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शारदा चिटफंड घोटाले की जांच सीबीआइ से कराई जाए: कांग्रेस PDF Print E-mail
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Thursday, 25 April 2013 08:57

कोलकाता (जनसत्ता)। कांग्रेस ने शारदा समूह चिटफंड घोटाले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि सीबीआइ जांच इसलिए जरूरी है, क्योंकि इस घोटाले में तृणमूल कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के भी नाम सामने आ रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने इस घोटाले से प्रभावित हुए निवेशकों के लिए पांच सौ करोड़ रुपए के एक राहत कोष बनाने का एलान किया है।
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने बुधवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शारदा समूह से जुड़े हैं।साथ ही इन नेताओं पर इस कंपनी के हितों को सुरक्षा प्रदान करने का भी आरोप लग रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की भागीदारी की बात भी कही जा रही है।
भट्टाचार्य ने कहा- मीडिया में खबर आई है कि शारदा समूह के अध्यक्ष सुदीप्त सेन ने सीबीआइ को लिखे पत्र में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर आरोप लगाया है। लिहाजा इस कांड की सीबीआइ से जांच के जरिए सच्चाई सामने लाना चाहिए। पत्रकारों के यह पूछे जाने पर कि इस मामले में क्या वे तृणमूल के सांसद कुणाल घोष की भागीदारी भी मानते हैं, तो भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल के सांसद का नाम मीडिया में आया है, लेकिन मैं बिना सबूत के इस पर कुछ नहीं कहूंगा।
सुदीप्त सेन की उनके दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तारी को भट्टाचार्य ने एक अच्छा कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस कांड की जांच के लिए जो विशेष जांच टीम (एसआइटी) बनाई है वह भी सही कदम है। हालांकि कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सिर्फ गिरफ्तारी से कुछ नहीं होगा, बल्कि जरूरी है कि इस मामले की सारी सच्चाई जांच के जरिए बाहर निकाली चाहिए। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में लाखों निवेशक बर्बाद हो गए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ जहां विभिन्न केंद्रीय एजंसियों ने चिटफंड के खिलाफ चेतावनी जारी की थी, वैसे में यह हैरतपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी


दावा कर रही हैं कि इसमें उनकी सरकार की कोई भागीदारी नहीं है।
इस बीच चिटफंड घोटाले से प्रभावित हुए निवेशकों के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने पांच सौ करोड़ रुपए का राहत कोष बनाने की घोषणा की। बुधवार को राज्य सचिवालय राइटर्स बिल्ंिडग में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इस राहत कोष के जरिए शारदा घोटाले से प्रभावित हुए मझोले व छोटे निवेशकों को आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राहत कोष में पैसा इक्ट्ठा करने के लिए राज्य सरकार तंबाकूजनित पदार्थों पर 10 फीसद का कर लगाएगी। उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों में यह 50 फीसद तक है, लेकिन पश्चिम बंगाल में 25 फीसद ही है। उन्होंने कहा कि राहत कोष में पैसा जमा करने के लिए सरकार 10 फीसद का अतिरिक्त टैक्स तंबाकूजनित पदार्थों पर लगाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने बताया कि शारदा समूह चिटफंड घोटाले की जांच के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) श्यामल कुमार सेन के नेतृत्व में जो जांच आयोग गठित किया गया है, उसके लिए अधिसूचना एक-दो दिन में जारी कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि अधिसूचना के जरिए शारदा समूह में निवेश करने वाले लोगों को बताया जाएगा कि वे अपनी शिकायतें कब व कहां दर्ज करा सकते हैं। ममता ने कहा कि निवेशकों को यह बताना होगा कि उन्होंने कब, कहां व कितना रुपया इस कंपनी में निवेश किया था। उन्होंने कहा कि जांच आयोग जो भी सिफारिशें देगा, राज्य सरकार उनका पालन करेगी।
ममता ने फिर दोहराया कि शारदा समूह के घोटाले के लिए राज्य सरकार किसी भी तरह से जिम्मेवार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली वाममोर्चा सरकार व केंद्र सरकार ने इस बारे में कोई भूमिका नहीं निभाई, लिहाजा इतना बड़ा घोटाला हो गया। ममता ने कहा कि इसके बाद भी उनकी सरकार शारदा समूह चिटफंड घोटाले से प्रभावित हुए निवेशकों के पास है और सरकार उनको सभी जरूरी सहायता देगी।

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