से सवाल किया कि वे नाम लेकर बताएं कि कौन अपराधी और गुंडा हैं। सरोजिनी के समर्थकों ने उलटे मंत्री को ही लपेटते हुए कहा कि अपराधी और गुंडे तो उन्हीं के साथ हैं, जो आए दिन जमीन पर कब्जा करने, लोगों को डरा-धमका कर उनसे उगाही करने और दूसरे गैरकानूनी धंधों में लिप्त हैं। हंगामे के दौरान नौबत मारपीट तक पहुंच गई। पर्यवेक्षक की भूमिका निभा रहे मंत्री रामसकल गुर्जर ने लीपापोती करने की कोशिश की कि मंत्री का आशय उन अपराधी तत्वों से था जो दूसरे दलों से सपा में घुस आए हैं और पार्टी और उसकी सरकार को बदनाम करना जिनका मकसद है।
लेकिन इस घटना ने समाजवादी पार्टी की अंदरुनी कलह और गुटबाजी को और उजागर कर दिया। अखिलेश सरकार के ही राज्यमंत्री जैसी हैसियत रखने वाले बरेली के तौकीर रजा तो हापुड़ में शनिवार को ज्यादा ही उग्र नजर आए। उन्होंने अपनी ही सरकार पर आरोप लगाया कि वह कानून व्यवस्था को सुधारने में नाकाम है। इसका सबूत सवा साल के राज में 57 सांप्रदायिक दंगे होना है। उन्होंने यह रोना भी रोया कि अखिलेश सरकार में मुसलमानों की सुनवाई नहीं हो रही है।
जहां तक मेरठ की गुटबाजी का सवाल है, इसके तार सपा के सबसे बड़े मुसलिम चेहरे मोहम्मद आजम खान से भी जुड़े हैं, जो हैं तो सूबे के नगर विकास और वक्फ कल्याण मंत्री पर साथ ही अखिलेश ने उन्हें मेरठ का प्रभारी मंत्री भी बना रखा है। वे शाहिद मंजूर को कतई पसंद नहीं करते। शाहिद मंजूर ने दुखी होकर अखिलेश से आजम खान को मेरठ के प्रभारी मंत्री पद से हटवा भी दिया था। पर इसे अपना अपमान समझ आजम खान ने ऐसे उग्र तेवर दिखाए कि 48 घंटे के भीतर ही अखिलेश को अपना फरमान वापस लेना पड़ा।
दरअसल आजम खान विवादों से भले घिरे रहे हों पर वे जिद्दी, ईमानदार और मुलायम के पुराने वफादार सहयोगी हैं। कद के मामले में शाहिद मंजूर उनके मुकाबले कहीं नहीं ठहरते। शाहिद के खिलाफ सपा के मेरठ के दूसरे नेता लामबंद होकर आजम खान से जुड़ गए हैं। इनमें एमएलसी सरोजिनी अग्रवाल और दो विधायक प्रभु दयाल और गुलाम मोहम्मद भी हैं। इन लोगों का आरोप है कि शाहिद मंजूर के इर्द-गिर्द मौकापरस्तों


और दागी छवि वाले लोगों का जमावड़ा है। वे पुराने समाजवादी नेताओं की उपेक्षा करते हैं। प्रशासन को दबाव में लेकर दूसरे गुट के लोगों की किरकिरी कराते हैं। पार्टी का जिला अध्यक्ष भी उन्होंने अपने चहेते जयवीर जाट को बनवा रखा है, जिसने पूर्व मंत्री और मौजूदा दलित विधायक प्रभु दयाल को अपमानित करने की गरज से परिवहन महकमे के एक अधिकारी से प्रभु दयाल के दोस्त की कार से न केवल सपा का झंड़ा और लालबत्ती उतरवा दी बल्कि कार का चालान भी करा दिया। जबकि गरीब विधायक अपने दोस्त की इसी कार से चलते हैं। प्रभु दयाल ने इसकी शिकायत अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव दोनों से की तो चालान करने वाले अधिकारी का तबादला कर दिया गया।
सरोजिनी अग्रवाल के एक समर्थक पूर्व पार्षद नरेश मलिक ने मोहम्मद आजम खान से मिलकर अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई है। नरेश मलिक का गुनाह यही है कि उसने शहर के नंगला तासी-कासमपुर गांव में स्थित वक्फ बोर्ड की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की थी। यह अवैध कब्जा मंत्री शाहिद मंजूर के करीबी ही कर रहे थे। आरोप है कि मंत्री के प्रभाव के चलते प्रशासन ने इस अवैध कब्जे को रोकने की कोई कोशिश नहीं की। मामला आजम खान तक पहुंचा तो उन्होंने जिले के कलेक्टर को हड़काया। उसके बाद ही सहायक सर्वे कमिश्नर वक्फ एसएन पांडेय ने भी जांच के बाद 30 करोड़ रुपए कीमत की वक्फ की जमीन को अवैध कब्जे से बचाने की गुहार लगाई। नतीजतन कंकरखेड़ा थाने की पुलिस ने पांच अप्रैल को धारा 448 व 120 बी के तहत मामला दर्ज किया। चार लोगों को नामजद और दस को रपट में अज्ञात दिखाया गया। इतना ही नहीं बुलडोजर चला कर वक्फ की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त भी कराया गया।
पार्टी की गुटबाजी इस घटना के बाद और बढ़ गई। सरोजिनी अग्रवाल गुट का आरोप है कि इस कार्रवाई के पीछे मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश की भी   सक्रिय भूमिका थी पर मंत्री के प्रभाव के चलते उन्हें कोई छू भी नहीं सका। बसपा सरकार में इसी इलाके के दूसरे मुसलमान नेता और राज्यसभा सदस्य बाबू मुनकादअली की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तूती बोलती थी। शाहिद मंजूर और बाबू मुनकाद दोनों एक ही इलाके किठौर के हैं। तब बाबू मुनकाद का बेटा सलमान समांतर सत्ता केंद्र बन गया था। आरोप है कि अब वही भूमिका सपा सरकार के मंत्री का बेटा अदा कर रहा है। शाहिद मंजूर के ही करीबी ओमपाल गुर्जर ने सर्किट हाउस में पिछले दिनों उनकी मौजूदगी में एक सरकारी डाक्टर को सरेआम थप्पड़ लगाए थे। इस डाक्टर का कसूर यही था कि वह मंत्री के चहेते के इशारों पर भर्ती करने को तैयार नहीं था। इतना ही नहीं ओमपाल गुर्जर पर सपा विधायक गुलाम मोहम्मद के एक समर्थक की ठुकाई करने का मामला भी सामने आया था। सरोजिनी अग्रवाल गुट का दावा है कि सपा को अपराधियों और गुंडों की पार्टी बताने वाले मंत्री शाहिद मंजूर को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। वक्फ बोर्ड की जमीन हथियाने के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से भी यह खेमा आहत है।

 

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