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नाकाम हुई ममता के रेल बजट के गुमशुदा कस्बे की तलाश PDF Print E-mail
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Monday, 10 December 2012 10:11

मनीष छिब्बर, नई दिल्ली। रेल मंत्री रहने के दौरान किया गया ममता का एक वादा पूरा नहीं हो पाया है। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 25 फरवरी, 2011 को पेश किए गए रेल बजट में पश्चिम बंगाल में कटवा और करीमगंज के बीच रेल लाइन बिछाने का एलान किया था।
हालांकि इसमें रेल मंत्रालय के अफसरों की कोई गलती नहीं है। अब उस रेल बजट के करीब दो साल होने जा रहे हैं पर अभी तक इस दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा जा सका है। वजह यह है कि अपनी तरफ से तमाम कोशिशों के बावजूद रेल मंत्रालय के अफसर करीमगंज नाम की जगह को ढूंढ निकालने में नाकाम रहे हैं जहां तक ममता ने रेल लाइन बिछाने का वादा किया था।
इन कस्बों का पता लगाने के लिए पूर्वी रेलवे (पश्चिम बंगाल इसी के तहत आता है) ने कटवा के कांग्रेसी विधायक रबींद्रनाथ चटर्जी की भी मदद ली। पर वे भी करीमगंज की तलाश में नाकाम हो गए। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर ने कहा कि ये कोई भुतही जगह है। किसी को नहीं


पता कि ये कहां है।
करीमगंज को खोज निकालने की सारी कोशिशें नाकाम हो जाने के बाद मंत्रालय इन कस्बों के बीच रेल लाइन बिछाने के प्रस्ताव को ‘ब्लू बुक’ से हटाने जा रहा है। ‘ब्लू बुक’ में रेलवे की सभी लंबित, जारी व प्रस्तावित परियोजनाओं का ब्योरा होता है।
पूर्वी रेलवे के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (निर्माण) एके हरित ने 21 जून, 2011 को रेलवे बोर्ड को भेजी गई चिट्ठी में कहा कि हरचंद कोशिशों के बावजूद कटवा के आस पास करीमगंज नाम की किसी जगह का पता नहीं चल पाया। इसी चिट्ठी में कहा गया कि हमें करीमगंज नाम के दो कस्बों का पता चला है लेकिन इसमें एक असम में है और दूसरा बिहार में गया के पास है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले लापरवाही और पर्याप्त ध्यान नहीं देने की वजह से एक गुमशुदा जगह की तलाश में रेलवे का इतना समय और पैसा बेवजह बर्बाद हुआ।

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