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कुत्तों के शौक से जन्मा नया बाजार PDF Print E-mail
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Monday, 22 August 2011 14:53

मुंबई, [एंड्रयू बुनकांब/द इंडिपेंडेट] भारत के ड्रांइगरूमों में आजकल बहुतायत में तमाम फैशनेबल चीजों के साथ विदेशी नस्ल के खूबसूरत कुत्ते शोभा बढ़ाते देखे जा सकते हैं। इनमें लैब्राडोर, पामेरियन, अल्सेशियन जैसी नस्लें प्रमुख होती हैं।

इसकी वजह यह है कि शहरों में कुत्ता पालने का क्रेज बढ़ रहा है। पहले यह चलन उच्च वर्ग में ही था, लेकिन देश की आर्थिक तरक्की ने मध्यम वर्ग में भी संपन्नता को बढ़ाया है। इसके चलते यह वर्ग भी कुत्ते पालने का शौकीन हो गया है। लोगों के इस शौक ने नए बाजार की शक्ल ले ली है।

कुत्तों के लिए खान-पान, रहन-सहन के प्रबंधन से लेकर होटल तक खोले जा रहे हैं। इंटरनेट पर ऐसी वेबसाइटें देखने को मिल रही हैं जो कुत्तों केलिए बढि़या हमसफर की तलाश करने का बीड़ा उठाए हुए हैं।

मुंबई की रोबिना गुप्ता और इनकी दोस्त इशिता सुकड़वाला ने डाग मेट आनलाइन के नाम से एक वेबसाइट शुरू की है जो इनके लिए वैवाहिक विज्ञापन के माध्यम से साथी की तलाश करती है। गुड़गांव की गीतिका कपूर ने


पप्पी लव वेबसाइट शुरू की है जो योग्य कुत्ते के लिए भोली भाली कुतिया खोजने का काम करती है। देश में कुत्तों के लिए पहला होटल गुड़गांव में खोला गया है।

महानगरों में एकाकी जीवन और फ्लैट कल्चर के कारण लोग एक दूसरे से ज्यादा घुलते मिलते नहीं हैं। दूसरी ओर आर्थिक विकास की तेज दौड़ ने पेशेवर लोगों की संख्या में इजाफा किया है। पति-पत्नी आफिस चले जाते हैं और घर में कुत्ते अकेले रह जाते हैं। ऐसे में इनके खान-पान में काफी दिक्कतें आती हैं। इस समस्या को दूर करने की खातिर दिल्ली के पूर्वी इलाके के अभिषेक कपूर और हिमांशु भसीन ने टिफिन वालों की तर्ज पर स्कूबी कारपोरेशन के नाम से एक कंपनी खोली है जो कुत्तों के लिए खाने का इंतजाम करती है। ये लोग अपने मीनू में तरह-तरह के व्यंजन रखते हैं और ग्राहक से 1600-3500 रूपये प्रति माह फीस कुत्तों को भोजन उपलब्ध कराने के बदले लेते हैं।

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