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शारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन सहित तीन गिरफ्तार PDF Print E-mail
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Wednesday, 24 April 2013 08:50

कोलकाता (जनसत्ता)। करोड़ों रुपए का घोटाला करने व लाखों निवेशकों का पैसा हजम कर जाने वाली चिट फंड कंपनी शारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन को उनके दो साथियों सहित जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। यह जानकारी विधान नगर के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि सुदीप्त सेन सहित तीन लोगों को पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग इलाके से मंगलवार को गिरफ्तार किया। इस बीच भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस कंपनी की धन जुटाने की गतिविधियों की जांच शुरू  कर दी है।
कुमार ने बताया कि सेन के साथ जिन दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें देवयानी मुखर्जी व अरविंद सिंह चौहान हैं। ये दोनों भी शारदा समूह के ही कर्मचारी हैं। कुमार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पश्चिम बंगाल के नंबर वाली एक स्कोर्पियो गाड़ी भी जब्त की है। उन्होंने कहा-हमारी टीम वहां मौजूद है और सभी जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों को वहीं की अदालत में पेश किया जाएगा। उसके बाद उनको ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाने की कोशिश की जाएगी। घोटाले की खबर उजागर होने के बाद से ही  सुदीप्त सेन फरार थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सेन को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था। साथ ही विधान नगर की पुलिस की ओर से भी सेन की गिरफ्तारी के लिए नोटिस जारी कर दिया गया था। तब से पुलिस सेन की तलाश कर रही थी। एक दिन पहले ही पुलिस ने शारदा समूह के डायरेक्टर मनोज कुमार नागेल को गिरफ्तार किया था।
इधर, सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल से पुलिस की एक टीम श्रीनगर पहुंच गई है। सूत्रों ने यह भी बताया कि सुदीप्त सेन व उनके दो सहयोगियों से सोनमर्ग इलाके के गंदरबल में एक गेस्टहाउस में पूछताछ की जा रही है। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के सांसद व शारदा समूह की मीडिया इकाई के सीईओ कुणाल घोष से भी इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है। यह जानकारी सूत्रों ने दी है।
शारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन की गिरफ्तारी उस समय हुई है जब मंगलवार को ही इस कंपनी के एक और एजंट ने कोलकाता में आत्महत्या की कोशिश की। 28 साल की इस एजंट का नाम तापसी सिंह है और बताया जाता है कि नींद की गोली खाकर उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश की। तापसी के साथ उनके पति नंदन सिंह भी शारदा समूह के एजंट थे। उनको अस्पताल में भर्ती किया गया


है।
पिछले करीब एक हफ्ते के दौरान जब से शारदा समूह के घोटाले की खबर उजागर हुई है, तब से लाखों की संख्या में इस कंपनी के निवेशक व एजंट राज्य के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें से कई एजंट व निवेशकों ने तो आत्महत्या भी कर ली। इसको लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष तृणमूल कांग्रेस व विरोधी वाममोर्चा एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि शारदा समूह समेत अनेकों चिट फंड कंपनियां पश्चिम बंगाल में पूर्ववर्ती वाममोर्चा के शासनकाल से ही सक्रिय हैं, वहीं विरोधी माकपा ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की शह पर ही ऐसी कंपनियां यहां फल-फूल रही थीं।
वाममोर्चा का कहना है कि अपने शासनकाल में इसने राज्य में सक्रिय चिट फंड कंपनियों पर नियंत्रण के लिए कानून लाने का प्रयास किया गया था, लेकिन राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह कानून बन नहीं पाया। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में वाममोर्चा के इस दावे को खारिज कर दिया।
उधर, पश्चिम बंगाल में शारदा समूह की कथित तौर पर धोखाधड़ी से चलाई जा रही निवेश योजना के खिलाफ जनाक्रोश के बीच भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस कंपनी की धन जुटाने की गतिविधियोंं की जांच शुरू  कर दी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूंजी बाजार नियामक इस बात की जांच कर रहा है कि जनता से धन जुटाने के दौरान क्या सामूहिक निवेश योजना (सीआइएस) नियमन का उल्लंघन किया गया। सूत्रों ने बताया कि सेबी ने ताजा दौर की यह जांच उसे कुछ शिकायतें मिलने के बाद शुरू  की है। सेबी शारदा समूह की ओर से बिना जरूरी मंजूरी के भारी मात्रा में धन जुटाने के मामले की जांच कर रहा है।
सीआइएस कारोबार का नियमन सेबी करता है। इस तरह से किसी इकाई के धन जुटाने के लिए नियामक की मंजूरी जरूरी होती है। इस तरह की योजनाआें में आम निवेशकों से धन जुटाया जाता है और इसे पहले से तय निवेश में लगाया जाता है। सीआइएस का विनियमन तो सेबी के हाथ में है पर चिटफंड फर्में उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं। चिटफंड व्यवसाय में गड़बडी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार राज्य सरकारों के पास है।

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