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नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में उतारने की वकालत PDF Print E-mail
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Monday, 24 December 2012 11:33

अंबरीश कुमार, लखनऊ। गुजरात में तीसरी बार सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी का बढ़ता कद भाजपा को उत्तर प्रदेश में नई उम्मीद जगा रहा है। उत्तर प्रदेश भाजपा अब नरेंद्र मोदी को आगामी लोकसभा चुनाव का केवल प्रचार के लिए नहीं, बल्कि उन्हें लखनऊ से लोकसभा का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव भी दे रही है। जब तक प्रदेश में सांप्रदायिकता का माहौल न बने तब तक भाजपा की राजनीतिक संभावना नहीं बनती और अब भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि पिछले कुछ समय में जो भी छुटपुट दंगे या फसाद हुए हैं, उससे माहौल बन रहा है।  ऐसे में नरेंद्र मोदी के यहां आने से भाजपा के पक्ष में हवा बन सकती है, क्योंकि वे फिलहाल हिंदुत्व के सबसे बड़े प्रतीक चेहरे है। इसी के साथ मंदिर आंदोलन के नायक रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पार्टी में वापसी से भी इसमें मदद मिल सकती है, हालांकि कल्याण सिंह की हिंदुत्व वादी छवि पर पिछड़ा नेता वाली छवि भारी पड़ चुकी है।
बहरहाल पार्टी की एक बड़ी चिंता सरकारी नौकरी की पदोन्नति में आरक्षण को लेकर अगड़ी जातियों के विरोध की है, जिससे उसका जनाधार दरक रहा है। शनिवार को ही फिरोजाबाद में भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी को एक कार्यक्रम में इस मुद्दे को लेकर काला झंडा दिखाया गया। यह मामला अभी और जोर पकड़ेगा, ऐसे में हिंदुत्व का मुद्दा उभारना ही पार्टी को बेहतर रणनीति नजर आ रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन ने कहा है कि देश की जनता जिन लोगों को उम्मीद की नजरों से देख रही है, उनमें नरेंद्र मोदी भी है। पार्टी अगर मोदी को लखनऊ से चुनाव लड़ाती है तो उन्हें खुशी होगी।
दूसरी तरफ भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि नरेंद्र मोदी का कद बढ़ा है यह सब मानते हैं और जहां पिछले चुनाव में भी ज्यादातर


क्षेत्रों से मोदी को बुलाने की मांग हुई थी, अब फिर लोग चाहते है कि नरेंद्र मोदी उनके क्षेत्र में आए ताकि उसका आम जनमानस पर ज्यादा से ज्यादा असर पड़े।
दरअसल उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रमोशन में आरक्षण को लेकर ज्यादा चिंतित है और अगर यह आंदोलन नहीं थमा तो पार्टी के मौजूदा सांसदों के खिलाफ भी उनके निर्वाचन क्षेत्रों में सर्वजन हिताय समिति अभियान छेड़ने का एलान पहले से कर रखा है। यही वजह है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश के नेताओं को प्रमोशन में आरक्षण को लेकर खुल कर बोलने को कह दिया है ताकि इस आक्रोश का कुछ फायदा उठाया जा सके। योगी आदित्यनाथ ने इसकी शुरुआत की तो सतीश महाना से लेकर अन्य नेता सामने आए और फिर पार्टी ने बाकायदा बयान जारी  कर इसका विरोध किया पर फिर भी ज्यादा असर नहीं हुआ। अब मोदी की जीत के बाद फिर इस तरफ ध्यान गया है। हालांकि समाजवादी पार्टी इसे गंभीरता से नहीं लेती। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ये लोग विधानसभा चुनाव में 116 सीट पाने पर मोदी को  प्रधानमंत्री का दावेदार बता रहे हैं जबकि मुलायम सिंह के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी को विधानसभा में उससे करीब दुगनी 225 सीटें मिल चुकी हैं। कम से कम तर्क तो ढंग का हो।
पर भाजपा प्रदेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन से निपटने के लिए सांप्रदायिकता का सहारा लेने की फि राक में है। वह दंगों की याद दिला रही है। वे दंगे जो इकतरफा हमला थे और जिसमे पार्टी नेताओं की ही बड़ी और खतरनाक भूमिका रही। फैजाबाद उदाहरण है, जहां मुसलमानों को सीधा निशाना बनाया गया। वह भी वोट के खेल में। पुलिस प्रशासन की आपराधिक लापरवाही से इसे मदद मिली पर अब फिर आशंका बढ़ रही है।

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