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अफसरों को चौकस रहने को कहा सरकार ने PDF Print E-mail
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Thursday, 20 June 2013 10:08

लखनऊ। उत्तराखंड और नेपाल के पर्वतीय इलाकों में निरंतर वर्षा से इन क्षेत्रों से आने वाली नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील जिलों के मंडल आयुक्तों व जिलाधिकारियों को बाढ़ नियंत्रण व राहत उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने यह निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बाढ़ प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों को राहत कार्य तेज करने के निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी परिस्थिति में जनहानि नहीं होनी चाहिए।
बाढ़ की स्थिति पर त्वरित समन्वय और कार्यवाही के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन समूह का गठन किया गया है। राहत आयुक्त एल. वेंकटेश्वर लू ने बताया कि मुख्य सचिव के निर्देश के क्रम में बाढ़ से संबंधित विभागों के अधिकारियों को बाढ़ नियंत्रण, राहत एवं बचाव कार्यो की निरन्तर निगरानी रखने के लिए कहा गया है।
उन्होंने कहा है कि सभी अधिकारी सतर्कता बरतते हुए तैयारी पूरी रखें, जिससे बाढ़ से उत्पन्न परिस्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कारगर रणनीति तैयार कर उसे लागू कराया जा सके।
बाढ़ की पूर्व तैयारी के संबंध में 15 जून को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई थी,


जिसमें बाढ़ से संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव संबंधित मंडलों के मंडल आयुक्त और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए थे।इस बीच, उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में जोरदार बारिश से मची तबाही के कारण उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में बाढ़ की प्रबल आशंका के मद्देनजर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया है कि मुख्यमंत्री अखिलेश ने प्रदेश में बाढ़ और मूसलाधार बारिश से प्रभावित जनपदों की जानकारी लेने के बाद विशेष रूप से लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जनपदों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश के कारण नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ रहा है, इसलिए जिला प्रशासन विशेष रूप से नदियों के जलस्तर और बांधों की सुरक्षा पर ध्यान दें। यादव ने कहा कि राहत और बचाव कार्य में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि जनपद के वरिष्ठ अधिकारी आवश्यकता अनुसार समय रहते तैयारी कर लें। उन्होंने आगाह किया है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। (भाषा)

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