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फरार सटोरिए हैं जयपुर में गहनों की मशहूर दुकान ‘मोतीसंस’ के मालिक PDF Print E-mail
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Tuesday, 04 June 2013 09:21

श्वेता दत्ता, जयपुर। जयपुर पुलिस ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा है कि आइपीएल में स्पॉट फिक्सिंग मामले में वांछित दो सटोरिए पवन जयपुर और संजय जयपुर दरअसल शहर में आभूषणों की मशहूर दुकानों की शृंखला मोतीसंस ज्वेलर्स के मालिक संदीप और संजय छाबड़ा हैं।
स्पॉट फिक्सिंग मामले में नाम सामने आने के बाद से ही दोनों फरार हैं और मुंबई पुलिस ने इनके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कर रखा है। बताते हैं कि इन दोनों के फरार होने में कथित रूप से विंदू दारा सिंह ने मदद की थी। विंदू इस मामले में फिलहाल जेल में हैं।
मुंबई पुलिस ने जयपुर पुलिस से पवन जयपुर और संजय जयपुर की तहकीकात करने, इनकी असली पहचान और पृष्ठभूमि के बारे में पता लगाने का अनुरोध किया था। इन दोनों की उम्र 35 से 40 के बीच बताई जा रही है। जयपुर पुलिस जल्द ही यह रिपोर्ट मुंबई पुलिस को सौंपने वाली है। इस मामले की जांच से जुड़े जयपुर पुलिस के सूत्रों ने कहा कि फिलहाल उन्हें सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग में इन दोनों की संलिप्तता के बारे में कोई सबूत हाथ नहीं लगे हैं। शहर में इन दोनों के कारोबारी प्रतिष्ठान पूरी तरह वैध और पंजीकृत हैं। लेकिन जांच के बाद हम भरोसे से कह सकते हैं कि पवन और संजय जयपुर वास्तव में संदीप और संजय छाबड़ा हैं। हम इस बात की भी पुष्टि कर सकते हैं कि ये दोनों दुबई भाग चुके हैं।


जांच टीम के मुखिया डीआइजी विशाल बंसल ने बताया कि अंतरिम रिपोर्ट में इन दोनों के आभूषणों और शेयरों के कारोबार का विस्तृत ब्योरा है।
जयपुर पुलिस पिछले एक हफ्ते से मोतीसंस के कर्मचारियों से लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस ने मोतीसंस के मैनेजर नवल किशोर से भी पूछताछ की है। सूत्रों के मुताबिक छाबड़ा परिवार के करीबी नवल किशोर पिछले 15 साल से इस ग्रुप      बाकी पेज 8 पर    उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी ८
के साथ हैं। पूछताछ में पता चला है कि मोतीसंस में कमोडिटी ट्रेडिंग और शेयरों का भी कारोबार होता था। सूत्रों ने बताया कि संभव है कि इन गतिविधियों की आड़ में ये दोनों सट्टेबाजी को अंजाम दे रहे थे। पुलिस के रिकार्ड के हवाले से सूत्रों ने बताया कि इन दोनों के दिवंगत पिता मोती छाबड़ा भी स्थानीय स्तर पर सट्टेबाजी की छोटी-मोटी गतिविधियों में संलिप्त थे। इस परिवार ने जौहरी बाजार में मोतीसंस नाम से पहली दुकान खोली थी। इसके बाद महज तीन साल में ही इनका कारोबार काफी फैल गया। व्यापारिक सूझबूझ से अपने कारोबार के तेजी से विस्तार के लिए कुछ समय पहले एक निजी फाउंडेशन ने इन्हें राजीव गांधी ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा था। एक समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इन दोनों को यह पुरस्कार प्रदान किया था।

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