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जजों के फैसले का स्वागत PDF Print E-mail
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Friday, 19 August 2011 16:32

नई दिल्ली। संपत्ति सार्वजनिक करने के सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीशों के फैसले का गुरुवार को विभिन्न राजनीतिक दलों और विधि विशेषज्ञों ने स्वागत किया और इसे सही दिशा में उठाया गया एक कदम बताया।

शीर्ष न्यायपालिका में संपत्ति घोषित करने को लेकर महीनों चली बहस के बाद आखिरकार देश के प्रधान न्यायमूर्ति के जी बालाकृष्णन द्वारा बुधवार को बुलाई गई बैठक में इस बारे में सैद्धांतिक तौर पर निर्णय किया गया। केंद्रीय विधि मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि उनके फैसले का स्वागत है। संपत्ति की घोषणा कैसे की जानी चाहिए, यह न्यायाधीशों पर निर्भर करता है। वह देखेंगे कि न्यायाधीशों के हित में क्या ज्यादा अच्छा है।

मोइली ने कहा कि इसमें नया कुछ नहीं है। इसके लिए वह अनिच्छुक नहीं थे, लेकिन उनके लिए कुछ और भी पहलू हैं। वह निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार कभी नहीं चाहती थी कि न्यायाधीश दबाव में आएं या उन्हें कोई असुविधा हो। उन्होंने कहा कि अगर वह संपत्ति की घोषणा करते हैं तो इसका स्वागत है। भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने भी न्यायाधीशों के इस फैसले का स्वागत किया है।

सिंघवी ने कहा कि यह एक अच्छा और स्वागतयोग्य कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी निजी राय है। उन्होंने कहा कि अगर यह निर्णय पहले किया जाता तो न्यायपालिका बेवजह उठे विवाद से बच सकती थी। सिंघवी ने कहा कि यह लोगों के विश्वास और आस्था का सवाल है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों का फैसला सही दिशा में उठाया एक सही कदम है।

प्रसाद ने कहा कि न्यायपालिका के इस फैसले का स्वागत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर यह निर्णय पहले कर लिया जाता तो पिछले कुछ महीनों के विवाद को टाला जा सकता था। भाजपा


नेता ने यह भी कहा कि न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से उनका विनम्र अनुरोध है कि वे कृपया सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और लेख न लिखें। यह संयम बहुत जरूरी है। पूर्व महान्यायवादी और संविधान विशेषज्ञ सोली जे सोराबजी ने कहा कि न्यायाधीशों ने यह एक बहुत बढि़या निर्णय किया है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं समझता हूं कि यह एक अच्छा कदम है। कभी नहीं से बेहतर है देर से ऐसा निर्णय करना।

सोराबजी ने कहा कि न्यायाधीशों ने पूर्व प्रधान न्यायमूर्तियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के परामर्शों पर ध्यान दिया, जो न्यायपालिका की छवि बनाए रखना चाहते हैं। बहरहाल, सोराबजी ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि न्यायाधीशों ने शुरूआत में संपत्ति घोषित करने की जो अनिच्छा जताई थी उसका कारण उनकी यह आशंका रही होगी कि इसका दुरूपयोग किया जा सकता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि पूरा विवाद ऐसे अनावश्यक संकेतों की जड़ बन गया कि न्यायाधीशों के पास छिपाने के लिए कुछ है और वे कानून से ऊपर होना चाहते हैं। मुझे खुशी है कि सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीशों ने सही निर्णय किया। इस मुद्दे पर अभियान छेड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि इस कदम से हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को भी अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने न्यायाधीशों के इस निर्णय को उत्कृष्ट करार दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का यह एक महानतम कदम है। क्योंकि इससे वह सभी आशंकाएं दूर हो जाएंगी जो इस मुद्दे को लेकर उठी थीं। सोराबजी ने कहा कि यह इस फैसले से आम लोगों के बीच न्यायपालिका का कद ऊंचा उठेगा और उनका विश्वास मजबूत होगा।

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