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सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए ‘जासूस’ दर...दर लगा रहा गुहार PDF Print E-mail
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Monday, 06 May 2013 09:59

चंडीगढ़। ‘जासूसी’ के आरोप में पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में आठ साल से अधिक समय तक कैद रहने के बाद पिछले 39 साल से 70 वर्षीय वासुदेव शर्मा एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए दर...दर गुहार लगा रहे हैं।
शर्मा को भारत पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता होने के बाद 1974 में रिहा किया गया था। वह अपने और अपने परिवार के लिए दर...दर जाकर न्याय की गुहार लगाते आ रहे हैं।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर ही आरोप लगाया कि वे उन भारतीयों के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर रही है जिन्होंने पाकिस्तान की जेलों में खौफनाक समय काटा है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकार को उन लोगों की शिकायतों और समस्याओं पर विचार करना चाहिए जिन्होेंने देश के लिए काम किया है और अपने जीवन का बड़ा हिस्सा पाकिस्तानी जेलों में बिताया है।
शर्मा


के खिलाफ सियालकोट की एक अदालत में जासूसी का मुकदमा चला और उन्हें पाकिस्तान के रक्षा कानून के तहत 30 महीनों की कैद की सजा सुनाई गई। उन्हें पाकिस्तान के सरकारी गोपनियता अधिनियम के तहत भी 10 साल कैद की सजा सुनाई गई।
शर्मा ने बताया कि 125 अन्य कैदियों के साथ रिहा होने पर वह वाघा अटारी सीमा पहुंचे और वे सभी जांच तथा मेडिकल जांच के लिए अमृतसर जेल ले जाए गए।
शर्मा ने बताया कि उन्हें 12 साल पहले अपने इलाज के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से महज 5,000 रूपये मिले थे।
उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को भी सरबजीत सिंह की तर्ज पर वित्तीय मदद मिलनी चाहिए।
भाषा

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