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एशिया, भारत के प्रति चीनी नीति को शंका की नजर से देखते हैं भारतीय :सर्वेक्षण PDF Print E-mail
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Monday, 20 May 2013 18:09

मेलबर्न। चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग का नयी दिल्ली में पहुंचने पर भले ही शानदार स्वागत हुआ हो लेकिन एक सर्वेक्षण कहता है कि भारतीय एशिया में चीन की महत्वाकांक्षा तथा भारत के प्रति उसकी नीति को लेकर बहुत ही आशंकित हैं।
लॉवी इंस्टीट्यूट और आस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट के संयुक्त सर्वेक्षण में कहा गया है कि 83 फीसदी भारतीय चीन को सुरक्षा की दृष्टि से खतरा मानते हैं। आज ही यहां यह सर्वेक्षण जारी हुआ और इस कार्य में मैकआर्थर फाउंडेशन ने भी सहयोग किया।
इस सर्वेक्षण के अनुसार चीन के प्रति भारतीयों के अविश्वास के कई कारण हैं जिनमें चीन के पास परमाणु हथियार होना, तीसरे देशों में संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा, हिंद महासागर क्षेत्र में अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करने के उसके प्रयास और चीन भारत सीमा विवाद जैसी बातें शामिल हैं।
वैसे तो चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है लेकिन महज 31 फीसदी भारतीय ही चीन की प्रगति को भारत के लिए अच्छा मानते हंैं।
सर्वेक्षण के अनुसार 65 प्रतिशत भारतीय मानते हैं कि भारत को चीन का प्रभाव रोकने के लिए अन्य देशों से हाथ मिलाना चाहिए जबकि 64 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भारत को विश्व में अहम भूमिका निभाने के लिए चीन के साथ सहयोग करना चाहिए।
‘भारत सर्वेक्षण: भविष्य का सामना’ नामक यह सर्वेक्षण पिछले महीने लद्दाख में हुई चीनी घुसपैठ से काफी पहले पिछले साल के आखिर में किया गया जिसमेंं 1233 लोगों की राय ली गयी।
आॅस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक अमिताभ मट्टू ने कहा, ‘‘देखा गया है कि जितने लोगों पर यह सर्वेक्षण किया गया, उनका एक बहुत बड़ा हिस्सा चीन को सुरक्षा खतरे के रूप में देखता है।’’
मट्टू ने कहा, ‘‘इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत चीन से उत्पन्न खतरे को लेकर बहुत आशंकित हैं लेकिन ज्यादातर लोग


चीन के साथ बेहतर संबंध बनाने के पक्ष में हैं और वे भारतीय राजनीतिक नेतृत्व के पाकिस्तान के साथ सुलह संबंधी कदम का स्वागत करेंगे।’’
सर्वेक्षणकर्ताओं के अनुसार अमेरिका के प्रति भारतीयों में काफी उत्साह है लेकिन चीन की प्रगति से वे असहज हो जाते हैं। हालांकि चीन को थामने की किसी भी योजना पर उनमें :भारतीयों में: अस्पष्टता नजर आती है।
भारत में अभी भी पाकिस्तान की जमीन से आतंकवादी हमले एवं पाकस्तानी सेना की मंशा को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है लेकिन एक भारतीय प्रधानमंत्री की पाकिस्तान के साथ सुलह के साहसिक कदम को व्यापक घरेलू समर्थन मिलेगा।
सर्वेक्षण के मुताबिक कभी भारतीय जनमत का अनिवार्य लक्षण रहा ‘अमेरिका विरोध’ अब अतीत का हिस्सा बन गया है और भारतीय अन्य देशों की तुलना में न केवल अमेरिका के प्रति ज्यादा गर्मजोशी महसूस करते हैंं बल्कि वे उसे सुशासन के लिए आदर्श भी मानते हैं।
अगले दस सालों में चीन के साथ संबंध मजबूत करने के पक्ष में जहां 63 फीसदी भारतीय हैं वहीं अमेरिका के साथ ऐसा करने के पक्ष में 75 भारतीय हैं ।
सर्वेक्षण के मुताबिक 94 फीसदी भारतीय आतंकवाद को एक बहुत बड़ा कारण बताते हुए पाकिस्तान को खतरे के रूप में देखते हैं जबकि महज 31 फीसदी भारतीय ही अमेरिका को भारत के लिए खतरा मानते हैं।
इन सब के बावजूद 89 फीसदी भारतीय मानते हैं कि दोनों देशों की आम जनता शांति के पक्ष में है, 87 फीसदी भारतीयों का कहना है कि भारत पाकिस्तान संबंध में बड़े सुधार के लिए दोनों पक्षों की ओर से साहसिक कदम जरूरी है। 76 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं कि भारत पहल करे।
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