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निर्मल यादव के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला 30 दिन में हो PDF Print E-mail
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Tuesday, 14 May 2013 20:21

चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने यहां सीबीआई अदालत से कहा है कि वर्ष 2008 में सामने आये ‘न्यायाधीश के घर पर नगदी पहुंचाने’ के मामले में पूर्व जज निर्मल यादव के खिलाफ आरोप तय करने के बारे में 30 दिन के अंदर फैसला किया जाए। अदालत ने अभियोजन के लिए मंजूरी से संबंधित रिकार्ड की प्रतिलिपि मांगने वाली यादव की याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति परमजीत सिंह ने कल एक आदेश में कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश यादव 15 दिन के अंदर सीबीआई अदालत में रिकार्ड को देख सकती हैं। उन्होंने निचली अदालत से पूर्व जज के खिलाफ उसके बाद 15 दिन के भीतर आरोप तय करने के बारे में फैसला करने को कहा।
यादव के वकील ने दलील दी थी कि भारी-भरकम रिकार्ड होने के मामले में दस्तावेजों को देखने के बजाय प्रतिलिपियां देना ही


एकमात्र समाधान है।
सीबीआई अदालत ने यादव की याचिका को खारिज कर दिया था। सीबीआई ने इस आधार पर दस्तावेज देने की उनकी मांग का विरोध किया था कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता इसकी इजाजत नहीं देती।
सीबीआई ने मार्च, 2011 में पूर्व जज के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
13 अगस्त, 2008 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की एक और न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर के आवास पर 15 लाख रुपये पहुंचाये गये थे जिसकी जानकारी उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को दी।
यह धन कथित तौर पर निर्मल यादव के लिए भेजा गया था लेकिन नाम में संशय की वजह से यह कौर के आवास पर भेज दिया गया।
भाषा

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