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भारत के राष्ट्रीय गौरव की भावना का सम्मान करें : चीनी मीडिया PDF Print E-mail
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Monday, 20 May 2013 18:11

बीजिंग। चीनी मीडिया ने ‘‘भारत के राष्ट्रीय गौरव की भावना’’ को समझने और उसका सम्मान करने की वकालत करते हुए कहा है कि अगर भारत एक और जापान या फिलीपीन बन गया तो चीन के ‘आसपास का वातावरण’ प्रभावित होगा ।
चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग की भारत यात्रा के अवसर पर चीन के आधिकारिक मीडिया चीन-भारत के संबंधों के विश्लेषणों से भरे हुए हंै । एक टैबलॉयड ‘द ग्लोबल टाइम्स’ ने ‘मीडिया हाइप के पार चीन-भारत संबंधं’’ शीर्षक से अपना संपादकीय लिखा है  ।
लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी ने चीनी सेना के घुसपैठ से हाल ही में उत्पन्न मतभेद की पृष्ठभूमि मेें उसने लिखा है, ‘‘द्विपक्षीय संबंध में कई कमजोरियां हैं जिनका बाहर के लोग फायदा उठा सकते हैं । परस्पर विश्वास नहीं होने पर छोटे मतभेदों को भी बढ़ाया जा सकता है ।’’
चीन की सेना भारत की सीमा में 19 किलोमीटर तक अंदर घुस आई थी ।
अखबार ने लिखा है, ‘‘भारत के राष्ट्रीय गौरव की भावना मजबूत है लेकिन चीनी समाज उसे समझना नहीं चाहता । चीन के लोगों में भारत के प्रति समझ और सम्मान की कमी है । वे इसे पूर्वाग्रहों और गलत-कल्पनाओं के आधार पर देखते हैंं ।’’
उसने लिखा है, ‘‘चीन के साथ बराबरी के साथ चलने की संभावना वाला देश भारत, यदि चीन के प्रति अपने नीतियों के मामले में दूसरा जापान या फिलीपीन बन जाएगा तो उसके :चीन के: आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल


प्रभाव पड़ेगा ।’’
उल्लेखनीय है कि कुछ द्वीपोें को लेकर इन दिनों जापान और फिलीपीन के साथ चीन के संबंध अच्छे नहीं चल रहे हैं।
अखबार ने लिखा है कि चीन-भारत सीमा पर स्थिति जापान के साथ द्वीप समूहों या दक्षिण चीन सागर के बारे में विवाद के मुकाबले काफी अच्छी है ।
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत-चीन संबंधों के बारे में लिखा है कि ‘परस्पर संदेह’ के बावजूद कई दशकों में यह संबंधों का सबसे अच्छा दौर है ।’
अखबार ने संपादकीय में लिखा है, ‘‘द्विपक्षीय संबंधों के विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी चीन और भारत दोनों को लेनी चाहिए । मीडिया में उत्पन्न हाइप को कम करने के लिए दोनों को और ‘अच्छी खबरें’ पैदा करनी चाहिए । चीन-भारत के महत्वपूर्ण संबंधों के विकास के लिए सिर्फ दृढ़निश्चय ही नहीं बुद्धिमता की भी आवश्यकता है ।’’
उसने लिखा है, ‘‘मीडिया में आयी खबरों पर हल्ला मचाने से कोई लाभ नहीं है । सरकारों को लोगों की आम राय को दिशा देने में भी भूमिका निभानी चाहिए ।’’
बतौर प्रधानमंत्री पहले विदेश दौरे के लिए ली द्वारा भारत का चुनाव करने का हवाला देते हुए उसने लिखा है कि इसे इस रूप में देखा जा रहा है कि चीन अपने इस बड़े पड़ोसी को महत्व और सम्मान दे रहा है ।
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