मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी भत्ते को मंत्रिपरिषद की हरी झंडी PDF Print E-mail
User Rating: / 17
PoorBest 
Saturday, 12 May 2012 11:32

जनसत्ता ब्यूरो
लखनऊ, 12 मई। उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार ने शुक्रवार को  बेरोजगारी भत्ते को हरी झंडी देने के साथ साथ पिछली सरकार के कई फैसले को भी पलट दिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश बेरोजगारी भत्ता योजना 2012 को लागू करने का फैसला किया गया। बेरोजगारी भत्ते की योजना से राज्य के लगभग नौ लाख बेरोजगार युवक व युवतियां लाभान्वित होंगे। इसमें मौजूदा वित्तीय वर्ष में लगभग 1113 करोड़ रुपए का व्यय भार राज्य सरकार पर आएगा।
सरकार के फैसले के मुताबिक हर बेरोजगार को प्रतिमाह एक हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। बेरोजगारी भत्ते का भुगतान त्रैमासिक किस्तों में होगा। मंत्रिपरिषद ने योजना लागू करने के लिए नियम व शर्तों को भी मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार योजना का लाभ 30 साल से अधिक आयु के ऐसे लोगों को मिलेगा, जो हाईस्कूल या समकक्ष परीक्षा पास हों और किसी भी रोजगार में न लगा हों। राज्य के किसी सेवायोजन कार्यालय में पंजीकृत हों। एसे लोगों को 40 साल की आयु पूरी करने तक बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। योजना का लाभ उन्हीं बेरोजगारों को मिलेगा, जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं और इस समय राज्य में निवास कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बेरोजगार के परिवार की सभी स्रोतों से आय 36 हजार रुपए वार्षिक से कम हो। उसके माता-पिता व सास-ससुर की  सभी स्रोतों से आय एक लाख 50 हजार रुपए वार्षिक या इससे कम हो। किसी वित्तीय वर्ष में 15 मार्च तक किसी सेवायोजन कार्यालय में पंजीकृत होने की दशा में बेरोजगारी भत्ता अगले


वित्तीय वर्ष में आवेदन जमा करने के माह के अगले माह की पहली तारीख से मान्य होगा।
योजना का क्रियान्वयन प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण व सेवायोजन निदेशालय व जिला स्तर पर जिलाधिकारी के निर्देशन में संबंधित सहायक निदेशक व जिला रोजगार सहायता अधिकारी के हाथों किया जाएगा। बेरोजगार व्यक्ति को रोजगार मिलने की दशा में बेरोजगारी भत्ते का भुगतान रोक दिया जाएगा। यह सूचित करने का दायित्व बेरोजगार व्यक्ति का ही होगा कि उसे रोजगार मिल गया है। गलत शपथ पत्र व गलत ब्योरा देने की स्थिति में भी संबंधित व्यक्ति का बेरोजगारी भत्ता रोक दिया जाएगा और उसके खिलाफ समुचित कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
मंत्रिपरिषद ने मायावती शासन में शासकीय ठेकेदारी में लागू आरक्षण व्यवस्था को भी खत्म करने का फैसला लिया। इसके साथ साथ संचालित समग्र ग्राम्य विकास योजना और आंबेडकर ग्राम सभा विकास योजना को भी खत्म कर दिया गया।  मंत्रिपरिषद ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को दिए जाने वाले मानदेय की दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह वृद्धि एक अप्रैल 2011 से लागू होगी।
अखिलेश सरकार ने आयुर्वेद व यूनानी विभाग में संविदा पर नियुक्त चिकित्सकों की मासिक संविदा राशि में भी बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव को पास कर दिया है। इस फैसले के अनुसार आयुर्वेद व यूनानी विभाग में संविदा पर नियुक्त चिकित्सक को भी चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के 13 दिसम्बर 2007 के शासनादेश अनुसार 18 हजार रुपए प्रतिमाह संविदा राशि दी जाएगी।

आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?