मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
बहादुरी का सच PDF Print E-mail
User Rating: / 1
PoorBest 
Tuesday, 04 June 2013 10:30

कृति श्री
जनसत्ता 4 जून, 2013: विगत दिनों पूरी दुनिया के मीडिया में एक जबर्दस्त हल्ला सुनने को मिला कि हॉलीवुड अभिनेत्री एंजेलिना जोली ने संभावित स्तन कैंसर से बचने के लिए अपने दोनों स्तन कटवा दिए। डबल मैस्टेक्टॉमी। ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में एंजेलीना जोली का एक लेख छपा कि महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति सचेत होना चाहिए और उसके लिए जिम्मेदार जींस का परीक्षण करवाना चाहिए। गौरतलब है कि महिलाओं में स्तन कैंसर और गर्भाशय के कैंसर के लिए दो जींस जिम्मेदार होते हैं- बीआरसीए-1 और बीआरसीए-2। अगर इस बात का पता चल जाए कि अमुक महिला में मौजूद इन दोनों जींस में कुछ गड़बड़ी है तो उसका इलाज समय पर संभव है। आमतौर पर ऐसे परीक्षण की कोई जरूरत नहीं होती, लेकिन अगर किसी महिला के परिवार में एक-दो पीढ़ी में ‘स्तन कैंसर’ का इतिहास होता है तो उसे इस परीक्षण की सलाह दी जाती है।
जिस समय तमाम समाचार पत्रों में एंजेलीना जोली की ‘बहादुरी’ के किस्से छप रहे थे, उसी समय न जाने क्यों मन में एक आशंका हो रही थी। आखिर इसके पीछे का सच क्या है? क्या सचमुच एंजेलीना जोली को दुनिया की महिलाओं की चिंता इस कदर सता रही थी कि उन्होंने अपने ‘सेक्स अपील’ के प्रतीक को ही कटवा दिया? बार-बार लग रहा था कि जरूर कोई घपला है। जब सच का पता चला तो आंखें खुली रह गर्इं और लगा कि सचमुच इस घिनौने पूंजीवाद में किसी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
सच्चाई यह है कि अमेरिका में एक कंपनी है मिरियाड जेनेटिक्स। उसका इंसानों के शरीर में मौजूद बीआरसीए 1 और बीआरसीए 2 जींस पर पेटेंट (प्रोडक्ट पेटेंट) है। यानी हमारे शरीर के जींस पर उसका कब्जा है। अमेरिका में इसके परीक्षण का खर्च है तीन हजार डॉलर। वहां इस परीक्षण पर भी इसी कंपनी का कब्जा है। पूरे अमेरिका में जांच कहीं भी कराई जाए, उसके खर्च का एक बड़ा हिस्सा इसी कंपनी के खाते में जाता है। एंजेलीना जोली की इस ‘बहादुरी’ के बाद इसे बढ़ा कर चार हजार डॉलर कर


दिया गया है। इसके अलावा रातोंरात कंपनी का शेयर चार प्रतिशत उछल गया।
हैरानी होती है कि हमारे शरीर में मौजूद तमाम जींस पर भी निजी कंपनियों का कब्जा हो चुका है और हमें इस बात का गुमान भी नहीं है कि हम किस हद तक गुलाम हैं। मजे की बात है कि इस कंपनी ने इन जींसों की खोज भी नहीं की थी। इसे ‘उटा विश्वविद्यालय’ में जनता के पैसों से खोजा गया था और फिर उसने यह खोज ‘मिरियाड जेनेटिक्स’ को बेच दी। इन पर इस कंपनी का एकाधिकार इस कदर है कि कोई अन्य व्यक्ति इस पर शोध भी नहीं कर सकता है। जाहिर है, पहले से ही मानसिक रूप से असुरक्षित अमेरिका में एंजेलीना जोली के इस उद्घाटन के बाद तमाम अमीर महिलाएं इस परीक्षण के लिए आगे आ रही होंगी। एंजेलीना जोली ने इस प्रचार के लिए कितने में सौदा किया होगा, अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है।
यहां मुझे याद आ रही हैं ‘मैडम क्यूरी’। उन्होंने अपने पति के साथ मिल कर रेडियम की खोज की थी। इसने चिकित्सा जगत में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया था। क्यूरी दंपति को जब चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार मिला तो उनके पास पुरस्कार समारोह में पहन कर जाने के लिए ढंग के कपड़े भी नहीं थे। उनके मित्रों ने कपड़ों का प्रबंध किया। समारोह में पहुंच कर जब मैडम क्यूरी ने वहां की महिलाओं को हीरे के आभूषणों में जगमगाता देखा तो उन्हें लगा कि इतने महंगे गहनों से तो विज्ञान के महत्त्वपूर्ण शोध किए जा सकते हैं। उनसे एक पत्रकार ने पूछा कि क्या वे अपनी इस खोज का पेटेंट कराएंगी, तो उनका जवाब था कि वैज्ञानिक आविष्कार अस्तित्व में आने के बाद से ही जनता की धरोहर होते हैं। उन्हें उनकी भलाई में लगाया जाना चाहिए, न कि पेटेंट कराके उनसे मुनाफा कमाया जाना चाहिए।
अब आप ही तय करिए, हमें किसकी ज्यादा जरूरत है- मैडम क्यूरी की या एंजेलीना जोली की!

आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?